मार्केट न्यूज़
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4 min read | अपडेटेड August 02, 2026, 18:35 IST
सारांश
विदेशी निवेशकों की खरीदारी और कंपनियों के बेहतर नतीजों से सेंसेक्स और निफ्टी में अच्छी बढ़त देखी गई। अब आने वाले हफ्ते में रिजर्व बैंक का ब्याज दरों पर फैसला, कई बड़ी कंपनियों के Q1 FY27 नतीजे और ग्लोबल मार्केट के संकेत बाजार की दिशा तय करेंगे।

इस बाजार में हलचल देखी जा सकती है।
भारतीय शेयर बाजार में पिछला हफ्ता निवेशकों के लिए काफी अच्छा साबित हुआ है। कच्चे तेल की कीमतों में आई नरमी, विदेशी संस्थागत निवेशकों की ओर से जारी खरीदारी, कंपनियों के बेहतर तिमाही नतीजों और वैश्विक मोर्चे पर तनाव घटने से बाजार का माहौल सकारात्मक बना रहा। सप्ताह के अंतिम कारोबारी दिन सेंसेक्स 78,094.64 के स्तर पर बंद हुआ, जबकि निफ्टी 24,383.60 पर बंद हुआ। जुलाई के महीने में दोनों प्रमुख इंडेक्स ने लगातार दूसरे महीने बढ़त दर्ज की है। हालांकि, अब आने वाला नया हफ्ता भारतीय बाजार के लिए बेहद निर्णायक साबित हो सकता है। नए हफ्ते में रिजर्व बैंक की मौद्रिक नीति बैठक, कंपनियों के नतीजे और ग्लोबल संकेत मिलकर बाजार की चाल तय करेंगे।
भारतीय रिजर्व बैंक की मौद्रिक नीति समिति की तीन दिवसीय बैठक 3 अगस्त से शुरू होकर 5 अगस्त तक चलेगी। इसके बाद 5 अगस्त को आरबीआई गवर्नर नीतिगत ब्याज दरों और मौद्रिक नीति का ऐलान करेंगे। बाजार विशेषज्ञों और निवेशकों को उम्मीद है कि रिजर्व बैंक इस बार रेपो रेट में कोई बदलाव नहीं करेगा और इसे स्थिर रखेगा। हालांकि, निवेशकों की मुख्य नजर इस बात पर रहेगी कि रिजर्व बैंक का रुख आगे चलकर ब्याज दरों और बाजार में लिक्विडिटी को लेकर कैसा रहता है।
आने वाले हफ्ते में कई बड़ी और दिग्गज कंपनियां वित्त वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही (Q1 FY27) के अपने वित्तीय आंकड़े जारी करने वाली हैं। इनमें भारतीय स्टेट बैंक, एलआईसी, भारती एयरटेल, ओएनजीसी, नायका, इरेडा और दिल्लीवरी जैसी प्रमुख कंपनियां शामिल हैं। बाजार के जानकारों का मानना है कि निवेशक केवल नेट प्रॉफिट के आंकड़ों पर ही ध्यान नहीं देंगे, बल्कि कंपनियों की फ्यूचर रणनीति, मांग का माहौल, ऑपरेटिंग मार्जिन और निवेश योजनाओं पर भी पैनी नजर रखेंगे।
वैश्विक मोर्चे पर मध्य पूर्व से सकारात्मक संकेत मिल रहे हैं। अमेरिका और ईरान के बीच लंबे समय से चला आ रहा तनाव कम होने की उम्मीद जगी है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने बयान दिया है कि दोनों देशों के बीच एक डील की रूपरेखा पर सहमति बन गई है, जिसके चलते अमेरिका और इजराइल ने हमला टाल दिया है। यदि यह संघर्ष पूरी तरह से शांत होता है तो इससे वैश्विक बाजारों का सेंटिमेंट मजबूत होगा और कच्चे तेल की सप्लाई भी सुचारू रूप से फिर शुरू हो सकेगी।
जुलाई के महीने में वैश्विक तनावों के कारण ब्रेंट क्रूड में लगभग 24% और WTI क्रूड में करीब 21% का बड़ा उछाल देखा गया था। यदि कच्चे तेल के दाम में आगे भी बढ़ोतरी जारी रहती है तो इससे भारत में महंगाई बढ़ने का खतरा पैदा हो सकता है। हालांकि, अमेरिका और ईरान के बीच समझौता होने की स्थिति में कच्चे तेल के दामों में नरमी देखने को मिल सकती है। इसके अलावा होर्मुज स्ट्रेट के रास्ते तेल की सप्लाई बढ़ने के संकेत मिले हैं, जो वैश्विक तेल बाजार के लिए बहुत राहत की खबर है।
विदेशी संस्थागत निवेशकों यानी FII की तरफ से भारतीय बाजार में भरोसा लौटता दिख रहा है। पिछले हफ्ते FII ने लगातार चौथे कारोबारी दिन खरीदारी की। 31 जुलाई को FII ने 277 करोड़ रुपये की शुद्ध खरीदारी की, जबकि घरेलू संस्थागत निवेशकों यानी DII ने 2,260 करोड़ रुपये का बड़ा निवेश किया। पिछले कुछ महीनों के मुकाबले विदेशी निवेशकों की बिकवाली में काफी कमी आई है। यदि FII की यह खरीदारी आगे भी जारी रहती है तो भारतीय शेयर बाजार को एक नई मजबूती मिलेगी।
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