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3 min read | अपडेटेड April 27, 2026, 11:31 IST
सारांश
सन फार्मास्युटिकल इंडस्ट्रीज ने ओर्गानन एंड कंपनी का अधिग्रहण कर भारतीय फार्मा सेक्टर का सबसे बड़ा सौदा किया है। इस खबर के बाद आज कंपनी के शेयरों में 7 पर्सेंट से ज्यादा की तेजी आई और यह 1,741 रुपये के पार निकल गया। इस डील से सन फार्मा का ग्लोबल मार्केट में रुतबा काफी बढ़ जाएगा।
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सन फार्मा के शेयर आज निवेशकों के लिए मुनाफे का सौदा साबित हुए।
भारतीय दवा सेक्टर में आज एक ऐतिहासिक डील की खबर सामने आई है। देश की सबसे बड़ी दवा कंपनी सन फार्मा ने अमेरिकी कंपनी ओर्गानन एंड कंपनी को खरीदने का ऐलान किया है। यह किसी भी भारतीय फार्मास्युटिकल कंपनी द्वारा किया गया अब तक का सबसे बड़ा अधिग्रहण माना जा रहा है। इस खबर के आते ही सोमवार को बाजार खुलते ही सन फार्मा के शेयरों में जबरदस्त खरीदारी देखने को मिली। नेशनल स्टॉक एक्सचेंज पर कंपनी का शेयर करीब 7.44 पर्सेंट की भारी बढ़त के साथ 1,741 रुपये के स्तर पर पहुंच गया।
सन फार्मा ने बताया है कि ओर्गानन का अधिग्रहण उसके लिए ग्रोथ का एक शानदार मौका है। इस डील के जरिए कंपनी की पहुंच अब 150 से ज्यादा अंतरराष्ट्रीय बाजारों तक हो जाएगी। ओर्गानन का बिजनेस 18 ऐसे देशों में फैला हुआ है जहां से उसे हर साल 100 मिलियन डॉलर से ज्यादा का रेवेन्यू मिलता है। नेक्सप्लानोन और नुवारिंग जैसे बड़े ब्रांड्स अब सन फार्मा के पोर्टफोलियो का हिस्सा होंगे। इस डील के बाद सन फार्मा दुनिया की टॉप 25 फार्मा कंपनियों की लिस्ट में शामिल हो जाएगी। कंपनी का लक्ष्य चार देशों में नंबर एक दवा कंपनी बनने का है। साथ ही विमेंस हेल्थ सेक्टर में दुनिया में तीसरे और बायोसिमिलर्स में सातवें नंबर पर पहुंचने का लक्ष्य रखा गया है।
इस डील का एक सबसे बड़ा फायदा यह है कि सन फार्मा अब बायोसिमिलर्स के क्षेत्र में मजबूती से कदम रखेगी। इसके अलावा चीन जैसे बड़े मार्केट में कंपनी की पकड़ बहुत मजबूत हो जाएगी। ओर्गानन का चीन में सालाना रेवेन्यू करीब 800 मिलियन डॉलर है और वहां उसके 8 बड़े ब्रांड्स पहले से मौजूद हैं। अब तक सन फार्मा की चीन में मौजूदगी बहुत कम थी, लेकिन अब कंपनी वहां एक बड़ी ताकत बनकर उभरेगी। चीन के अलावा यूरोप, दक्षिण कोरिया, मैक्सिको और थाईलैंड जैसे महत्वपूर्ण देशों में भी कंपनी की स्थिति पहले के मुकाबले काफी बेहतर हो जाएगी।
अधिग्रहण के बाद बनने वाली नई कंबाइंड कंपनी का कुल रेवेन्यू करीब 12.4 बिलियन डॉलर होने का अनुमान है। इसमें से 27 पर्सेंट हिस्सा इनोवेटिव मेडिसिन से, 51 पर्सेंट ब्रांडेड जेनेरिक्स से और 15 पर्सेंट साधारण जेनेरिक्स से आएगा। रेवेन्यू का 27 पर्सेंट हिस्सा अमेरिका से और 29 पर्सेंट हिस्सा इमर्जिंग मार्केट्स से मिलने की उम्मीद है। ओर्गानन का पिछला ट्रैक रिकॉर्ड देखें तो उसका EBITDA मार्जिन करीब 30 पर्सेंट रहा है और वह सालाना करीब 1 बिलियन डॉलर का फ्री कैश फ्लो जेनरेट करती है। सन फार्मा का कहना है कि वे इस कैश फ्लो का इस्तेमाल करके अपने कर्ज को जल्द से जल्द कम करने की कोशिश करेंगे।
इतने बड़े सौदे को पूरा करने के लिए सन फार्मा को काफी ज्यादा कर्ज लेना होगा। कंपनी का अनुमान है कि उसका कर्ज कंबाइंड EBITDA का करीब 2.3 गुना होगा। हालांकि कंपनी के पास अभी भी 3.1 बिलियन डॉलर का कैश मौजूद है। मैनेजमेंट ने साफ किया है कि डील पूरी होने के बाद कर्ज कम करना उनकी सबसे बड़ी प्राथमिकता होगी। इसके अलावा पुरानी कंपनियों जैसे रैनबैक्सी और टैरो के सफल इंटीग्रेशन के अनुभव का इस्तेमाल यहां भी किया जाएगा। कंपनी ने इसके लिए एक अलग से डेडिकेटेड ऑफिस बनाने का भी प्लान बनाया है।
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