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4 min read | अपडेटेड November 04, 2026, 17:58 IST
सारांश
केंद्रीय कैबिनेट ने क्रिटिकल मिनरल प्रोसेसिंग को बढ़ावा देने के लिए 2,814 करोड़ रुपये की कैपेक्स स्कीम मंजूर की है। वित्त वर्ष 2026-27 से 2030-31 तक चलने वाली इस योजना में 30% कैपिटल सब्सिडी मिलेगी।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में कैबिनेट मीटिंग हुई।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में केंद्रीय कैबिनेट ने देश की आर्थिक सुरक्षा और आत्मनिर्भरता को मजबूती देने के लिए बड़ा फैसला लिया है। कैबिनेट ने क्रिटिकल मिनरल प्रोसेसिंग को बढ़ावा देने के मकसद से 'कैपेक्स सपोर्ट स्कीम फॉर क्रिटिकल मिनरल प्रोसेसिंग' को मंजूरी दे दी है। इस योजना के लिए पांच वर्षों की अवधि में कुल 2,814 करोड़ रुपये का वित्तीय आवंटन किया गया है। यह योजना वित्त वर्ष 2026-27 से लेकर 2030-31 तक लागू रहेगी। सरकार के इस कदम का मुख्य उद्देश्य देश के भीतर लिथियम और निकल जैसे रणनीतिक खनिजों के प्रोसेसिंग प्लांट्स तैयार करना है ताकि विदेशी आयात पर देश की निर्भरता खत्म हो सके।
वर्तमान समय में दुनिया भर में क्रिटिकल मिनरल्स की प्रोसेसिंग कुछ ही चुनिंदा जगहों पर केंद्रित है। इस वजह से वैश्विक सप्लाई चेन पर भू-राजनीतिक तनाव, कीमतों में तेज उतार-चढ़ाव और आपूर्ति रुकने का बड़ा खतरा बना रहता है। यह स्थिति भारत की आर्थिक संप्रभुता, राष्ट्रीय सुरक्षा और कार्बन उत्सर्जन घटाने के लक्ष्यों के लिए गंभीर चुनौती है। भारत शुद्ध और उच्च गुणवत्ता वाले मिनरल्स के लिए आयात पर काफी निर्भर है, क्योंकि देश में लिथियम, निकल और कोबाल्ट के प्रोसेसिंग का ढांचा अभी शुरुआती दौर में है। भारी पूंजी की जरूरत, उपयुक्त तकनीक की कमी और कच्चे माल तक सीमित पहुंच की चुनौतियों से निपटने के लिए ही यह वित्तीय सहायता दी जा रही है।
इस योजना के तहत देश में चार प्रमुख क्रिटिकल मिनरल प्रोसेसिंग प्लांट्स स्थापित किए जाएंगे। इनमें लिथियम के दो और निकल के दो प्रोसेसिंग प्लांट्स शामिल होंगे। लिथियम के दोनों प्लांट्स की न्यूनतम प्रोडक्शन कैपेसिटी कम से कम 30 किलो टन और निकल प्लांट्स की न्यूनतम प्रोडक्शन कैपेसिटी 50 किलो टन प्रति वर्ष होना जरूरी है। सरकार पात्र निवेश पर 30% की कैपिटल सब्सिडी देगी। इसमें लिथियम के लिए प्रति लाभार्थी अधिकतम 500 करोड़ रुपये और निकल के लिए प्रति लाभार्थी अधिकतम 900 करोड़ रुपये की सहायता सीमा तय की गई है। निकल उत्पादन के दौरान सह-उत्पाद के रूप में कोबाल्ट भी मिलेगा, जो देश के लिए दोहरा लाभ होगा।
घरेलू स्तर पर लिथियम और निकल की हाई प्योरिटी कंपाउंड्स में प्रोसेसिंग होने से कई प्रमुख सेक्टर्स को सीधा लाभ मिलेगा। यह योजना देश में इलेक्ट्रिक मोबिलिटी यानी इलेक्ट्रिक वाहनों, बैटरी एनर्जी स्टोरेज सिस्टम, इलेक्ट्रॉनिक्स, रक्षा उपकरण और स्पेशलिटी स्टील जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों की जरूरतों को पूरा करेगी। इससे देश के अंदर ही वैल्यू एडिशन बढ़ेगा और आयात का घरेलू विकल्प तैयार होगा। जब देश में ही बैटरी और उच्च तकनीक उपकरणों के लिए कच्चे माल की प्रोसेसिंग होगी, तो भारतीय उद्योगों को मजबूती मिलेगी और फ्यूचर में किसी बाहरी संकट से उत्पादन बाधित नहीं होगा।
योजना के लिए लाभार्थियों का चयन दो चरणों वाली प्रक्रिया से होगा। पहले चरण में कंपनियों की तकनीकी योग्यता की जांच होगी। केवल वही कंपनियां दूसरे चरण की वित्तीय बोली में जा सकेंगी जो तकनीकी योग्यता पूरी करेंगी। इसके बाद सबसे कम कैपेक्स सपोर्ट मांगने वाली कंपनियों को लीस्ट-कॉस्ट आधार पर चुना जाएगा। हर खनिज के लिए दो-दो लाभार्थियों का चयन होगा। सरकार यह वित्तीय प्रोत्साहन एकमुश्त न देकर तय लक्ष्यों को हासिल करने के आधार पर तीन किस्तों में जारी करेगी। यह योजना आत्मनिर्भर भारत के संकल्प को आगे बढ़ाने और देश की क्षमताओं को विश्व स्तर पर मजबूत करने में अहम साबित होगी।
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