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  1. अमेरिका में जेनेरिक दवाओं पर 2 साल तक नहीं लगेगा टैक्स, डोनाल्ड ट्रंप के फैसले से इन फार्मा शेयरों में हलचल

मार्केट न्यूज़

अमेरिका में जेनेरिक दवाओं पर 2 साल तक नहीं लगेगा टैक्स, डोनाल्ड ट्रंप के फैसले से इन फार्मा शेयरों में हलचल

विकास तिवारी

4 min read | अपडेटेड July 22, 2026, 10:47 IST

सारांश

अमरीकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने जेनेरिक दवाओं को लेकर बड़ा ऐलान किया है। 1 अगस्त 2026 से अगले दो सालों के लिए अमेरिका में लाई जाने वाली सभी जेनेरिक दवाओं पर 0% का टैरिफ लागू रहेगा। इस फैसले से अरबिंदो फार्मा और सन फार्मा जैसी भारतीय फार्मा एक्सपोर्टर्स को बड़ी राहत मिली है।

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अमरीकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने जेनेरिक दवाओं के इंपोर्ट पर दो साल के लिए जीरो% टैरिफ का ऐलान किया है। Image: Shutterstock

अमरीकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के एक सोशल मीडिया पोस्ट के बाद भारतीय फार्मा कंपनियों के शेयरों में हलचल देखने को मिल रही है। बुधवार सुबह अरबिंदो फार्मा, डॉ रेड्डीज लैबोरेटरीज, लुपिन, सन फार्मास्युटिकल्स इंडस्ट्रीज और जाइडस लाइफसाइंसेज जैसी भारतीय फार्मा एक्सपोर्टर्स कंपनियां फोकस में आ गई हैं। डोनाल्ड ट्रंप ने ऐलान किया है कि 1 अगस्त 2026 से लागू होने वाली दो साल की अवधि के लिए अमेरिका में लाई जाने वाली सभी जेनेरिक दवाओं पर जीरो% का टैरिफ जारी रहेगा। इस फैसले से अमेरिका को दवाएं एक्सपोर्ट करने वाली भारतीय फार्मा कंपनियों को फिलहाल बड़ी राहत मिली है।

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दो साल बाद लगेगा भारी टैरिफ

अमरीकी राष्ट्रपति ने यह भी साफ किया है कि दो साल का समय खत्म होने के बाद इन जेनेरिक दवाओं के एक्सपोर्ट पर एक साल की अवधि के लिए 100% का टैरिफ लगाया जाएगा। इसके बाद के समय में यह टैरिफ बढ़ाकर 200% कर दिया जाएगा। डोनाल्ड ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्रुथ सोशल पर एक पोस्ट में कहा कि यह कदम अमेरिका के अंदर जेनेरिक फार्मास्युटिकल प्रोडक्शन को दोबारा शुरू करने के लिए उठाया गया है। उन्होंने कहा कि जो कंपनियां दिए गए समय के भीतर अमेरिका में प्लांट और इक्विपमेंट नहीं बनाएंगी, उन पर पेनल्टी लगाई जाएगी। इस पॉलिसी का मुख्य मकसद अमरीकी लोगों की सुरक्षा करना है।

अमेरिका में लोकल मैन्युफैक्चरिंग पर जोर

डोनाल्ड ट्रंप ने आगे कहा कि पेटेंटेड, ब्रांडेड या इनोवेटिव दवाओं पर पहले से चली आ रही पॉलिसी आगे भी वैसी ही बनी रहेगी, जो काफी सफल रही है। उन्होंने दावा किया कि पूरे अमेरिका में इस समय रिकॉर्ड लेवल पर फार्मास्युटिकल फैसिलिटीज बनाई जा रही हैं। इससे पहले ट्रंप ने अप्रैल में एक एग्जीक्यूटिव ऑर्डर पर दस्तखत किए थे, जिसके तहत अमेरिका में इंपोर्ट होने वाली ब्रांडेड दवाओं पर 100% टैरिफ लगाया गया था। यह टैरिफ तब तक के लिए लागू किया गया था जब तक मैन्युफैक्चरर्स सरकारी दवा प्राइसिंग डील्स पर सहमत नहीं होते या अमेरिका के अंदर प्रॉडक्ट्स बनाने का वादा नहीं करते। अमरीकी फूड एंड ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन के अनुसार अमेरिका में बिकने वाली 90% से ज्यादा दवाएं जेनेरिक होती हैं।

भारतीय कंपनियों के रेवेन्यू में अमेरिका की हिस्सेदारी

अमेरिका का यह फैसला भारतीय फार्मा कंपनियों के लिए काफी अहम है क्योंकि उनका एक बड़ा बिजनेस अमेरिका पर निर्भर है। ब्लूमबर्ग के आंकड़ों के अनुसार वित्त वर्ष 26 में अरबिंदो फार्मा की कुल सेल्स में अमेरिका एक्सपोर्ट की हिस्सेदारी 46.16% रही है। यह कंपनी अमेरिका में सबसे बड़ी भारतीय जेनेरिक प्लेयर्स में से एक है और वहां इसके तीन मैन्युफैक्चरिंग साइट्स मौजूद हैं। इनमें से एक साइट डर्मेटोलॉजी, ट्रांसडर्मल और रेस्पिरेटरी प्रॉडक्ट्स जैसी खास फॉर्मूलेशन्स पर काम करती है। वहीं सन फार्मा के कुल रेवेन्यू का 30.26% हिस्सा वित्त वर्ष 26 में अमेरिका से आया है। सन फार्मा दुनिया की चौथी सबसे बड़ी स्पेशलिटी जेनेरिक फार्मा कंपनी है, जो अमेरिका में लिक्विड, क्रीम, ऑइंटमेंट, जेल, स्प्रे और इंजेक्टेबल्स की सप्लाई करती है।

लुपिन और जाइडस पर भी पड़ेगा असर

दूसरी भारतीय फार्मा कंपनियों की बात करें तो लुपिन को अपने कुल रेवेन्यू का 41.04% हिस्सा नॉर्थ अमेरिका से मिलता है। वहीं जाइडस लाइफसाइंसेज के लिए अमरीकी बिजनेस की हिस्सेदारी उसके कुल रेवेन्यू में 43.85% रही है। दूसरी तरफ, भारत और अमेरिका के बीच हाल ही में हुई व्यापारिक बातचीत में किसी ट्रेड एग्रीमेंट पर सहमति नहीं बन सकी है। अमरीकी ट्रेड रिप्रेजेंटेटिव जेमिसन ग्रीर की नई दिल्ली यात्रा के दौरान दोनों देश किसी अंतरिम ट्रेड एग्रीमेंट को अंतिम रूप देने में नाकाम रहे, क्योंकि भारत बेहतर डील की मांग कर रहा है।

(डिस्क्लेमर: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें।)

लेखकों के बारे में

विकास तिवारी
Vikash Tiwary is a finance journalist with 6+ years of newsroom experience. He is currently growing Upstox Hindi, crafting data-driven stories on stocks, personal finance, mutual funds, and global markets, while exploring how AI can simplify finance. His work spans Zee Business, TV9 Bharatvarsh, ABP News, India TV, and Inshorts. He also holds NISM certification.

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