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4 min read | अपडेटेड July 17, 2026, 11:09 IST
सारांश
वारी एनर्जीज की सहायक कंपनी वारी ईएसएस ने 5.15 गीगावाट ऑवर (GWh) की क्षमता वाली बीईएसएस कंटेनर मैन्युफैक्चरिंग फैसिलिटी का ऑपरेशन शुरू कर दिया है। यह क्षमता पहले तय की गई 3.5 गीगावाट ऑवर से अधिक है।
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वारी एनर्जीज की सब्सिडियरी कंपनी वारी ESS ने शुरू की बीईएसएस कंटेनर मैन्युफैक्चरिंग फैसिलिटी।
रिन्यूएबल एनर्जी सेक्टर में काम करने वाली प्रमुख भारतीय कंपनी वारी एनर्जीज के शेयर आज फोकस में हैं। कंपनी ने एक्सचेंज को जानकारी दी है कि उसकी सब्सिडियरी कंपनी वारी एनर्जी स्टोरेज सॉल्यूशंस प्राइवेट लिमिटेड (वारी ESS) ने अपनी बैटरी एनर्जी स्टोरेज सिस्टम यानी BESS कंटेनर मैन्युफैक्चरिंग फैसिलिटी का ऑपरेशन शुरू कर दिया है। कंपनी का मानना है कि यह कदम भारत के इंटीग्रेटेड एनर्जी स्टोरेज मैन्युफैक्चरिंग इकोसिस्टम को बनाने में एक बहुत बड़ा मील का पत्थर साबित होगा। इस नई फैसिलिटी के शुरू होने से डोमेस्टिक मार्केट में क्लीन एनर्जी को बड़ा बढ़ावा मिलेगा।
कंपनी की तरफ से जारी की गई जानकारी के मुताबिक, यह बीईएसएस कंटेनर मैन्युफैक्चरिंग फैसिलिटी 5.15 गीगावाट ऑवर (GWh) की क्षमता वाली है। पहले इस फैसिलिटी के लिए केवल 3.5 गीगावाट ऑवर की क्षमता का प्लान बनाया गया था। लेकिन प्रोडक्शन की रुकावटों को दूर करके यानी डिबॉटलनेकिंग करके और बैटरी सेल्स की एनर्जी डेंसिटी में सुधार करके इसकी प्रोडक्शन कैपेसिटी को बढ़ा दिया गया है। यह फैसिलिटी पूरी तरह से एडवांस्ड टेक्नोलॉजी से लैस है। इसमें इंडस्ट्री 4.0 टेक्नोलॉजी, ऑटोमेटेड गाइडेड व्हीकल्स (AGVs), इंटेलिजेंट मटेरियल हैंडलिंग, ऑटोमेटेड असेंबली लाइन्स और एडवांस्ड टेस्टिंग व क्वालिटी एश्योरेंस सिस्टम का इस्तेमाल किया गया है। इसे यूटिलिटी स्केल और कमर्शियल व इंडस्ट्रियल एप्लिकेशंस के लिए डिजाइन किया गया है, जो बहुत ही भरोसेमंद और हाई क्वालिटी वाले एनर्जी स्टोरेज सॉल्यूशंस देगी।
वारी ईएसएस ने अपने बिजनेस को बढ़ाने के लिए 20 गीगावाट ऑवर का एक बड़ा रोडमैप तैयार किया है। यह बीईएसएस कंटेनर फैसिलिटी इसी बड़े रोडमैप का पहला मील का पत्थर है। कंपनी चालू फाइनेंशियल ईयर के दौरान अपने कुछ और बड़े प्लांट्स को चालू करने का इरादा रखती है। इसके तहत वर्तमान फाइनेंशियल ईयर में कंपनी 5.15 गीगावाट ऑवर की क्षमता वाला बैटरी पैक मैन्युफैक्चरिंग प्लांट चालू करेगी, जिसे पहले 3.5 गीगावाट ऑवर प्लान किया गया था। इसके साथ ही 3.5 गीगावाट ऑवर की क्षमता वाला लिथियम सेल मैन्युफैक्चरिंग प्लांट भी चालू किया जाएगा। यह सभी फैसिलिटी मिलकर देश के भीतर एक मजबूत घरेलू एनर्जी स्टोरेज इकोसिस्टम तैयार करेंगी, जिससे क्लीन एनर्जी के लक्ष्यों को हासिल करने में मदद मिलेगी और विदेशी टेक्नोलॉजी पर निर्भरता कम होगी।
भारत में जिस तेजी से सोलर और विंड पावर का विस्तार हो रहा है, उसे देखते हुए 24 घंटे बिजली की सप्लाई सुनिश्चित करने के लिए बीईएसएस बहुत महत्वपूर्ण हो गया है। यह सिस्टम दिन के समय बनने वाली रिन्यूएबल एनर्जी को स्टोर कर लेता है और पीक डिमांड के समय इसकी सप्लाई करता है। इससे ग्रिड की स्थिरता में सुधार होता है और पारंपरिक बिजली प्लांट पर निर्भरता कम होती है। वारी के डायरेक्टर सुनील राठी ने कहा कि बैटरी एनर्जी स्टोरेज सिस्टम रिन्यूएबल एनर्जी से चलने वाले फ्यूचर की रीढ़ की हड्डी है। उन्होंने कहा कि 3.5 गीगावाट ऑवर लिथियम सेल और 5.15 गीगावाट ऑवर बैटरी पैक की प्लानिंग के साथ वारी ईएसएस देश को क्लीन एनर्जी मैन्युफैक्चरिंग हब बनाने के विजन में अपना बड़ा योगदान दे रही है। यह निवेश सरकार के मेक इन इंडिया और आत्मनिर्भर भारत अभियान को भी मजबूत सपोर्ट देता है।
वारी ईएसएस मुख्य रूप से यूटिलिटी स्केल, इंफ्रास्ट्रक्चर और कमर्शियल एप्लिकेशंस के लिए बैटरी टेक्नोलॉजी और एनर्जी स्टोरेज सॉल्यूशंस बनाने का काम करती है। वहीं इसकी पैरेंट कंपनी वारी एनर्जीज एक प्रमुख रिन्यूएबल एनर्जी कंपनी है, जिसका काम सोलर मॉड्यूल, इंजीनियरिंग, प्रोक्योरमेंट एंड कंस्ट्रक्शन (EPC), इनवर्टर और ग्रीन हाइड्रोजन के क्षेत्र में फैला हुआ है। इस कंपनी की स्थापना साल 1990 में हुई थी और इसका हेडक्वार्टर मुंबई में स्थित है। कंपनी के मैन्युफैक्चरिंग प्लांट भारत के साथ-साथ अमेरिका में भी हैं और यह दुनिया के 20 से अधिक देशों में अपना ऑपरेशन चलाती है। कंपनी के इस नए कदम से इसके बिजनेस ग्रोथ को फ्यूचर में एक नई रफ्तार मिलने की पूरी उम्मीद जताई जा रही है।
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