मार्केट न्यूज़
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4 min read | अपडेटेड September 10, 2026, 13:01 IST
सारांश
SEBI ने बताया कि मौजूदा पोजिशन लिमिट की व्यवस्था 2017 में लागू की गई थी। उस समय के बाजार, कारोबार और भागीदारी को ध्यान में रखकर ये सीमाएं तय की गई थीं। पिछले कुछ वर्षों में कमोडिटी डेरिवेटिव्स मार्केट में काफी बदलाव आया है।

SEBI ने कृषि कमोडिटी को Broad Commodity मानने की शर्तों में भी बदलाव किया है।
मार्केट रेगुलेटर SEBI ने कमोडिटी डेरिवेटिव्स सेगमेंट में क्लाइंट के पोजिशन लिमिट और नियमों के उल्लंघन पर लगने वाले जुर्माने के नियमों में बदलाव किया है। इसका उद्देश्य कमोडिटी डेरिवेटिव्स मार्केट में कारोबार को आसान बनाना और पुराने नियमों को मौजूदा बाजार परिस्थितियों के हिसाब से अपडेट करना है। SEBI ने 9 सितंबर 2026 को जारी सर्कुलर में ये बदलाव किए हैं। यहां हम समझेंगे कि सेबी के नए नियम क्या कहते हैं।
SEBI ने बताया कि मौजूदा पोजिशन लिमिट की व्यवस्था 2017 में लागू की गई थी। उस समय के बाजार, कारोबार और भागीदारी को ध्यान में रखकर ये सीमाएं तय की गई थीं। पिछले कुछ वर्षों में कमोडिटी डेरिवेटिव्स मार्केट में काफी बदलाव आया है। ऐसे में बाजार से जुड़े लोगों ने कृषि कमोडिटी डेरिवेटिव्स की पोजिशन लिमिट की समीक्षा करने और लिमिट से ज्यादा पोजिशन रखने पर लगने वाले जुर्माने की अधिकतम सीमा तय करने की मांग की थी। इन बदलावों पर वर्किंग ग्रुप, कमोडिटी डेरिवेटिव्स एडवाइजरी कमेटी (CDAC) की सिफारिशों और सार्वजनिक टिप्पणियों पर भी विचार किया गया।
SEBI ने कृषि कमोडिटी को Broad Commodity मानने की शर्तों में भी बदलाव किया है। अब कोई कृषि कमोडिटी Broad Commodity तब होगी, जब वह सेंसेटिव कमोडिटी नहीं हो और उसकी पिछले 5 वर्षों की औसत Deliverable Supply कम से कम 10 लाख मीट्रिक टन या कम से कम ₹5,000 करोड़ हो। पहले दोनों शर्तों को एक साथ पूरा करना जरूरी था। अब इनमें से कोई एक शर्त पूरी होने पर कमोडिटी Broad Commodity की कैटेगरी में आ सकती है।
SEBI ने कृषि कमोडिटीज में कुल क्लाइंट-लेवल पोजिशन लिमिट को बढ़ा दिया है। अब Broad Commodity के लिए यह Deliverable Supply का 2%, Narrow Commodity के लिए 1% और Sensitive Commodity के लिए 0.5% होगी। जो कमोडिटी नए नियम के कारण Narrow से Broad कैटेगरी में आती हैं, उन्हें शुरुआत में एक साल तक 1% की लिमिट मिलेगी। इसके बाद समीक्षा के आधार पर एक्सचेंज इसे 2% तक बढ़ा सकता है।
SEBI ने ओपन इंटरेस्ट की निर्धारित सीमा से ज्यादा पोजिशन रखने पर जुर्माने की व्यवस्था भी बदली है। अगर उल्लंघन निर्धारित लिमिट से 2% से ज्यादा है, तो जुर्माना कैलकुलेट की गई रकम या ₹2 लाख, जो भी कम हो, होगा। इसकी गणना अतिरिक्त पोजिशन, क्लोजिंग प्राइस, उल्लंघन के दिनों और 2% की दर के आधार पर होगी। अगर उल्लंघन 2% तक है, तो जुर्माना कैलकुलेट की गई रकम या ₹10,000, जो भी कम हो, होगा। इसके लिए नजदीकी कैलेंडर महीने के अंडरलाइंग फ्यूचर्स की क्लोजिंग कीमत का इस्तेमाल भी किया जा सकता है।
सदस्यों को अतिरिक्त पोजिशन घटाकर उल्लंघन को अगले ट्रेडिंग डे तक निर्धारित सीमा के अंदर लाना होगा। अगर ऐसा नहीं किया जाता है, तो एक्सचेंज बिना किसी अतिरिक्त नोटिस के अतिरिक्त पोजिशन को स्क्वायर-ऑफ कर सकता है।
बार-बार नियम तोड़ने पर भी कार्रवाई होगी। कैलेंडर महीने में एक ट्रेडिंग मेंबर द्वारा 2% से ज्यादा उल्लंघन तीन बार से अधिक होने पर, उसी कमोडिटी से जुड़े मामले में एक्सचेंज सदस्य को एक दिन के लिए स्क्वायर-ऑफ मोड में डाल सकता है। इसके अलावा अतिरिक्त जुर्माना भी लगाया जा सकता है। ये नए नियम तुरंत प्रभाव से लागू हो गए हैं। SEBI ने कमोडिटी डेरिवेटिव्स वाले मान्यता प्राप्त स्टॉक एक्सचेंजों को इन्हें लागू करने के लिए जरूरी सिस्टम तैयार करने का निर्देश दिया है।
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