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  1. EPFO ने किया EPS 2026 नोटिफाई, पेंशनभोगियों के लिए क्या बदलेगा, क्लेम सेटलमेंट कितना होगा आसान?

पर्सनल फाइनेंस

EPFO ने किया EPS 2026 नोटिफाई, पेंशनभोगियों के लिए क्या बदलेगा, क्लेम सेटलमेंट कितना होगा आसान?

Namita Shukla

4 min read | अपडेटेड July 02, 2026, 09:45 IST

सारांश

यह नई स्कीम उन कर्मचारियों पर लागू होगी जो 29 जून, 2026 को या उसके बाद कर्मचारी भविष्य निधि योजना, 2026' के सदस्य बनते हैं, बशर्ते उनकी सैलरी केंद्र सरकार द्वारा तय की गई सैलरी सीमा के दायरे में हो।

कर्मचारी पेंशन स्कीम

ईपीएफओ ने किया ईपीएस 2026 नोटिफाई, क्या हुए बड़े बदलाव? (Photo: Shutterstock)

केंद्र सरकार ने कर्मचारी पेंशन योजना (Employees' Pension Scheme, EPS) 2026 को नोटिफाई किया है। यह तीन दशकों से ज्यादा समय में कर्मचारी पेंशन योजना में किया गया सबसे बड़ा कानूनी बदलाव है। यह नई स्कीम 'कर्मचारी पेंशन योजना, 1995 (EPS-95)' और 'कर्मचारी परिवार पेंशन योजना, 1971' दोनों की जगह लेगी और इसे 'कोड ऑन सोशल सिक्योरिटी, 2020' के तहत लागू किया गया है, हालांकि इस नए ढांचे में पेंशन के वे मुख्य फायदे बरकरार रखे गए हैं जिनसे कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (Employees' Provident Fund Organisation, EPFO) के लाखों सब्सक्राइबर पहले से वाकिफ हैं, लेकिन इसमें कई बदलाव भी किए गए हैं। इन बदलावों का मकसद पेंशन प्रोसेसिंग को बेहतर बनाना, जवाबदेही को पहले से मजबूत करना और ज्यादा पेंशन के मामले में कानूनी स्पष्टता लाना है। आइए देखते हैं कि क्या बदला है और क्या वैसा ही रहेगा।

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कौन से लोग EPS 2026 ज्वॉइन कर सकते हैं?

यह नई स्कीम उन कर्मचारियों पर लागू होगी जो 29 जून, 2026 को या उसके बाद कर्मचारी भविष्य निधि योजना, 2026' के सदस्य बनते हैं, बशर्ते उनकी सैलरी केंद्र सरकार द्वारा तय की गई सैलरी सीमा के दायरे में हो। जो कर्मचारी पहले से ही EPS-95 के सदस्य थे या नए नियम लागू होने से पहले पुरानी पेंशन स्कीम के तहत पात्र थे, वे अपने-आप नए ढांचे के तहत बने रहेंगे। मौजूदा पेंशनर्स को बिना किसी रुकावट के पेंशन मिलती रहेगी।

पेंशन कैलकुलेशन पर क्या पड़ेगा इसका असर?

इन सब के बीच EPF सब्सक्राइबर्स के लिए एक जो सबसे बड़ा सवाल है, वह यह है कि क्या इस बदलाव के बाद पेंशन कैलकुलेशन बदलेगी, पेंशन का फॉर्मूला कुछ नया होगा? इसका जवाब है, नहीं। महीने की पेंशन की कैलकुलेशन मौजूदा फॉर्मूले के आधार पर ही की जाती रहेगी-

