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4 min read | अपडेटेड June 24, 2026, 09:38 IST
सारांश
सरकार ने रेलवे की फाइनेंस कंपनी IRFC में अपनी दो पर्सेंट हिस्सेदारी बेचने का फैसला किया है। यह ऑफर फॉर सेल यानी OFS बुधवार यानी 24 जून से गैर रिटेल निवेशकों के लिए खुल गया है। इसके जरिए सरकार करीब 2300 करोड़ रुपये जुटाने की तैयारी में है।

सरकार IRFC में ऑफर फार सेल के जरिए अपनी हिस्सेदारी बेच रही है। | Image: Shutterstock
गवर्नमेंट की तरफ से सरकारी कंपनियों में हिस्सेदारी बेचने का काम तेजी से आगे बढ़ रहा है। फाइनेंशियल ईयर 2026-27 में इंडियन रेलवे फाइनेंस कॉरपोरेशन यानी IRFC का ऑफर फॉर सेल (OFS) सरकार की तरफ से चौथी हिस्सेदारी बिक्री बनने जा रहा है। यह OFS बुधवार यानी 24 जून से गैर रिटेल निवेशकों के लिए खुल गया है। सरकार इस रेलवे फाइनेंस कंपनी में अपनी दो पर्सेंट तक हिस्सेदारी बेचने का प्लान बना रही है। IRFC से पहले सरकार चालू फाइनेंशियल ईयर में कोल इंडिया और NHPC जैसी कई बड़ी सरकारी कंपनियों और बैंकों में अपनी हिस्सेदारी कम कर चुकी है, जिससे सरकारी खजाने में बड़ी रकम आई है।
डिपार्टमेंट ऑफ एसेट मैनेजमेंट यानी दीपम के सेक्रेटरी अरुणिश चावला ने सोशल मीडिया पर बताया कि सरकार IRFC में एक पर्सेंट इक्विटी बेचने का ऑफर दे रही है, जिसके साथ एक पर्सेंट का ग्रीन शू ऑप्शन भी शामिल है। इस तरह दो दिनों तक चलने वाली इस शेयर बिक्री में कुल 26.13 करोड़ से ज्यादा शेयर ऑफर किए जाएंगे, जो कंपनी की कुल दो पर्सेंट हिस्सेदारी के बराबर है। सरकार ने इस हिस्सेदारी बिक्री के लिए 91 रुपये प्रति शेयर का फ्लोर प्राइस तय किया है। यह फ्लोर प्राइस मंगलवार को बीएसई पर बंद हुए शेयर के भाव से करीब 7.79 पर्सेंट कम है। इस फ्लोर प्राइस पर हिस्सेदारी बेचने से सरकार को 2300 करोड़ रुपये से ज्यादा का रेवेन्यू मिलेगा। गैर रिटेल निवेशक बुधवार को बोली लगा सकते हैं, जबकि रिटेल निवेशकों के लिए यह मौका गुरुवार को खुलेगा। मंगलवार को IRFC का शेयर बीएसई पर 2.16 पर्सेंट गिरकर 98.69 रुपये और एनएसई पर 2.21 पर्सेंट गिरकर 98.67 रुपये पर बंद हुआ था।
चालू फाइनेंशियल ईयर में सरकार अब तक पांच सेंट्रल पब्लिक सेक्टर कंपनियों और बैंकों में अपनी माइनॉरिटी हिस्सेदारी बेच चुकी है। इससे सरकार को अब तक कुल 16,480 करोड़ रुपये का फंड मिला है। सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया में 8.08 पर्सेंट हिस्सेदारी बेचकर 2,266.13 करोड़ रुपये जुटाए गए हैं। कोल इंडिया लिमिटेड में दो पर्सेंट हिस्सेदारी बेचने से 5,542.36 करोड़ रुपये मिले हैं। इसके अलावा एनएचपीसी लिमिटेड में 6.01 पर्सेंट हिस्सेदारी से 4,357.36 करोड़ रुपये, NLC इंडिया लिमिटेड में 2.73 पर्सेंट हिस्सेदारी से 1,223.57 करोड़ रुपये और जनरल इंश्योरेंस कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया यानी GIC में पांच पर्सेंट हिस्सेदारी बेचकर 3,090.47 करोड़ रुपये जुटाए गए हैं। सरकार ने इस साल सरकारी कंपनियों की हिस्सेदारी बिक्री और एसेट मोनेटाइजेशन से कुल 80,000 करोड़ रुपये जुटाने का बजट टारगेट रखा है, और सरकार को उम्मीद है कि वह इस टारगेट को पार कर लेगी।
साल 1986 में बनी IRFC रेलवे मिनिस्ट्री के तहत काम करने वाली एक सरकारी कंपनी है। यह इंडियन रेलवे के लिए फंड जुटाने का मुख्य काम करती है। कंपनी कैपिटल मार्केट और दूसरे फाइनेंशियल इंस्टीट्यूशंस से पैसे जुटाकर रेलवे के लिए इंजन, कोच और वैगन खरीदने में मदद करती है। इसके साथ ही रेलवे के बड़े इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स को पूरा करने के लिए भी फंड देती है। IRFC एक खास कॉस्ट-प्लस फाइनेंसिंग मॉडल पर काम करती है, जिससे इसकी कमाई और कैश फ्लो हमेशा स्थिर और सुरक्षित रहता है। इस कंपनी को नवरत्न का दर्जा मिला हुआ है और रेलवे के विस्तार में इसका बड़ा रोल है।
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, IRFC के बाद सरकार देश की सबसे बड़ी लाइफ इंश्योरेंस कंपनी एलआईसी में भी अपनी करीब दो पर्सेंट हिस्सेदारी बेचने पर विचार कर रही है। यह हिस्सा बिक्री जून के आखिरी में या जुलाई की शुरुआत में आ सकती है। इस हिस्सेदारी बिक्री से सरकार को करीब 10,000 करोड़ रुपये यानी एक बिलियन डॉलर मिलने की उम्मीद है। इसके लिए सरकार गोल्डमैन सैक्स, मोतीलाल ओसवाल इन्वेस्टमेंट एडवाइजर्स, बीएनपी पारिबा और आईआईएफएल कैपिटल सर्विसेज जैसी बड़ी कंपनियों के साथ मिलकर काम कर रही है। हालांकि, इस डील के समय और साइज को लेकर अभी बातचीत चल रही है और इसमें बदलाव भी हो सकता है। इससे पहले मई 2022 में सरकार ने एलआईसी का 3.5 पर्सेंट हिस्सा बेचकर 21,000 करोड़ रुपये जुटाए थे।
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