पर्सनल फाइनेंस
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3 min read | अपडेटेड January 30, 2026, 13:16 IST
सारांश
Budget 2026: म्यूचुअल फंड संस्था एम्फी ने बजट 2026 के लिए सरकार को खास सुझाव दिए हैं। एम्फी चाहता है कि न्यू टैक्स रिजीम में भी ELSS पर अलग से टैक्स छूट मिले। इसके अलावा निवेश के लिए 500 रुपये के गुणांक की पाबंदी हटाने की भी मांग की गई है।

बजट 2026 में ईएलएसएस को लेकर बड़े बदलावों की उम्मीद है।
बजट 2026 की तैयारियां शुरू हो चुकी हैं और इस बार म्यूचुअल फंड्स में निवेश करने वालों के लिए बड़ी खुशखबरी आ सकती है। म्यूचुअल फंड संस्था एम्फी ने सरकार को कुछ ऐसे सुझाव दिए हैं जो ईएलएसएस यानी इक्विटी लिंक्ड सेविंग्स स्कीम को फिर से लोकप्रिय बना सकते हैं। ईएलएसएस हमेशा से नए निवेशकों के लिए शेयर बाजार में कदम रखने का सबसे आसान और सुरक्षित रास्ता रहा है। लेकिन हाल के वर्षों में टैक्स नियमों में हुए बदलावों के कारण इसकी चमक थोड़ी फीकी पड़ गई थी। अब एम्फी की कोशिश है कि इसे नए टैक्स रिजीम में भी आकर्षक बनाया जाए ताकि ज्यादा से ज्यादा लोग शेयर बाजार का हिस्सा बन सकें।
एसोसिएशन ऑफ म्यूचुअल फंड्स इन इंडिया यानी एम्फी ने वित्त मंत्रालय के सामने दो मुख्य प्रस्ताव रखे हैं। पहला प्रस्ताव टैक्स से जुड़ा है और दूसरा निवेश की प्रक्रिया को सरल बनाने से संबंधित है। एम्फी का मानना है कि अगर ये बदलाव लागू होते हैं तो ईएलएसएस में रिटेल निवेशकों की भागीदारी काफी बढ़ जाएगी। दरअसल ईएलएसएस एक ऐसा प्रोडक्ट है जो कम पैसे में निवेश शुरू करने की सुविधा देता है और इसमें तीन साल का लॉक-इन पीरियड होता है जो लंबी अवधि में निवेश की आदत डालता है। इसलिए इसे सरल बनाना बाजार और निवेशक दोनों के लिए फायदेमंद होगा।
वर्तमान समय में जो लोग नई टैक्स व्यवस्था यानी न्यू टैक्स रिजीम चुनते हैं उन्हें ईएलएसएस पर कोई विशेष टैक्स लाभ नहीं मिलता है। इसी वजह से कई निवेशक इससे दूरी बनाने लगे हैं। एम्फी ने मांग की है कि न्यू टैक्स रिजीम अपनाने वालों के लिए भी ईएलएसएस निवेश पर अलग से टैक्स कटौती की सुविधा दी जानी चाहिए। यह ठीक वैसा ही हो सकता है जैसे नेशनल पेंशन सिस्टम यानी एनपीएस के लिए अलग से छूट मिलती है। अगर ऐसा होता है तो नई टैक्स व्यवस्था वाले लोग भी टैक्स बचाने के साथ-साथ शेयर बाजार की बढ़त का फायदा उठा पाएंगे।
अभी के नियमों के मुताबिक ईएलएसएस में निवेश केवल 500 रुपये के गुणांक में ही किया जा सकता है। उदाहरण के तौर पर आप 500, 1000 या 1500 रुपये तो लगा सकते हैं लेकिन 600 या 1200 रुपये जैसी रकम निवेश नहीं कर सकते। एम्फी का कहना है कि यह नियम अब पुराना हो चुका है। डिजिटल पेमेंट के इस दौर में अब इस पाबंदी का कोई मतलब नहीं रह गया है। कई बार जब निवेशक एक फंड से दूसरे फंड में पैसा ट्रांसफर करते हैं तो रकम 500 के गुणांक में नहीं होती। ऐसी स्थिति में म्यूचुअल फंड कंपनियों को आवेदन रद्द करने पड़ते हैं जिससे निवेशकों को असुविधा होती है।
ईएलएसएस के ये नियम साल 2005 में बनाए गए थे जब ज्यादातर निवेश बैंक की शाखाओं में कैश के जरिए होता था। तब पैसों के मिलान और रिकॉर्ड रखने के लिए 500 का गुणांक मददगार साबित होता था। लेकिन आज सब कुछ ऑनलाइन हो गया है और अन्य सभी म्यूचुअल फंड स्कीमों में किसी भी रकम का निवेश स्वीकार किया जाता है। एम्फी का तर्क है कि इस नियम को हटाने से सरकार के खजाने पर कोई बोझ नहीं पड़ेगा लेकिन निवेशकों और फंड हाउस के लिए काम बहुत आसान हो जाएगा। यह बदलाव ईएलएसएस को एक आधुनिक और सुलभ निवेश विकल्प बना देगा।
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