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  1. Tata Power का शेयर 4% लुढ़का, $490 मिलियन विवाद में सिंगापुर कोर्ट ने खारिज की अपील, क्या है पूरा विवाद?

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Tata Power का शेयर 4% लुढ़का, $490 मिलियन विवाद में सिंगापुर कोर्ट ने खारिज की अपील, क्या है पूरा विवाद?

Upstox

3 min read | अपडेटेड August 27, 2026, 12:24 IST

सारांश

यह मामला साल 2013 का है। उस समय Kleros ने टाटा पावर के सामने रूस में एक कोयला खदान के लिए मिलकर बोली लगाने का प्रस्ताव रखा था। Kleros का अनुमान था कि इस खदान में करीब 1.1 अरब डॉलर मूल्य का कोयला भंडार हो सकता है।

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Tata Power

Kleros का आरोप था कि टाटा पावर ने बातचीत के दौरान साझा की गई गोपनीय जानकारी का गलत इस्तेमाल किया।

Tata Power Company के शेयरों में आज 27 अगस्त को जमकर बिकवाली हो रही है। यह स्टॉक BSE पर 4 फीसदी से ज्यादा की गिरावट के साथ 350.55 रुपये के भाव पर आ गया है। शेयरों में यह गिरावट कंपनी के करीब 490 मिलियन डॉलर के आर्बिट्रेशन अवॉर्ड को चुनौती देने में असफल रहने के बाद आई है। यह मामला रूस में प्रस्तावित कोयला परियोजना से जुड़ा है। इस बीच कंपनी का मार्केट कैप घटकर 1.12 लाख करोड़ रुपये पर आ गया है।

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सिंगापुर की अदालत ने क्या कहा?

टाटा पावर ने Kleros Capital Partners को दिए गए करीब 490 मिलियन डॉलर के हर्जाने को चुनौती दी थी। हालांकि सिंगापुर इंटरनेशनल कमर्शियल कोर्ट ने इस याचिका को खारिज कर दिया। कंपनी ने यह भी दावा किया था कि आर्बिट्रेशन पैनल का फैसला नैचुरल जस्टिस के सिद्धांतों का उल्लंघन करता है। अदालत ने इन दलीलों को भी खारिज कर दिया और आर्बिट्रेशन अवॉर्ड को बरकरार रखा। इसके अलावा अदालत ने टाटा पावर पर कानूनी खर्च भी लगाया है। हालांकि, इसकी अंतिम राशि अभी तय नहीं हुई है।

क्या है पूरा विवाद?

यह मामला साल 2013 का है। उस समय Kleros ने टाटा पावर के सामने रूस में एक कोयला खदान के लिए मिलकर बोली लगाने का प्रस्ताव रखा था। Kleros का अनुमान था कि इस खदान में करीब 1.1 अरब डॉलर मूल्य का कोयला भंडार हो सकता है। सितंबर 2013 में दोनों कंपनियों के बीच एक नॉन-डिस्क्लोजर एग्रीमेंट (NDA) हुआ था। यह समझौता चार साल के लिए था।

हालांकि, 2015 में दोनों कंपनियों के बीच विवाद शुरू हो गया। मुख्य मुद्दे यह थे कि प्रोजेक्ट के लिए बोली कौन लगाएगा और परियोजना में किसकी कितनी हिस्सेदारी होगी। आखिरकार 2016 में दोनों के बीच साझेदारी खत्म हो गई।

टाटा पावर ने बाद में क्या किया?

Kleros ने दिसंबर 2017 में रूस में हुई खदान की सरकारी नीलामी में हिस्सा नहीं लिया और बाद में रूस में अपना कारोबार भी बंद कर दिया। इसके बाद टाटा पावर ने अपनी रूसी सब्सिडियरी के जरिए उस खदान के लिए बोली लगाई। यह बोली तब लगाई गई जब Kleros के साथ हुआ नॉन-डिस्क्लोजर एग्रीमेंट खत्म हो चुका था। टाटा पावर ने खदान का माइनिंग लाइसेंस हासिल कर लिया। हालांकि, बाद में कंपनी ने इस लाइसेंस को सरेंडर कर दिया, क्योंकि उसे लगा कि यह परियोजना आर्थिक रूप से फायदे का सौदा नहीं है।

Kleros के क्या हैं आरोप?

Kleros का आरोप था कि टाटा पावर ने बातचीत के दौरान साझा की गई गोपनीय जानकारी का गलत इस्तेमाल किया। कंपनी ने यह भी आरोप लगाया कि टाटा पावर ने उसे परियोजना से बाहर रखने के लिए गलत तरीके अपनाए। मामला आर्बिट्रेशन में गया और फैसला Kleros के पक्ष में आया। इसके बाद टाटा पावर को करीब 490 मिलियन डॉलर का हर्जाना देने का अवॉर्ड दिया गया। टाटा पावर ने इस फैसले को सिंगापुर की अदालत में चुनौती दी थी। कंपनी ने हर्जाने की रकम और आर्बिट्रेशन की प्रक्रिया, दोनों पर सवाल उठाए थे। सिंगापुर की अदालत ने टाटा पावर की सभी प्रमुख आपत्तियों को खारिज कर दिया है। ऐसे में 490 मिलियन डॉलर का आर्बिट्रेशन अवॉर्ड बरकरार है।

(डिस्क्लेमर: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें।)

लेखकों के बारे में

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Upstox Hindi News Desk पत्रकारों की एक टीम है जो शेयर बाजारों, अर्थव्यवस्था, वस्तुओं, नवीनतम व्यावसायिक रुझानों और व्यक्तिगत वित्त को उत्साहपूर्वक कवर करती है।

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