महीने की पेंशन = (पेंशन योग्य सैलरी × पेंशन योग्य सर्विस) ÷ 70

पेंशन योग्य सैलरी का निर्धारण पेंशन फंड से बाहर निकलने से पहले के पिछले 60 महीनों की औसत मंथली सैलरी के आधार पर किया जाता रहेगा। इसी तरह, महीने की पेंशन के लिए 10 साल की न्यूनतम जरूरी सर्विस की शर्त में भी कोई बदलाव नहीं किया गया है। योगदान का ढांचा भी काफी हद तक वैसा ही रहेगा। एम्प्लॉयर (नियोक्ता) कर्मचारी की सैलरी (तय सैलरी लिमिट के हिसाब से) का 8.33% हिस्सा पेंशन फंड में जमा करते रहेंगे, जबकि केंद्र सरकार 1.16% का योगदान देती रहेगी। हालांकि, सुप्रीम कोर्ट के अहम फैसले के बाद नए नोटिफिकेशन में ज्यादा पेंशन का ऑप्शन औपचारिक रूप से शामिल किया गया है। जिन कर्मचारियों ने ज्यादा पेंशन का ऑप्शन चुना है, उन्हें इसका फायदा मिलता रहेगा। इसके लिए एम्प्लॉयर तय सैलरी लिमिट से ज्यादा सैलरी पर अतिरिक्त रकम जमा करेंगे, जिससे ऐसे सदस्यों के लिए एम्प्लॉयर का कुल योगदान 9.49% हो जाएगा।

सदस्य कम से कम 10 साल की योग्य सर्विस पूरी करने और रिटायरमेंट की तय उम्र तक पहुंचने के बाद सुपरएनुएशन पेंशन (रिटायरमेंट के बाद मिलने वाली पेंशन) के लिए योग्य हो जाते हैं। 50 साल की उम्र से अर्ली पेंशन (समय से पहले पेंशन) की सुविधा मिलती रहेगी, लेकिन सामान्य रिटायरमेंट की उम्र से पहले पेंशन लेने पर हर साल पेंशन की रकम में 4% की कटौती होगी।

10 साल की सर्विस पूरी करने से पहले नौकरी छोड़ने वाले कर्मचारी या तो योग्य फायदे निकाल सकते हैं या स्कीम सर्टिफिकेट ले सकते हैं। इससे उन्हें भविष्य में EPF के दायरे में आने वाली किसी कंपनी में दोबारा शामिल होने पर अपनी सर्विस को जोड़ने की सुविधा मिलती है। न्यूनतम EPS पेंशन भी 1,000 रुपये प्रति महीने पर वैसी ही बनी रहेगी।

क्लेम प्रोसेस हो जाएगा आसान

EPS-2026 के तहत किया गया सबसे बड़ा ऑपरेशनल बदलाव पेंशन क्लेम प्रोसेस करने से जुड़ा है। EPFO को निर्देश दिया गया है कि वह पेंशन के सभी क्लेम 20 दिनों के भीतर निपटाए। अगर डॉक्यूमेंट अधूरे हैं, तो आवेदकों को उसी टाइमलाइन के अंदर कमियों के बारे में जानकारी दी जानी चाहिए। इससे भी अहम बात यह है कि अगर किसी सही क्लेम में बिना किसी ठोस वजह के देरी होती है, तो EPFO को देरी वाली रकम पर 12% सालाना ब्याज देना होगा। नोटिफिकेशन में यह भी कहा गया है कि यह ब्याज जिम्मेदार EPF कमिश्नर की सैलरी से वसूला जाएगा, जिससे प्रशासनिक देरी के लिए व्यक्तिगत जवाबदेही तय होगी।

यह स्कीम योग्य परिवार के सदस्यों के लिए पेंशन का फायदा बनाए रखती है, जिसमें जीवनसाथी, बच्चे, अनाथ, दिव्यांग बच्चे, नॉमिनी और आश्रित माता-पिता शामिल हैं (जहां भी लागू हो)। जिन मामलों में जीवनसाथी जीवित नहीं है लेकिन बच्चे जीवित हैं, वहां पात्र बच्चों को विधवा पेंशन के 75% के बराबर अनाथ पेंशन मिलेगी।

इसी तरह, जो कर्मचारी नौकरी के दौरान स्थायी और पूरी तरह से विकलांग हो जाते हैं, उन्हें न्यूनतम जरूरी सेवा पूरी किए बिना भी विकलांगता पेंशन मिलती रहेगी, बशर्ते पेंशन फंड में कम से कम एक महीने का योगदान जमा किया गया हो।

लेखकों के बारे में

Namita Shukla
Namita Shukla is a seasoned journalist with over 15 years of experience in Hindi media. She has worked with some of the most reputed news organizations, including Navbharat Times, Dainik Jagran, Aaj Tak, and Hindustan Times Hindi. Throughout her career, Namita has reported on a wide range of beats such as national affairs, sports, business, and entertainment, bringing clarity and depth to her reporting. In addition to her journalistic work, she is a certified fact-checker by both Google and Meta, underscoring her commitment to accuracy and ethical journalism in the digital age.

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