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4 min read | अपडेटेड September 23, 2026, 15:52 IST
सारांश
भारत का सोलर सेक्टर तेजी से आगे बढ़ रहा है। 2014 में जहां सोलर कैपेसिटी 3 जीडब्ल्यू थी, वहीं जून 2026 तक यह बढ़कर 162.15 जीडब्ल्यू हो चुकी है। इस सेक्टर के शेयर्स ने निवेशकों को 970% से ज्यादा का रिटर्न दिया है।
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भारत की सोलर कैपेसिटी 162 जीडब्ल्यू के पार पहुंचने के साथ ही इस सेक्टर के शेयर्स में निवेशकों की दिलचस्पी बढ़ी है।
भारत में क्लीन एनर्जी की मांग लगातार बढ़ रही है और इसमें सबसे बड़ा योगदान सोलर एनर्जी का है। पिछले एक दशक में भारत का सोलर सेक्टर काफी तेजी से विकसित हुआ है। इस सेक्टर की ग्रोथ का सीधा असर शेयर बाजार में लिस्टेड कंपनियों के परफॉर्मेंस पर भी देखने को मिल रहा है। सोलर सेक्टर से जुड़ी कई कंपनियों के शेयर्स ने पिछले 5 सालों में निवेशकों को मल्टीबैगर रिटर्न देकर मालामाल किया है। सरकारी योजनाओं के सपोर्ट और कंपनियों के बड़े एक्सपेंशन प्लान के चलते इस सेक्टर में आगे भी बड़ी ग्रोथ की उम्मीद जताई जा रही है।
शेयर बाजार में सोलर और रिन्यूएबल एनर्जी सेक्टर से जुड़े स्टॉक्स निवेशकों की पहली पसंद बने हुए हैं। 23 सितंबर 2026 तक के आंकड़ों के मुताबिक, सोलर इंडस्ट्रीज इंडिया ने पिछले 5 सालों में निवेशकों को 907.41% का शानदार रिटर्न दिया है। वहीं अडानी पावर ने इस दौरान 979.04% का बंपर रिटर्न देकर निवेशकों की संपत्ति में भारी इजाफा किया है। इसके अलावा अडानी ग्रीन एनर्जी ने 14.23%, सीमेंस एनर्जी इंडिया ने 18.35% और वॉरी एनर्जीज ने 6.46% का रिटर्न दिया है। कंपनियों के मजबूत ऑपरेशनल परफॉर्मेंस और बढ़ते रेवेन्यू की वजह से निवेशकों का भरोसा इस सेक्टर पर मजबूत बना हुआ है।
पीआईबी द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार, भारत की सोलर कैपेसिटी में अभूतपूर्व बढ़ोतरी दर्ज की गई है। साल 2014 में जहां देश की कुल सोलर कैपेसिटी महज 3 जीडब्ल्यू के आसपास थी, वहीं 30 जून 2026 तक यह बढ़कर 162.15 जीडब्ल्यू के पार पहुंच गई है। यानी पिछले 12 सालों में इसमें 50 गुना का विस्तार हुआ है। भारत में सोलर मॉड्यूल मैन्युफैक्चरिंग कैपेसिटी भी 2014 के 2.3 जीडब्ल्यू से बढ़कर मार्च 2026 तक 172 जीडब्ल्यू हो चुकी है। सरकार की पीएम सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना के तहत जून 2026 तक 43 लाख से ज्यादा घरों में सोलर पैनल लगाए जा चुके हैं। इसके अलावा 5,000 मेगावॉट की फ्लोटिंग सोलर कैपेसिटी विकसित करने के लिए पीएम सूर्य सरोवर योजना को भी मंजूरी दी गई है।
सोलर सेक्टर की इस तेज ग्रोथ के बीच एमवी सोलर के सीईओ सुहास दोन्थी ने कंपनी के फ्यूचर प्लान को लेकर कई अहम जानकारियां दी हैं। उन्होंने बताया कि कंपनी का 34 सालों का इतिहास रहा है और हर साल कंपनी प्रॉफिट में रही है। कंपनी अपनी वैल्यू चेन को मजबूत करने के लिए 5,500 करोड़ रुपये का कैपिटल एलोकेशन कर रही है। एमवी सोलर भारत की पहली ऐसी कंपनी है जिसने 2 साल पहले लेटेस्ट टॉपकॉन (TOPCon) सेल मैन्युफैक्चरिंग की शुरुआत की थी। वर्तमान में कंपनी के पास 10 जीडब्ल्यू मॉड्यूल और 3 जीडब्ल्यू सेल की प्रोडक्शन कैपेसिटी है, जिसे आगे बढ़ाकर 16 जीडब्ल्यू मॉड्यूल और 9 जीडब्ल्यू सेल करने का टारगेट है। बता दें कंपनी के शेयर ने पिछले एक साल में 50% से ज्यादा का रिटर्न दिया है।
ग्लोबल सप्लाई चेन में चांदी यानी सिल्वर के बढ़ते दामों को लेकर सुहास दोन्थी ने बताया कि कंपनी ने टेक्नोलॉजी इनोवेशन के जरिए अपनी निर्भरता काफी कम की है। पहले जहां प्रति सेल 220 मिलीग्राम सिल्वर का इस्तेमाल होता था, वहीं अब इसे घटाकर 80 मिलीग्राम से भी कम कर दिया गया है। कंपनी आगे इसे 40% और कम करने पर काम कर रही है। इसके साथ ही जर्मन रिसर्च इंस्टीट्यूट फ्रॉनहोफर आईएसई (Fraunhofer ISE) के साथ मिलकर अपनी सेल एफिशिएंसी को 24.35% से बढ़ाकर 25.6% तक पहुंचा दिया है। जनवरी से लागू होने वाले एएलएमएम (ALMM) नियमों के लिए भी कंपनी पूरी तरह तैयार है, जिससे आने वाले समय में डोमेस्टिक मैन्युफैक्चरिंग को और ज्यादा मजबूती मिलेगी।
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