मार्केट न्यूज़
.png)
4 min read | अपडेटेड May 10, 2026, 13:26 IST
सारांश
बीते हफ्ते भारतीय शेयर बाजार में उतार-चढ़ाव के बीच निफ्टी 0.7 पर्सेंट की बढ़त के साथ बंद हुआ। आने वाले हफ्ते में 480 से ज्यादा कंपनियों के तिमाही नतीजे, ईरान-अमेरिका के बीच बढ़ता तनाव और विदेशी निवेशकों की बिकवाली जैसे बड़े फैक्टर्स बाजार की दिशा तय करेंगे। सोमवार को निफ्टी के लिए 24,200 का लेवल बहुत अहम होगा।

सोमवार को बाजार खुलने पर निवेशकों की नजरें ग्लोबल संकेतों और कंपनियों के नतीजों पर टिकी रहेंगी। | Image: Shutterstock
भारतीय शेयर बाजार के लिए पिछला हफ्ता मिला-जुला रहा। हालांकि शुक्रवार को बाजार में गिरावट देखी गई, लेकिन पूरे हफ्ते के दौरान निफ्टी 0.7 पर्सेंट की बढ़त बनाने में सफल रहा। इसमें सबसे ज्यादा योगदान ऑटो सेक्टर के शेयरों का रहा। अब सोमवार को जब बाजार दोबारा खुलेगा, तो निवेशकों की नजर कई घरेलू और अंतरराष्ट्रीय खबरों पर रहेगी। शुक्रवार को निफ्टी 150.50 पॉइंट गिरकर 24,176.15 के स्तर पर बंद हुआ था। एक्सपर्ट्स का मानना है कि बाजार का मूड फिलहाल थोड़ा कमजोर लग रहा है क्योंकि इंडेक्स कुछ जरूरी लेवल से नीचे चला गया है। अगर सोमवार को निफ्टी 24,200 के नीचे बना रहता है, तो इसमें और गिरावट देखी जा सकती है।
आने वाले हफ्ते में बाजार की चाल तय करने में कंपनियों के नतीजे सबसे बड़ी भूमिका निभाएंगे। बीएसई में लिस्टेड 480 से ज्यादा कंपनियां अगले छह दिनों में अपनी जनवरी-मार्च तिमाही के नतीजे घोषित करने वाली हैं। इनमें टाटा मोटर्स, भारती एयरटेल, डॉ. रेड्डीज, सिपला और टाटा स्टील जैसी दिग्गज कंपनियां शामिल हैं। इसके अलावा निफ्टी से बाहर की कंपनियों जैसे केनरा बैंक और इंडियन होटल्स के प्रदर्शन पर भी निवेशकों की नजर रहेगी। इन कंपनियों का नेट प्रॉफिट और ऑपरेशन से रेवेन्यू बाजार के सेंटीमेंट को प्रभावित करेगा। बेहतर नतीजों से बाजार को सहारा मिल सकता है।
अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चल रहा तनाव भारतीय बाजार के लिए चिंता का विषय बना हुआ है। ईरान और अमेरिका के बीच दुश्मनी कम होने का नाम नहीं ले रही है। खाड़ी क्षेत्र में लगातार हो रहे हमलों ने अस्थिरता बढ़ा दी है। होर्मुज स्ट्रेट के पास हुई झड़पें ग्लोबल ट्रेड और तेल की सप्लाई के लिए बड़ा खतरा पैदा कर रही हैं। अमेरिका फिलहाल ईरान के जवाब का इंतजार कर रहा है ताकि किसी शांति समझौते पर बात बन सके। अगर इस क्षेत्र में तनाव और बढ़ता है, तो सोमवार को भारतीय शेयर बाजार में भी इसका नकारात्मक असर देखने को मिल सकता है।
भारतीय बाजार के लिए अच्छी बात यह है कि शुक्रवार को अमेरिकी बाजार यानी वॉल स्ट्रीट बढ़त के साथ बंद हुआ। चिप बनाने वाली कंपनियों की मजबूती की वजह से नैस्डैक में 1.71 पर्सेंट की शानदार तेजी रही। अमेरिकी बाजार की यह तेजी सोमवार को भारतीय मार्केट के लिए पॉजिटिव संकेत दे सकती है। वहीं, कच्चे तेल की कीमतें भी बाजार की दिशा के लिए महत्वपूर्ण होंगी। ब्रेंट क्रूड फिलहाल 101.29 डॉलर के पास बना हुआ है। कच्चे तेल की कीमतों में होने वाला कोई भी बड़ा उतार-चढ़ाव सीधे तौर पर भारतीय इकोनॉमी और बाजार के मूड को प्रभावित करता है।
विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों यानी एफआईआई की ओर से की जा रही भारी बिकवाली बाजार के लिए बड़ी समस्या बनी हुई है। इस हफ्ते एफआईआई ने कुल 11,072 करोड़ रुपए के शेयर बाजार से निकाल लिए हैं। साल 2026 में अब तक उनका कुल आउटफ्लो 2.06 लाख करोड़ रुपए के पार जा चुका है। दूसरी ओर, भारतीय रुपया डॉलर के मुकाबले थोड़ा मजबूत होकर 94.40 पर बंद हुआ है। रुपए की चाल और विदेशी निवेशकों का रुख सोमवार को बाजार की ओपनिंग के लिए काफी अहम होगा।
अगले हफ्ते कई कंपनियों के शेयरों में कॉर्पोरेट एक्शन की वजह से मूवमेंट देखने को मिलेगा। कम से कम 20 शेयर ऐसे हैं जिनमें डिविडेंड, बोनस और स्टॉक स्प्लिट की वजह से हलचल रहेगी। स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (SBI), मणप्पुरम फाइनेंस, ओबेरॉय रियल्टी और आईईएक्स जैसे शेयर एक्स-डिविडेंड ट्रेड करेंगे। इसके अलावा कुछ फार्मा कंपनियों के बोनस इश्यू और स्टॉक स्प्लिट की रिकॉर्ड डेट भी इसी हफ्ते है।
संबंधित समाचार
लेखकों के बारे में
.png)
अगला लेख
What Is the Nifty Power Index? Constituents, Historical Performance, and Selection Criteria
FDI Impact on Share Market: How Foreign Investment Moves Stocks
Weekly vs Monthly Options Expiry: What Investors Need to Know
Explore Learning Centre
All topics · stocks, MFs, derivatives, IPOs