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4 min read | अपडेटेड August 31, 2026, 11:09 IST
सारांश
अमेरिका और ईरान के बीच तनाव में एक बार फिर बढ़ोतरी नजर आ रही है। रविवार को अमेरिकी सेना ने स्ट्रेट ऑफ हॉर्मूज के पास Larak Island पर ईरान के दो रॉकेट लॉन्च सिस्टम पर हमला किया। यह जुलाई के आखिर के बाद से ईरानी इलाके पर अमेरिका का पहला ज्ञात हमला था।

जियो पॉलिटिकल टेंशन बढ़ने के साथ कच्चे तेल के भाव ने एक बार फिर रफ्तार पकड़ ली है।
भारतीय शेयर बाजार में आज 31 अगस्त को बिकवाली का जबरदस्त दबाव है। आज के कारोबार में BSE Sensex में 465 अंकों की बड़ी गिरावट आई है और यह 76,799.20 के स्तर तक लुढ़क गया है। दूसरी तरफ Nifty 50 भी 169 अंकों की कमजोरी के साथ 24007.10 के लेवल पर ट्रेड करता दिखा। अमेरिका और ईरान के बीच तनाव एक बार फिर बढ़ता हुआ दिख रहा है। इसके चलते आज क्रूड ऑयल की कीमतों में तेजी है। इसके अलावा डॉलर के मुकाबले रुपये में भी कमजोरी है। यहां हम समझेंगे कि बाजार में आज की गिरावट के लिए कौन से फैक्टर्स जिम्मेदार हैं।
अमेरिका और ईरान के बीच तनाव में एक बार फिर बढ़ोतरी नजर आ रही है। रविवार को अमेरिकी सेना ने स्ट्रेट ऑफ हॉर्मूज के पास Larak Island पर ईरान के दो रॉकेट लॉन्च सिस्टम पर हमला किया। यह जुलाई के आखिर के बाद से ईरानी इलाके पर अमेरिका का पहला ज्ञात हमला था। अमेरिका के एक अधिकारी ने रॉयटर्स को बताया कि IRGC के सैनिकों को स्ट्रेट ऑफ हॉर्मूज में सी-माइन्स के साथ रॉकेट लॉन्च करने की तैयारी करते देखा गया। इसके चलते अमेरिका ने यह कदम उठाया।
दूसरी तरफ ईरानी मीडिया की रिपोर्ट के मुताबिक ईरान के रिवोल्यूशनरी गार्ड्स ने सोमवार को कहा कि Larak Island पर अमेरिकी हमले के जवाब में उन्होंने जॉर्डन में अमेरिकी बेस 'किंग हुसैन' और 'अल अजराक' पर बैलिस्टिक मिसाइलों से हमला किया है। इन खबरों ने निवेशकों की चिंता बढ़ा दी, जिसके चलते बाजार पर दबाव बढ़ गया।
जियो पॉलिटिकल टेंशन बढ़ने के साथ कच्चे तेल के भाव ने एक बार फिर रफ्तार पकड़ ली है। आज ब्रेंट क्रूड ऑयल की कीमत 5 फीसदी से ज्यादा की बढ़ोतरी के साथ 90.47 डॉलर प्रति बैरल के स्तर पर पहुंच गई है। भारत अपनी ज्यादातर तेल जरूरतों के लिए दूसरे देशों पर निर्भर है। ऐसे में कच्चे तेल की कीमत बढ़ने से भारत का आयात बिल बढ़ता है।
आज डॉलर के मुकाबले रुपये की वैल्यू में भी कमजोरी नजर आ रही है। कच्चे तेल की ऊंची कीमतों और जियोपॉलिटिकल तनाव ने करेंसी पर दबाव डाला है। सितंबर में US फेड द्वारा ब्याज दरें बढ़ाने की बढ़ती उम्मीदों ने डॉलर को मजबूती दी है। इंटरबैंक फॉरेन एक्सचेंज मार्केट में रुपया US डॉलर के मुकाबले 95.56 पर खुला, जो पिछले बंद भाव से 13 पैसे कम था। शुक्रवार को यह 2 पैसे की बढ़त के साथ 95.43 पर बंद हुआ था। रुपये की वैल्यू में गिरावट ने भी बाजार पर दबाव बढ़ा दिया।
बाजार पर आज की गिरावट के पीछे एक और बड़ी वजह विदेशी निवेशकों (FIIs) की बिकवाली है। बीते कारोबारी दिन यानी 28 अगस्त को विदेशी निवेशकों ने 5,039.8 करोड़ रुपये के शेयर बेच दिए। इसके पहले 27 अगस्त को भी FIIs ने बिकवाली की थी। बता दें कि विदेशी निवेशकों की बिकवाली से बाजार पर दबाव तो बढ़ता ही है, साथ ही रुपये की वैल्यू पर भी असर पड़ता है।
सेक्टोरल इंडेक्स की बात करें तो आज NSE पर सभी सेक्टर्स में गिरावट नजर आ रही है। निफ्टी मेटल इंडेक्स 2 फीसदी से ज्यादा टूट गया है। निफ्टी IT, PSU बैंक और रियल्टी में भी 1.50 फीसदी से ज्यादा की गिरावट है। निफ्टी मीडिया तो 3.50 फीसदी से ज्यादा लुढ़क गया है। इसके अलावा निफ्टी ऑटो, FMCG, फार्मा, प्राइवेट बैंक, हेल्थकेयर, कंज्यूमर ड्यूरेबल्स और ऑयल एंड गैस समेत तमाम सेक्टर्स में बिकवाली हो रही है। इन सभी सेक्टर्स ने बाजार को नीचे खींच लिया है।
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