मार्केट न्यूज़
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4 min read | अपडेटेड April 26, 2026, 15:38 IST
सारांश
शेयर बाजार के लिए आने वाला हफ्ता काफी उतार-चढ़ाव भरा रह सकता है। वेस्ट एशिया में तनाव, कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें और बड़ी कंपनियों के चौथी तिमाही (Q4) के नतीजे बाजार की चाल तय करेंगे। इस बीच शुक्रवार को महाराष्ट्र दिवस की वजह से बाजार बंद रहेगा।

वैश्विक तनाव और घरेलू कंपनियों के नतीजों के बीच शेयर बाजार में इस हफ्ते भारी हलचल देखने को मिल सकती है।
शेयर बाजार के लिए आने वाला हफ्ता काफी चुनौतियों भरा रहने वाला है। जानकारों का कहना है कि वेस्ट एशिया में चल रहे तनाव, खासकर स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में होने वाले बदलाव, कंपनियों के चौथी तिमाही यानी Q4 के नतीजे और कच्चे तेल की कीमतें बाजार के सेंटिमेंट को तय करेंगी। ध्यान देने वाली बात यह भी है कि आने वाला हफ्ता छुट्टियों की वजह से छोटा होगा। महाराष्ट्र दिवस के मौके पर शुक्रवार को शेयर बाजार बंद रहेंगे, इसलिए निवेशकों के पास ट्रेडिंग के लिए केवल चार दिन ही होंगे।
बाजार के जानकारों का मानना है कि आने वाले दिनों में मार्केट पूरी तरह से खबरों और उतार-चढ़ाव पर टिका रहेगा। सबसे ज्यादा ध्यान अमेरिका और ईरान के बीच चल रही बातचीत और कच्चे तेल की कीमतों पर होगा। एनरिच मनी के सीईओ पोनमुडी आर का कहना है कि अगर कच्चे तेल की कीमतों में स्थिरता आती है या गिरावट होती है, तो इससे मार्केट को थोड़ा सहारा मिल सकता है। लेकिन अगर स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में तनाव बढ़ता है या वहां आवाजाही में कोई रुकावट आती है, तो बाजार में फिर से बिकवाली और गिरावट देखने को मिल सकती है। फिलहाल स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में चल रहे गतिरोध की वजह से कच्चा तेल महंगा बना हुआ है, जिससे पूरी दुनिया में इन्फ्लेशन यानी महंगाई की चिंता बढ़ गई है।
लिवलॉन्ग वेल्थ के रिसर्च एनालिस्ट हरिप्रसाद के का कहना है कि वेस्ट एशिया में बढ़ता तनाव और अमेरिका-ईरान बातचीत का टूटना ग्लोबल मार्केट के लिए एक बड़ा रिस्क बन गया है। इसकी वजह से कच्चे तेल की कीमतों में अनिश्चितता बढ़ गई है और ब्रेंट क्रूड 107 डॉलर प्रति बैरल के आसपास घूम रहा है। भारत के लिए कच्चा तेल सबसे बड़ा आर्थिक फैक्टर है क्योंकि तेल महंगा होने से न केवल महंगाई और रुपया दबाव में आता है, बल्कि अलग-अलग सेक्टर की कंपनियों के प्रॉफिट पर भी बुरा असर पड़ता है। जब तेल की कीमतें बढ़ती हैं, तो कंपनियों का खर्च बढ़ जाता है और उनका नेट प्रॉफिट कम होने लगता है।
इस हफ्ते बड़ी कंपनियों के Q4 के नतीजे भी आने वाले हैं, जो मार्केट की दिशा तय करने में बड़ा रोल निभाएंगे। दिग्गज कंपनी रिलायंस इंडस्ट्रीज लिमिटेड ने शुक्रवार को अपने नतीजे जारी किए थे, जिसमें कंपनी के नेट प्रॉफिट में 12.5 पर्सेंट की गिरावट दर्ज की गई है। ग्लोबल एनर्जी संकट की वजह से कंपनी के तेल और केमिकल बिजनेस पर बुरा असर पड़ा है, हालांकि इसके टेलीकॉम और रिटेल बिजनेस ने इस घाटे की थोड़ी भरपाई की है। आने वाले हफ्ते में 27 अप्रैल को अल्ट्राटेक सीमेंट, कोल इंडिया और वरुण बेवरेजेस के नतीजे आएंगे। 28 अप्रैल को मारुति सुजुकी और 29 अप्रैल को बजाज फाइनेंस और अडानी पावर अपने आंकड़े पेश करेंगे। वहीं गुरुवार को हिंदुस्तान यूनिलीवर, अडानी पोर्ट्स, अडानी एंटरप्राइजेज और बजाज फिनसर्व जैसी बड़ी कंपनियों के नतीजों पर सबकी नजर रहेगी।
कॉर्पोरेट नतीजों के अलावा निवेशकों की नजर अमेरिका के फेडरल रिजर्व के ब्याज दरों पर आने वाले फैसले पर भी होगी। स्वास्तिका इन्वेस्टमार्ट के रिसर्च हेड संतोष मीना का कहना है कि 29 अप्रैल को आने वाला यूएस फेड का फैसला बाजार का मूड सेट करेगा। इसके साथ ही अमेरिका के पहली तिमाही के जीडीपी आंकड़े भी काफी अहम होंगे। भारत के नजरिए से देखें तो 28 अप्रैल को मार्च 2026 के इंडस्ट्रियल प्रोडक्शन यानी आईआईपी के आंकड़े आएंगे और 1 मई को विदेशी मुद्रा भंडार के आंकड़े जारी किए जाएंगे। पिछले हफ्ते बाजार का प्रदर्शन काफी निराशाजनक रहा था, जहां सेंसेक्स 1,829 अंक यानी 2.33 पर्सेंट गिर गया था, वहीं निफ्टी में 455 अंकों की गिरावट आई थी। ऐसे में इस हफ्ते निवेशकों को बहुत संभलकर कदम उठाने की जरूरत है।
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