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  1. ये कंट्रैरियन इन्वेस्टिंग क्या बला है? ग्लोबल टेंशन के बीच निवेशकों में इसका तेजी से बढ़ रहा क्रेज

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ये कंट्रैरियन इन्वेस्टिंग क्या बला है? ग्लोबल टेंशन के बीच निवेशकों में इसका तेजी से बढ़ रहा क्रेज

विकास तिवारी

4 min read | अपडेटेड June 10, 2026, 18:08 IST

सारांश

ग्लोबल टेंशन और शेयर बाजार के उतार चढ़ाव के बीच कंट्रैरियन इन्वेस्टिंग का क्रेज तेजी से बढ़ रहा है। यह एक ऐसी इन्वेस्टमेंट स्ट्रेटजी है जिसमें निवेशक भीड़ के साथ चलने के बजाय उसके उलट फैसला लेते हैं।

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शेयर बाजार के उतार चढ़ाव के बीच कंट्रैरियन इन्वेस्टिंग से अच्छी कमाई करने का पूरा तरीका।

शेयर बाजार में जब भी उतार चढ़ाव आता है, तो आम तौर पर निवेशक घबरा जाते हैं और अपने शेयर बेचने लगते हैं। लेकिन इसी बाजार में कुछ ऐसे चालाक निवेशक भी होते हैं जो भीड़ के साथ बहने के बजाय बिल्कुल अलग रास्ता चुनते हैं। आजकल दुनिया भर में चल रहे भू राजनैतिक तनाव और बाजार की उथल पुथल के बीच निवेश की एक खास तकनीक बहुत पॉपुलर हो रही है, जिसे कंट्रैरियन इन्वेस्टिंग कहा जाता है।

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कंट्रैरियन इन्वेस्टिंग का असली मतलब

कंट्रैरियन इन्वेस्टिंग निवेश का एक ऐसा तरीका है जो पूरी तरह से बाजार के सेंटिमेंट के विपरीत काम करता है। दिग्गज निवेशक वॉरेन बफे का एक मशहूर डायलॉग है कि जब सब लालची हो रहे हों तो डरपोक बन जाओ, और जब सब डर रहे हों तब लालची बन जाओ। कंट्रैरियन इन्वेस्टिंग इसी सिद्धांत पर काम करती है। जब बाजार में किसी गड़बड़ी या मंदी की वजह से अच्छी और मजबूत कंपनियों के शेयर भी सस्ते दामों पर मिलने लगते हैं, तब ये निवेशक उन्हें अपने पोर्टफोलियो में शामिल करते हैं। इनका मानना होता है कि बाजार का डर अस्थाई है और आने वाले समय में जब स्थितियां सुधरेंगी, तो इन कंपनियों का ऑपरेशन से रेवेन्यू और नेट प्रॉफिट फिर से बढ़ेगा, जिससे इन्हें तगड़ा रिटर्न मिलेगा।

ग्लोबल टेंशन के बीच क्यों बढ़ रहा है इसका क्रेज?

इस समय मिडिल ईस्ट के संकट और ग्लोबल मार्केट के दबाव के चलते भारतीय शेयर बाजार में काफी उतार चढ़ाव देखा जा रहा है। कई सेक्टर्स जैसे आईटी और मेटल्स में अच्छा खासा करेक्शन आ चुका है। ऐसे माहौल में आम निवेशक डरकर अपना पैसा निकाल रहे हैं, लेकिन कंट्रैरियन निवेशकों के लिए यह एक बंपर सेल की तरह है। वे जानते हैं कि ग्लोबल टेंशन की वजह से कंपनियों की प्रोडक्शन कैपेसिटी या उनके बिजनेस मॉडल में कोई गड़बड़ी नहीं आई है, बल्कि यह गिरावट बाहरी कारणों से है। इसलिए वे इस मंदी का फायदा उठाकर फंडामेंटली मजबूत कंपनियों के शेयरों को बहुत कम कीमत पर खरीद रहे हैं। यही वजह है कि आज के समय में इस स्ट्रेटजी का क्रेज बहुत तेजी से बढ़ रहा है।

फ्यूचर के लिए शानदार ऑपरेशनल परफॉर्मेंस की उम्मीद

इस निवेश तकनीक का सबसे बड़ा फायदा यह है कि इसमें आपको सेफ्टी मार्जिन बहुत ज्यादा मिलता है। जब आप किसी बेहतरीन शेयर को उसके बुरे दौर में खरीदते हैं, तो उसके और नीचे गिरने का रिस्क बहुत कम होता है, जबकि फ्यूचर में उससे मिलने वाला प्रॉफिट कई गुना बढ़ जाता है। कंट्रैरियन निवेशक कंपनियों के पिछले कई सालों के फाइनेंशियल ट्रैक रिकॉर्ड, उनके नेट प्रॉफिट और उनके मैनेजमेंट की ताकत को देखते हैं। अगर कंपनी का ऑपरेशनल परफॉर्मेंस अच्छा है और उसके पास कैश की कोई कमी नहीं है, तो उसके शेयरों को इस उम्मीद के साथ खरीद लिया जाता है कि लॉन्ग टर्म में यह कंपनी दमदार वापसी करेगी।

कंट्रैरियन इन्वेस्टिंग सुनने में जितनी आकर्षक लगती है, इसके ऑपरेशन में उतना ही ज्यादा धैर्य और रिसर्च की जरूरत होती है। भीड़ के खिलाफ जाना हर किसी के बस की बात नहीं होती, क्योंकि कई बार ऐसा भी होता है कि जिस शेयर को आप सस्ता समझकर खरीद रहे हैं, वह किसी अंदरूनी गड़बड़ी की वजह से और नीचे गिरता चला जाए। इसे मार्केट की भाषा में गिरती हुई छुरी को पकड़ना भी कहा जाता है। इसलिए कंट्रैरियन इन्वेस्टिंग करते वक्त आपको अंधाधुंध खरीदारी नहीं करनी चाहिए। इसके लिए आपको कंपनी के रेवेन्यू, अर्निंग्स विजिबिलिटी और उसके फ्यूचर प्लान का पूरा एनालिसिस करना पड़ता है। अगर आपका नजरिया लंबा है और आपमें बाजार के उतार चढ़ाव को झेलने की हिम्मत है, तभी यह स्ट्रेटजी आपके लिए सबसे बेहतरीन साबित हो सकती है।

लेखकों के बारे में

विकास तिवारी
Vikash Tiwary is a finance journalist with 6+ years of newsroom experience. He is currently growing Upstox Hindi, crafting data-driven stories on stocks, personal finance, mutual funds, and global markets, while exploring how AI can simplify finance. His work spans Zee Business, TV9 Bharatvarsh, ABP News, India TV, and Inshorts. He also holds NISM certification.

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