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  1. 28 फरवरी से लेकर 15 जून तक... US-Iran के बीच हुई बातचीत के अलग-अलग दौर का मार्केट पर कितना हुआ असर, आपकी जेब का क्या होगा?

मार्केट न्यूज़

28 फरवरी से लेकर 15 जून तक... US-Iran के बीच हुई बातचीत के अलग-अलग दौर का मार्केट पर कितना हुआ असर, आपकी जेब का क्या होगा?

विकास तिवारी

4 min read | अपडेटेड June 15, 2026, 12:46 IST

सारांश

अमेरिका और ईरान के बीच ऐतिहासिक शांति समझौता हो गया है। इसके तहत हॉर्मुज जलडमरू को पूरी तरह खोल दिया गया है और अमेरिकी नौसेना की नाकेबंदी हटा दी गई है। इससे कच्चे तेल की कीमतों में भारी गिरावट आने की उम्मीद है, जिसका सीधा फायदा भारतीय शेयर बाजार और अर्थव्यवस्था को मिलेगा।

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अमेरिका और ईरान के बीच शांति समझौता होने से कच्चे तेल की सप्लाई सामान्य होने की उम्मीद बढ़ गई है। (Image: shutterstock)

वैश्विक राजनीति और आर्थिक मोर्चे पर साल 2026 की सबसे बड़ी खबर सामने आ रही है। अमेरिका और ईरान के बीच स्थायी शांति समझौता पूरी तरह से पक्का हो गया है। इस ऐतिहासिक डील की पुष्टि 14 जून को की गई। इसके तुरंत बाद अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भी अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर इसका एलान करते हुए कहा कि ईरान के साथ डील पूरी हो चुकी है। ट्रंप ने हॉर्मुज जलडमरू को बिना किसी टैक्स के तुरंत खोलने और अमेरिकी नौसेना की नाकेबंदी हटाने का आदेश जारी कर दिया है। इस समझौते पर आधिकारिक तौर पर साइन करने की सेरेमनी 19 जून को स्विट्जरलैंड में होने वाली है। इस खबर के आते ही दुनिया भर के बाजारों में उत्साह है और आज भारतीय शेयर बाजार में भी इसका असर देखा जा रहा है, निफ्टी और सेंसेक्स एक फीसदी से ज्यादा की तेजी के साथ ट्रेड कर रहे हैं।

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भारतीय निवेशकों और अर्थव्यवस्था के लिए इसके मायने?

भारतीय निवेशकों के लिए यह घटना बहुत ज्यादा मायने रखती है, क्योंकि भारत अपनी जरूरत का लगभग 85 से 88 पर्सेंट कच्चा तेल बाहर से इम्पोर्ट करता है। हॉर्मुज जलडमरू भारत की तेल सप्लाई का मुख्य रास्ता है। इस रास्ते के पूरी तरह खुलने और नौसेना की नाकेबंदी हटने से कच्चे तेल की सप्लाई सामान्य हो जाएगी। बाजार के जानकारों का मानना है कि इससे ब्रेंट क्रूड के दाम 90 डॉलर प्रति बैरल से गिरकर 75 से 80 डॉलर के दायरे में आ सकते हैं। तेल के दाम गिरने से भारत की एविएशन कंपनियों, तेल मार्केटिंग कंपनियों, टायर बनाने वाली कंपनियों, केंजीमकर और केमिकल कंपनियों के साथ-साथ बैंकों और इंफ्रास्ट्रक्चर फर्मों को बहुत बड़ा फायदा मिलेगा। हालांकि कच्चा तेल निकालने वाली कंपनियों जैसे ओएनजीसी और ऑयल इंडिया को इससे नुकसान हो सकता है क्योंकि उनके तेल बेचने की कीमतें कम हो जाएंगी।

