मार्केट न्यूज़
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4 min read | अपडेटेड September 21, 2026, 07:26 IST
सारांश
इस हफ्ते में शेयर बाजार की चाल तय करने के लिए कई अंतरराष्ट्रीय कारण सामने खड़े हैं। अमेरिका की तरफ से रूसी तेल इंपोर्ट करने वाले देशों पर 100% टैरिफ लगाने की तैयारी है, जिसका असर भारत पर पड़ सकता है।

आने वाले हफ्ते में कच्चे तेल के दाम और वैश्विक तनाव की वजह से शेयर बाजार में प्रेशर रहने की आशंका है।
पिछले हफ्ते के आखिरी कारोबारी दिन भारतीय शेयर बाजार भले ही हरे निशान पर बंद हुआ हो, लेकिन इस हफ्ते में बाजार पर प्रेशर देखने को मिल सकता है। इसके पीछे कई बड़े अंतरराष्ट्रीय कारण हैं। सबसे बड़ा कारण अमेरिका की ओर से रूसी तेल पर लगाए गए प्रतिबंध और नया कानून है, जिसका सीधा असर भारत पर देखने को मिल सकता है। भारत रूस से भारी मात्रा में कच्चा तेल खरीदता है। नए अमेरिकी कानून के तहत रूसी तेल इंपोर्ट करने वाले देशों पर 100% तक टैरिफ लगाने का प्रावधान है। वहीं दूसरी ओर अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें लगातार 100 डॉलर प्रति बैरल के पार बनी हुई हैं। जियो पॉलिटिकल तनाव में भी किसी तरह की कमी नहीं दिख रही है। साथ ही विदेशी निवेशकों यानी FII की लगातार मुनाफावसूली भी शेयर बाजार को तंग कर सकती है।
शेयर बाजार में आने वाले दिनों में अनिश्चितता का माहौल बना रह सकता है। शुक्रवार को भले ही लगातार तीसरे सेशन में तेल की कीमतों में गिरावट आई हो, लेकिन आउटलुक अभी भी साफ नहीं है क्योंकि क्रूड ऑयल की कीमत 100 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर बनी हुई है। जेपी मॉर्गन ने गुरुवार को कहा कि फरवरी में ईरान के खिलाफ अमेरिकी और इजराइली संघर्ष शुरू होने के बाद पहली बार उनके पास तेल बाजार के लिए कोई स्पष्ट बेसलाइन व्यू नहीं है। सऊदी अरब के रेड सी एक्सपोर्ट हब यानबू पर क्रूड लोडिंग रोके जाने के बाद इस हफ्ते की शुरुआत में तेल की कीमतें लगभग चार महीने के उच्चतम स्तर पर पहुंच गई थीं। ईस्ट-वेस्ट पाइपलाइन के क्षतिग्रस्त होने के बाद रियाद ने यूरोप को होने वाली कुछ डिलीवरी भी रद्द कर दी थीं।
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने शुक्रवार 18 सितंबर को रूस पर प्रतिबंध लगाने वाले एक बड़े पैकेज को कानून का रूप दे दिया है। इस कानून का नाम लिंडसे ओ ग्राहम सैंक्शनिंग रशिया एंड ईरान एक्ट ऑफ 2026 है। यह कानून अमेरिकी राष्ट्रपति को रूसी तेल या नेचुरल गैस के पांच सबसे बड़े खरीदारों पर 100% तक टैरिफ लगाने का अधिकार देता है। इससे भारत और चीन जैसे बड़े खरीदार प्रभावित हो सकते हैं। यह कानून रूसी अधिकारियों, बैंकों, ऊर्जा और रक्षा क्षेत्रों के साथ-साथ उनके गुप्त बेड़े के टैंकरों को निशाना बनाता है। अगर भारत और चीन जैसे बड़े खरीदार तय शर्तों को पूरा करते हैं तो उन पर ज्यादा अमेरिकी टैरिफ लग सकता है।
तेल की सप्लाई में और रुकावट आने की संभावना ने कीमतों में बढ़ोतरी का जोखिम काफी बढ़ा दिया है। गोल्डमैन सैक्स के अनुसार हालिया हमलों से पता चला है कि शिपिंग में रुकावटें और गंभीर हो सकती हैं। गोल्डमैन सैक्स का अनुमान है कि अगर मिडिल ईस्ट में जहाजों पर हमले तेज होते हैं तो तेल की कीमतें 120 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच सकती हैं। हालांकि अगर एक्सपोर्ट सामान्य हो जाता है तो कीमतें वापस 80 डॉलर प्रति बैरल के आसपास आ सकती हैं। इसके अलावा होर्मुज स्ट्रेट भी काफी हद तक कटा रहा। शुरुआती शिपिंग डेटा के अनुसार वहां से गुरुवार को सिर्फ चार कमोडिटी जहाज गुजरे जो आम दिनों के औसत से बहुत कम हैं।
भारतीय शेयर बाजार में विदेशी संस्थागत निवेशकों यानी FII ने लगातार पांचवें हफ्ते मुनाफावसूली की है और उन्होंने बाजार से 7,620 करोड़ रुपये निकाले हैं। वहीं घरेलू निवेशकों यानी DII ने 11,232 करोड़ रुपये की शुद्ध खरीदारी करके बाजार को निचले स्तरों से उबरने में मदद की है। महीने की शुरुआत से अब तक FII ने 7,041 करोड़ रुपये की शुद्ध बिकवाली की है, जबकि DII ने 36,219 करोड़ रुपये की शुद्ध खरीदारी की है। निफ्टी अगस्त के अंत के क्लोजिंग स्तर 24,080.40 से घटकर अब 23,346.40 पर आ गया है। FII की बिकवाली के बीच DII की खरीदारी से बाजार को थोड़ा सहारा मिला है, लेकिन आने वाले हफ्ते में अंतरराष्ट्रीय दबाव हावी रह सकता है।
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