मार्केट न्यूज़

3 min read | अपडेटेड April 24, 2026, 14:21 IST
सारांश
आईटी सेक्टर के लिए शुक्रवार का दिन काफी मुश्किल भरा साबित हुआ। इंफोसिस के निराशाजनक नतीजों और भविष्य की कमजोर गाइडेंस की वजह से आईटी शेयरों में भारी बिकवाली देखी गई। निफ्टी आईटी इंडेक्स 4 पर्सेंट से ज्यादा गिर गया।

शेयर बाजार में आईटी इंडेक्स की भारी गिरावट से सहमे निवेशक।
24 अप्रैल को भारतीय शेयर बाजार में आईटी कंपनियों के शेयरों में जोरदार गिरावट देखने को मिली। दिग्गज आईटी कंपनी इंफोसिस द्वारा गुरुवार को पेश किए गए कमजोर नतीजों ने पूरे सेक्टर का माहौल बिगाड़ दिया है। पहले से ही एचसीएल टेक, विप्रो और टीसीएस जैसे बड़े नामों के सुस्त प्रदर्शन से बाजार का सेंटिमेंट खराब था, लेकिन इंफोसिस की सतर्क गाइडेंस ने आग में घी डालने का काम किया। शुक्रवार को निफ्टी आईटी इंडेक्स 1,252.2 पॉइंट यानी 4.15 पर्सेंट तक टूटकर 28,872.10 के निचले स्तर पर आ गया। इंडेक्स की दस में से नौ कंपनियां लाल निशान में कारोबार कर रही थीं, जिससे निवेशकों में घबराहट साफ देखी गई।
आईटी सेक्टर की इस गिरावट में सबसे बड़ा हाथ कंपनियों द्वारा भविष्य के लिए दी गई कमजोर गाइडेंस का है। इंफोसिस ने वित्त वर्ष 2027 के लिए रेवेन्यू ग्रोथ का अनुमान मात्र 1.5 पर्सेंट से 3.5 पर्सेंट के बीच रखा है। इसी तरह, एचसीएल टेक ने भी 1 पर्सेंट से 4 पर्सेंट की मामूली ग्रोथ की बात कही है। विप्रो की स्थिति भी कुछ खास नहीं है और उसने आने वाले समय में रेवेन्यू में गिरावट की आशंका जताई है। जब बड़ी कंपनियां अपनी ग्रोथ को लेकर इस तरह का सतर्क रुख अपनाती हैं, तो इसका सीधा असर निवेशकों के भरोसे पर पड़ता है।
ग्लोबल मार्केट, खास तौर पर अमेरिका और यूरोप में आर्थिक अनिश्चितता की वजह से आईटी कंपनियों को नए काम मिलने में देरी हो रही है। कई बड़ी कंपनियां अब अपने पुराने प्रोजेक्ट्स को पूरा करने और खर्चों में कटौती यानी कोस्ट ऑप्टिमाइजेशन पर ज्यादा ध्यान दे रही हैं। कंसल्टिंग और डिजिटल ट्रांसफॉर्मेशन जैसे क्षेत्रों में क्लाइंट्स अब ज्यादा पैसा खर्च नहीं करना चाहते। कंपनियों का कहना है कि उनके पास डील्स की पाइपलाइन तो अच्छी है, लेकिन उन्हें काम में बदलने और पूरा करने में उम्मीद से ज्यादा समय लग रहा है। अमेरिका के कुछ खास क्लाइंट्स के मुद्दों और प्रोजेक्ट्स में हो रही देरी की वजह से रेवेन्यू पर बुरा असर पड़ रहा है।
भले ही मौजूदा समय में आईटी सेक्टर चुनौतियों का सामना कर रहा है, लेकिन लगभग सभी कंपनियों ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी एआई को भविष्य की सबसे बड़ी उम्मीद बताया है। कंपनियां एआई क्षमताओं को बढ़ाने, नई पार्टनरशिप करने और एआई आधारित समाधानों पर भारी निवेश कर रही हैं। यह माना जा रहा है कि आने वाले समय में एआई ही ग्रोथ का मुख्य इंजन बनेगा। हालांकि, अभी यह तकनीक शुरुआती दौर में है और इसके जरिए रेवेन्यू में बड़ी बढ़त आने में थोड़ा वक्त लग सकता है। कंपनियां अब अपने कर्मचारियों को भी एआई के लिए तैयार करने पर जोर दे रही हैं ताकि भविष्य की जरूरतों को पूरा किया जा सके।
आईटी इंडस्ट्री की संस्था नैसकॉम ने भी इस स्थिति पर अपनी प्रतिक्रिया दी है। नैसकॉम के नए अध्यक्ष श्रीकांत वेलामाकन्नी ने कहा है कि उनका मुख्य फोकस आईटी कंपनियों की रेवेन्यू ग्रोथ को फिर से पटरी पर लाना और एआई की भूमिका को बढ़ावा देना होगा। वेलामाकन्नी का मानना है कि भारत को AI के दौर में और ज्यादा आक्रामक तरीके से मुकाबला करने की जरूरत है। इसके लिए शिक्षा व्यवस्था में एआई आधारित बदलाव और सरकारी नीतियों के सपोर्ट की बात कही गई है।
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