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4 min read | अपडेटेड November 05, 2026, 16:04 IST
सारांश
जिन लोगों ने पिछले साल धनतेरस के आसपास सोना खरीदा था, उन्हें अब भी अच्छा रिटर्न मिला है। आइए समझते हैं कि पिछले साल खरीदे गए 10 ग्राम सोने की कीमत आज कितनी हो गई है और बाजार में सोने की मांग का क्या हाल है।

5 नवंबर 2026 को दिल्ली में 24 कैरेट सोने की कीमत करीब 1,45,650 रुपये प्रति 10 ग्राम है।
धनतेरस के मौके पर सोना खरीदना भारत में पुरानी परंपरा रही है। इस दिन लोग सोने के गहने, सिक्के और दूसरी कीमती धातुएं खरीदना शुभ मानते हैं। धनतेरस को धनत्रयोदशी भी कहा जाता है। यह पांच दिनों तक चलने वाले दिवाली उत्सव का पहला दिन होता है। इस साल धनतेरस के मौके पर सोने की कीमतें काफी ऊंचे स्तर पर हैं। हालांकि, हाल के दिनों में सोने के भाव अपने रिकॉर्ड स्तर से नीचे आए हैं, लेकिन पिछले साल के मुकाबले अब भी काफी ज्यादा हैं।
ऐसे में जिन लोगों ने पिछले साल धनतेरस के आसपास सोना खरीदा था, उन्हें अब भी अच्छा रिटर्न मिला है। आइए समझते हैं कि पिछले साल खरीदे गए 10 ग्राम सोने की कीमत आज कितनी हो गई है और बाजार में सोने की मांग का क्या हाल है।
5 नवंबर 2026 को दिल्ली में 24 कैरेट सोने की कीमत करीब 1,45,650 रुपये प्रति 10 ग्राम है। वहीं, 22 कैरेट सोना करीब 1,34,163 रुपये प्रति 10 ग्राम पर कारोबार कर रहा है। इन कीमतों में जीएसटी और गहने बनाने का चार्ज शामिल नहीं है। अगर पिछले साल धनतेरस यानी अक्टूबर 2025 की बात करें तो उस समय 24 कैरेट सोने का भाव करीब 1,32,278 रुपये प्रति 10 ग्राम था। इस हिसाब से पिछले साल धनतेरस के मुकाबले सोने की कीमत में करीब 9-10 फीसदी की बढ़ोतरी हुई है।
वहीं, 5 नवंबर 2025 को दिल्ली में 24 कैरेट सोने का भाव करीब 1,23,085 रुपये प्रति 10 ग्राम था। इसकी तुलना आज की कीमत से करें तो एक साल में सोना करीब 14.85 से 15 फीसदी महंगा हो चुका है। यानी अगर किसी व्यक्ति ने पिछले साल 5 नवंबर को 10 ग्राम सोना करीब 1.23 लाख रुपये में खरीदा था, तो आज उसकी कीमत लगभग 1.45 लाख रुपये हो गई है। इस तरह उसे करीब 22,500 रुपये का फायदा हुआ है।
सोने की कीमतों में तेजी के बाद जनवरी 2026 के आखिर में इसका भाव करीब 1.83 लाख रुपये प्रति 10 ग्राम तक पहुंच गया था। हालांकि, इसके बाद कीमतों में गिरावट आई और सोना अपने रिकॉर्ड स्तर से करीब 18-20 फीसदी नीचे आ गया। इसके बावजूद पिछले एक साल में सोने ने निवेशकों को अच्छा रिटर्न दिया है।
वर्ल्ड गोल्ड काउंसिल (डब्ल्यूजीसी) के मुताबिक, जुलाई-सितंबर तिमाही में दुनियाभर के केंद्रीय बैंकों ने कुल 321 टन सोना खरीदा। यह पिछले साल की समान तिमाही के मुकाबले 42 फीसदी ज्यादा है। इसके अलावा गोल्ड ईटीएफ में भी इस दौरान 211 टन का निवेश आया। भारत में सितंबर तिमाही के दौरान सोने की मांग पिछली तिमाही के मुकाबले 29 फीसदी बढ़ी। हालांकि, सालाना आधार पर इसमें 29 फीसदी की गिरावट रही। इस दौरान सोने के गहनों की मांग तिमाही आधार पर 33 फीसदी बढ़कर 100 टन पहुंच गई।
डब्ल्यूजीसी के अनुसार, जुलाई-सितंबर तिमाही में भारत की कुल सोने की मांग सालाना आधार पर 29 फीसदी घटकर 162.5 टन रही। इसकी वजह सोने की ऊंची कीमतें और इंपोर्ट ड्यूटी में बढ़ोतरी रही। हालांकि, डिजिटल गोल्ड की खरीद में सालाना आधार पर 44 फीसदी की बढ़ोतरी दर्ज की गई।
सोने को लंबे समय से सुरक्षित निवेश और महंगाई के खिलाफ बचाव के एक विकल्प के तौर पर देखा जाता है। वैश्विक स्तर पर अमेरिका-ईरान और रूस-यूक्रेन के बीच तनाव जैसी स्थितियों में भी सोने की मांग बढ़ सकती है। इसके अलावा केंद्रीय बैंकों की खरीदारी और गोल्ड ईटीएफ में निवेश भी इसकी कीमतों को सहारा देते हैं। हालांकि, इसका मतलब यह नहीं है कि आने वाले समय में भी सोना इसी तरह रिटर्न देगा। ब्याज दरों में बदलाव, महंगाई, डॉलर की कीमत और दुनिया की आर्थिक स्थिति का असर सोने के भाव पर पड़ता है।
इसलिए सिर्फ हालिया तेजी देखकर सोने में निवेश करने से बचना चाहिए। निवेश का फैसला अपने वित्तीय लक्ष्य और जोखिम उठाने की क्षमता को ध्यान में रखकर करना बेहतर है। यह भी ध्यान रखें कि सोने में पहले मिला रिटर्न भविष्य में मिलने वाले रिटर्न की गारंटी नहीं है।
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