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4 min read | अपडेटेड September 22, 2026, 11:28 IST
सारांश
शेयर बाजार में गिरावट की एक बड़ी वजह विदेशी निवेशकों (FIIs) की बिकवाली है। 21 सितंबर को FIIs ने 576.20 करोड़ रुपये के शेयर बेच दिए। इसके पहले 18 सितंबर को छोड़ दें तो पिछले कई दिनों से विदेशी निवेशक बिकवाली कर रहे हैं।

आज शेयर बाजार में गिरावट के पीछे मुनाफावसूली भी एक बड़ी वजह है।
भारतीय शेयर बाजार में आज 22 सितंबर को भारी उतार-चढ़ाव है। आज शुरुआती कारोबार में बाजार में बढ़त देखने को मिली, हालांकि बाद में यह लाल निशान पर चला गया। इसके पहले पिछले लगातार 4 कारोबारी दिनों तक बाजार में तेजी देखी गई थी। रिपोर्ट लिखे जाने के समय BSE Sensex में करीब 175 अंकों की गिरावट थी और यह 74,684.77 के स्तर तक लुढ़क गया। दूसरी तरफ Nifty 50 भी 40 अंक टूटकर 23,373.65 के लेवल पर ट्रेड करता दिखा। यहां हम समझेंगे कि बाजार में आज के उतार-चढ़ाव के लिए कौन से फैक्टर्स जिम्मेदार हैं।
शेयर बाजार में गिरावट की एक बड़ी वजह विदेशी निवेशकों (FIIs) की बिकवाली है। 21 सितंबर को FIIs ने 576.20 करोड़ रुपये के शेयर बेच दिए। इसके पहले 18 सितंबर को छोड़ दें तो पिछले कई दिनों से विदेशी निवेशक बिकवाली कर रहे हैं। विदेशी निवेशकों की लगातार बिकवाली से बाजार के सेंटीमेंट पर असर पड़ता है।
आज शेयर बाजार में गिरावट के पीछे मुनाफावसूली भी एक बड़ी वजह है। पिछले 4 कारोबारी दिनों में बाजार पहले ही करीब 1.3 फीसदी तक चढ़ चुका है। ऐसे में अब निवेशक मुनाफा निकालना बेहतर समझ रहे हैं। यही वजह है कि आज बाजार में बिकवाली का दबाव है।
शेयर बाजार में आज सेक्टर स्पेसिफिक बिकवाली भी दिख रही है। सबसे ज्यादा गिरावट IT शेयरों में है और यह करीब 1.57 फीसदी तक टूट गया है। इसके अलावा निफ्टी ऑटो, FMCG, फार्मा, PSU बैंक, प्राइवेट बैंक, हेल्थकेयर, कंज्यूमर ड्यूरेबल्स और ऑयल एंड गैस जैसे इंडेक्स भी लाल निशान पर ट्रेड करते दिखे, जिसने बाजार को नीचे खींच लिया।
पिछले कुछ दिनों में कच्चे तेल की कीमतों में लगातार गिरावट आई है। आज ब्रेंट क्रूड ऑयल का भाव 101.70 डॉलर प्रति बैरल के करीब है। पिछले 4 कारोबारी दिनों में तेल का भाव करीब 8 फीसदी टूट चुका है। हालिया गिरावट के पीछे एक मुख्य कारण सऊदी अरब के तेल निर्यात में सुधार के संकेत हैं। सैटेलाइट ट्रैकिंग डेटा से पता चला है कि वीकेंड में सऊदी अरब ने रास तनुरा में सात बहुत बड़े क्रूड कैरियर (VLCC) पर लगभग 14 मिलियन बैरल तेल लोड किया।
इससे संकेत मिलता है कि अपनी ईस्ट-वेस्ट पाइपलाइन में रुकावट के बाद सऊदी अरब अपना निर्यात वापस फारस की खाड़ी और होर्मुज की ओर ले जा रहा है। इसके अलावा होर्मुज से तेल का फ्लो भी बेहतर हुआ है। इससे सऊदी शिपमेंट अगस्त के स्तर से काफी बढ़ गए हैं, जिससे लंबे समय तक सप्लाई में रुकावट की तत्काल चिंताओं को कुछ हद तक कम करने में मदद मिली है।
अमेरिकी ट्रेजरी बॉन्ड यील्ड में आई कमी से वैश्विक स्तर पर निवेशकों का सेंटिमेंट सुधरा है। आज 22 सितंबर 2026 को अमेरिका की 10-वर्षीय ट्रेजरी बॉन्ड यील्ड घटकर 4.95% पर आ गई है। यील्ड कम होने से इमर्जिंग मार्केट्स जैसे भारत में विदेशी फंड्स की निकासी का दबाव कम होता है। तेल की कीमतें कम होने की वजह से इसमें गिरावट आई है। बता दें कि बॉन्ड यील्ड कम होने से निवेशक रिस्क लेने के लिए तैयार होते हैं और उनका रुझान शेयर बाजार की ओर बढ़ता है।
शुरुआती कारोबार में तेजी के पीछे एक और बड़ी वजह ग्लोबल मार्केट से मजबूत संकेत हैं। सोमवार को अमेरिकी बाजार मजबूती के साथ बंद हुए। इस दौरान Dow Jones Industrial करीब 0.71 फीसदी उछल गया। इसके साथ ही S&P में 1.49 फीसदी और Nasdaq Composite में 2.26 फीसदी की बढ़त देखी गई।
इसके अलावा ज्यादातर एशियाई बाजारों में आज खरीदारी का माहौल है। Nikkei 225 आज 1 फीसदी से ज्यादा उछल गया है। Straits Times, Hang Seng, Taiwan Weighted, Kospi और SET Composite भी हरे निशान पर ट्रेड करते दिखे।
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