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3 min read | अपडेटेड October 29, 2026, 16:04 IST
सारांश
दिल्ली सरकार की ओल्ड एज पेंशन स्कीम के तहत बुजुर्गों को उनकी उम्र के हिसाब से हर महीने पेंशन दी जाती है। 60 से 69 साल की उम्र के बुजुर्गों को हर महीने 2,000 रुपये मिलते हैं। वहीं, 70 साल या उससे ज्यादा उम्र के बुजुर्गों को हर महीने 2,500 रुपये की पेंशन दी जाती है।

सरकार का कहना है कि इस अभियान से पेंशन लाभार्थियों का रिकॉर्ड अपडेट करने और अपात्र लोगों की पहचान करने में मदद मिलेगी।
दिल्ली सरकार ने ओल्ड एज पेंशन स्कीम के तहत पेंशन पाने वाले करीब 4.4 लाख बुजुर्गों के वेरिफिकेशन की प्रक्रिया शुरू कर दी है। इस अभियान के तहत अधिकारियों की टीमें लाभार्थियों के घर जाकर उनकी पहचान की जांच करेंगी। इसका मुख्य उद्देश्य ऐसे लोगों की पहचान करना है, जिनकी मृत्यु हो चुकी है, जो एक से ज्यादा बार पेंशन का लाभ ले रहे हैं या जो इस योजना के लिए पात्र नहीं हैं।
पीटीआई की एक रिपोर्ट के मुताबिक दिल्ली सरकार इस पूरी प्रक्रिया को तीन महीने के भीतर पूरा करने की योजना बना रही है। अधिकारियों का मानना है कि जांच पूरी होने के बाद मौजूदा लाभार्थियों की सूची में बड़े बदलाव हो सकते हैं। इससे नए पात्र बुजुर्गों को पेंशन योजना से जोड़ने के लिए जगह बन सकती है।
दिल्ली सरकार की ओल्ड एज पेंशन स्कीम के तहत बुजुर्गों को उनकी उम्र के हिसाब से हर महीने पेंशन दी जाती है। 60 से 69 साल की उम्र के बुजुर्गों को हर महीने 2,000 रुपये मिलते हैं। वहीं, 70 साल या उससे ज्यादा उम्र के बुजुर्गों को हर महीने 2,500 रुपये की पेंशन दी जाती है।
यह रकम बुजुर्गों को अपने रोजमर्रा के खर्च पूरे करने में मदद करती है। ऐसे में पेंशन पाने वाले लोगों की सही पहचान करना जरूरी है, ताकि सरकारी सहायता केवल पात्र लाभार्थियों तक पहुंचे।
दिल्ली सरकार के सोशल वेलफेयर डिपार्टमेंट ने इस अभियान को पूरा करने के लिए कॉमन सर्विस सेंटर (CSC) नेटवर्क के साथ समझौता किया है। सीएससी के दिल्ली में करीब 6,000 सेंटर हैं। इसी नेटवर्क की मदद से लाभार्थियों का वेरिफिकेशन किया जाएगा।
इस प्रक्रिया के दौरान वेरिफिकेशन करने वाली टीमें लाभार्थियों के रजिस्टर्ड पते पर पहुंचेंगी। वहां बुजुर्गों की पहचान की पुष्टि करने के लिए बायोमेट्रिक जांच की जाएगी। इसमें फिंगरप्रिंट और आंखों की पुतली यानी आइरिस स्कैनर का इस्तेमाल होगा।
इसके अलावा, लाभार्थियों की लाइव फोटो ली जाएगी और इलेक्ट्रॉनिक दस्तावेजों के जरिए उनके रिकॉर्ड को अपडेट किया जाएगा। इस तरह सरकार के पास लाभार्थियों की पहचान और उनकी पात्रता से जुड़ी जानकारी को दोबारा जांचने का मौका होगा।
सीएनबीसी टीवी18 की रिपोर्ट के मुताबिक एक वरिष्ठ सरकारी अधिकारी ने कहा कि इस वेरिफिकेशन अभियान के बाद मौजूदा लाभार्थियों की संख्या के मुकाबले 20 से 25 फीसदी तक जगह खाली हो सकती हैं। ऐसा उन मामलों में हो सकता है, जहां लाभार्थी की मृत्यु हो चुकी है, एक ही व्यक्ति के नाम पर डुप्लीकेट रिकॉर्ड हैं या कोई व्यक्ति योजना की पात्रता पूरी नहीं करता। हालांकि, इसका मतलब यह नहीं है कि सभी खाली होने वाली जगहों पर तुरंत नए लोगों को पेंशन मिलने लगेगी। नए लाभार्थियों को जोड़ने के लिए पात्रता और संबंधित प्रक्रिया का पालन करना होगा।
अधिकारियों के अनुसार इस अभियान में पहले देरी हुई थी, क्योंकि किसी तीसरे पक्ष के माध्यम से आधार ऑथेंटिकेशन करने की अनुमति उपलब्ध नहीं थी। अब जरूरी मंजूरी मिलने के बाद वेरिफिकेशन की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है।
सरकार का कहना है कि इस अभियान से पेंशन लाभार्थियों का रिकॉर्ड अपडेट करने और अपात्र लोगों की पहचान करने में मदद मिलेगी। इससे योजना का लाभ सही लोगों तक पहुंचाने में आसानी हो सकती है।
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