युद्ध की शुरुआत से शांति समझौते तक का पूरा सफर

इस शांति समझौते तक पहुंचने का रास्ता काफी उतार-चढ़ाव भरा रहा है। इस साल 28 फरवरी को जब अमेरिका और इजराइल ने ईरान पर हमले किए थे, तो युद्ध की शुरुआत के साथ ही ब्रेंट क्रूड 100 डॉलर के पार चला गया था और भारतीय शेयर बाजार का इंडेक्स निफ्टी 4 से 5 पर्सेंट तक टूट गया था। इसके बाद 7 अप्रैल 2026 दो हफ्ते का सीजफायर हुआ, जिससे तेल के दामों में 8 से 10 पर्सेंट की कमी आई। अप्रैल और मई के महीने में यह सीजफायर काफी कमजोर रहा और दोनों तरफ से हमले जारी रहे, जिससे भारत में महंगाई बढ़ गई। लेकिन 12 जून 2026 को डोनाल्ड ट्रंप ने समझौते के संकेत दिए और ब्रेंट क्रूड 90 डॉलर से नीचे आ गया। अब 14 जून को स्थायी शांति की घोषणा के बाद ग्लोबल मार्केट में तेल के फ्यूचर दाम 3 से 5 पर्सेंट तक गिर चुके हैं।

इस समझौते के तहत सभी मोर्चों पर सैन्य कार्रवाइयों को तुरंत और हमेशा के लिए रोक दिया गया है, जिससे तेल की कीमतों में युद्ध के कारण बढ़ा हुआ जोखिम पूरी तरह खत्म हो जाएगा। इस पूरी बातचीत में पाकिस्तान, कतर, कऊदी अरब और तुर्की ने मुख्य मध्यस्थ की भूमिका निभाई है। हालांकि इस डील में एक बड़ा पेच यह है कि इजराइल इसका हिस्सा नहीं है और वहां के प्रधानमंत्री नेतन्याहू ने इससे अलग रहने की बात कही है। ऐसे में यह जोखिम बना रहेगा कि इजराइल कोई स्वतंत्र कदम न उठा ले। ईरान के डिप्टी विदेश मंत्री गरीबाबादी ने भी इस समझौते के प्रति अपनी प्रतिबद्धता जताई है। इस डील को संयुक्त राष्ट्र के महासचिव गुटेरेस का भी समर्थन मिला है, जिससे भारत में विदेशी निवेशकों का भरोसा बढ़ेगा। हालांकि इस डील में ईरान के परमाणु कार्यक्रम का मुद्दा अभी नहीं सुलझा है, जो फ्यूचर के लिए एक रिस्क हो सकता है।

आरबीआई द्वारा ब्याज दरों में कटौती का रास्ता साफ

इस शांति समझौते का सबसे बड़ा आर्थिक फायदा यह होगा कि इससे भारतीय रिजर्व बैंक यानी आरबीआई के लिए फाइनेंशियल ईयर 2027 की दूसरी छमाही में ब्याज दरों में कटौती करने का रास्ता बिल्कुल साफ हो गया है। युद्ध की वजह से कच्चे तेल के दाम बढ़ने से भारत की रिटेल महंगाई मार्च के 3.21 पर्सेंट से बढ़कर मई 2026 में 3.93 पर्सेंट पर पहुंच गई थी, जो आरबीआई के 4 पर्सेंट के टारगेट के बेहद करीब थी। ट्रांसपोर्ट से जुड़ी महंगाई भी मई में बढ़कर 4.15 पर्सेंट हो गई थी। अब तेल के दाम कम होने से ट्रांसपोर्ट लागत घटेगी और भारत की महंगाई दर वापस 3.0 से 3.5 पर्सेंट के दायरे में आ जाएगी। इससे आरबीआई को अगस्त या अक्टूबर 2026 की मीटिंग में ब्याज दरों में 25 से 50 बेसिस पॉइंट की कटौती करने का मौका मिलेगा, जिससे बैंकों, एनबीएफसी, रियल एस्टेट और कंज्यूमर स्टॉक्स को सबसे ज्यादा बूस्ट मिलेगा।

लेखकों के बारे में

विकास तिवारी
Vikash Tiwary is a finance journalist with 6+ years of newsroom experience. He is currently growing Upstox Hindi, crafting data-driven stories on stocks, personal finance, mutual funds, and global markets, while exploring how AI can simplify finance. His work spans Zee Business, TV9 Bharatvarsh, ABP News, India TV, and Inshorts. He also holds NISM certification.

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