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  1. दिवाली मुहूर्त ट्रेडिंग पर चुनना है म्यूचुअल फंड? तो सिर्फ रिटर्न नहीं, इन बातों को देखकर लें सही फैसला

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दिवाली मुहूर्त ट्रेडिंग पर चुनना है म्यूचुअल फंड? तो सिर्फ रिटर्न नहीं, इन बातों को देखकर लें सही फैसला

Upstox

4 min read | अपडेटेड October 29, 2026, 14:40 IST

सारांश

दिवाली मुहूर्त ट्रेडिंग पर अगर आप म्यूचुअल फंड में निवेश करना चाहते हैं, तो केवल पिछला रिटर्न देखकर फैसला न करें। सही म्यूचुअल फंड चुनने के लिए साधारण रिटर्न के बजाय रोलिंग रिटर्न देखना बेहतर है।

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दिवाली मुहूर्त ट्रेडिंग पर बेस्ट म्यूचुअल फंड चुनने के लिए रोलिंग रिटर्न और रिस्क रेश्यो को परखना जरूरी है।

दिवाली पर मुहूर्त ट्रेडिंग के दौरान शेयर बाजार और म्यूचुअल फंड में निवेश को काफी शुभ माना जाता है। इस मौके पर कई निवेशक अपने पोर्टफोलियो में नए फंड शामिल करने की तैयारी करते हैं। लेकिन अक्सर लोग केवल पिछला रिटर्न देखकर ही किसी फंड में पैसा लगाने की गलती कर बैठते हैं। जानकारों का कहना है कि सिर्फ रिटर्न देखकर निवेश का फैसला लेना नुकसानदेह हो सकता है। अगर आप इस दिवाली मजबूत फंड चुनना चाहते हैं, तो साधारण रिटर्न के बजाय रोलिंग रिटर्न, रिस्क रेश्यो, अल्फा, बीटा और फंड साइज जैसे जरूरी पैमानों को समझना होगा।

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साधारण रिटर्न नहीं, रोलिंग रिटर्न है असली पैमाना

अक्सर निवेशक फंड का पिछला रिटर्न देखकर आकर्षित हो जाते हैं। लेकिन साधारण रिटर्न सिर्फ दो तारीखों के बीच का मुनाफा दिखाता है, जो बाजार की टाइमिंग पर निर्भर करता है। इसके विपरीत एक्सपर्ट्स रोलिंग रिटर्न पर भरोसा करते हैं। रोलिंग रिटर्न बताता है कि फंड ने अलग-अलग समय में कैसा प्रदर्शन किया है। अगर किसी फंड का रोलिंग रिटर्न लगातार अच्छा है, तो इसका मतलब है कि उसने तेजी और मंदी दोनों तरह के बाजारों में बेहतरीन प्रदर्शन किया है। यह फंड की स्थिरता को साफ तौर पर दर्शाता है।

जोखिम और सुरक्षा को नापने वाले रेश्यो

फंड चुनते समय यह देखना जरूरी है कि फंड मैनेजर ने रिटर्न के लिए कितना रिस्क उठाया है। इसके लिए एक्सपर्ट्स शार्प रेश्यो और सोर्टिनो रेश्यो की जांच करते हैं। शार्प रेश्यो बताता है कि फंड ने जोखिम के मुकाबले कितना रिटर्न दिया है। ऊंचा शार्प रेश्यो यह साबित करता है कि फंड मैनेजर ने कम रिस्क लेकर अधिक मुनाफा कमाया है। वहीं सोर्टिनो रेश्यो फंड के डाउनसाइड रिस्क को मापता है। यह रेश्यो दिखाता है कि बाजार गिरने पर फंड कितना सुरक्षित रहता है। ज्यादा सोर्टिनो रेश्यो वाला फंड मंदी के समय निवेशकों की पूंजी को सुरक्षित रखता है।

फंड मैनेजर की काबिलियत परखने के लिए अल्फा और बीटा

फंड के स्वभाव और फंड मैनेजर की क्षमता को समझने के लिए अल्फा और बीटा सबसे अहम हैं। बीटा बताता है कि बाजार के उतार-चढ़ाव का फंड पर क्या असर पड़ता है। यदि किसी फंड का बीटा 1 से कम है, तो उसमें बाजार के मुकाबले कम उतार-चढ़ाव होता है और वह अपेक्षाकृत सुरक्षित रहता है। दूसरी तरफ अल्फा सबसे महत्वपूर्ण पैमाना है। अल्फा दिखाता है कि फंड ने अपने बेंचमार्क के मुकाबले कितना अतिरिक्त रिटर्न कमाया है। पॉजिटिव अल्फा का मतलब है कि फंड मैनेजर ने अपनी रणनीति से बाजार और बेंचमार्क दोनों को पीछे छोड़ दिया है।

किसी भी एक्टिव फंड में निवेश से पहले यह देखना जरूरी है कि उसने अपने बेंचमार्क इंडेक्स को लगातार पछाड़ा है या नहीं। अगर कोई फंड अपने बेंचमार्क से भी कम रिटर्न दे रहा है, तो उसमें पैसा लगाने का कोई मतलब नहीं रहता। इसके अलावा फंड का एसेट अंडर मैनेजमेंट यानी एयूएम भी बहुत मायने रखता है। फंड का साइज न तो बहुत छोटा होना चाहिए और न ही इतना बड़ा कि उसे मैनेज करने में परेशानी आए। खासतौर पर मिडकैप कैटेगरी में फंड का साइज सही होना काफी जरूरी हो जाता है। इसलिए मुहूर्त ट्रेडिंग पर इन सभी बातों की जांच करके ही निवेश करें।

(डिस्क्लेमर: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें।)

लेखकों के बारे में

Upstox
Upstox Hindi News Desk पत्रकारों की एक टीम है जो शेयर बाजारों, अर्थव्यवस्था, वस्तुओं, नवीनतम व्यावसायिक रुझानों और व्यक्तिगत वित्त को उत्साहपूर्वक कवर करती है।

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