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Reliance Jio IPO: रिलायंस जियो के आईपीओ में बड़ा बदलाव, जानें मूल कंपनी RIL के शेयरों पर क्या होगा इसका असर?

Upstox

4 min read | अपडेटेड May 18, 2026, 11:00 IST

सारांश

रिलायंस जियो का बहुप्रतीक्षित आईपीओ पूरी तरह से फ्रेश इक्विटी इश्यू पर आधारित हो सकता है। कंपनी मौजूदा निवेशकों के साथ वैल्यूएशन विवाद के कारण ऑफर फॉर सेल यानी ओएफएस का हिस्सा हटा सकती है। इस आईपीओ का सीधा असर रिलायंस इंडस्ट्रीज के शेयरों की परफॉर्मेंस और वैल्यू अनलॉकिंग पर देखने को मिलेगा।

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रिलायंस जियो का आईपीओ बाजार में मचाएगा धूम।

रिलायंस इंडस्ट्रीज लिमिटेड की टेलीकॉम और डिजिटल आर्म रिलायंस जियो के बहुप्रतीक्षित इनिशियल पब्लिक ऑफरिंग यानी आईपीओ को लेकर बाजार में बड़ी हलचल शुरू हो गई है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, जियो का यह आईपीओ पूरी तरह से नए शेयरों यानी फ्रेश इक्विटी इश्यू पर आधारित हो सकता है। कंपनी ने इसमें से ऑफर फॉर सेल वाले हिस्से को हटाने का मन बनाया है। ऐसा मौजूदा ग्लोबल इंवेस्टर्स के साथ वैल्यूएशन और प्राइसिंग को लेकर चल रहे विवाद की वजह से हो रहा है। इस बड़े बदलाव का सीधा असर रिलायंस इंडस्ट्रीज के शेयरों की चाल पर पड़ने की उम्मीद जताई जा रही है।

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वैल्यूएशन और प्राइसिंग पर फंसा पेंच

जियो के पुराने और मौजूदा शेयरहोल्डर्स चाहते हैं कि कंपनी के आईपीओ का इश्यू प्राइस जितना हो सके उतना ज्यादा रखा जाए, ताकि पिछले पांच साल से निवेश किए बैठे इन बड़े इंवेस्टर्स को अपने पैसे पर अधिकतम रिटर्न मिल सके। हालांकि, रिलायंस का सोचना इसके बिल्कुल उलट है। प्रमोटर ग्रुप का मानना है कि अगर बहुत ज्यादा आक्रामक प्राइसिंग रखी गई और लिस्टिंग के दिन शेयर नीचे चला गया, तो इससे आम रिटेल इंवेस्टर्स को भारी नुकसान उठाना पड़ सकता है। रिलायंस चाहता है कि लिस्टिंग के बाद रिटेल इंवेस्टर्स के लिए पैसा बनाने का अच्छा मौका रहे। इसी वजह से पुराने निवेशकों द्वारा हिस्सेदारी बेचने का प्लान ड्रॉप किया जा रहा है।

भारत का सबसे बड़ा आईपीओ लाने की तैयारी

रिलायंस जियो अगले दो हफ्तों के भीतर मार्केट रेगुलेटर सेबी के पास अपना ड्राफ्ट रेड हेरिंग प्रोस्पेक्टस यानी डीआरएचपी जमा कर सकता है, हालांकि बाजार के हालातों को देखते हुए इस समयसीमा में थोड़ा बदलाव भी संभव है। यह आईपीओ लगभग 4 बिलियन डॉलर का हो सकता है, जो भारतीय शेयर बाजार के इतिहास का अब तक का सबसे बड़ा पब्लिक ऑफर साबित होगा। इस आईपीओ से जुटने वाले कुल फंड में से लगभग 25000 करोड़ रुपये का इस्तेमाल कंपनी अपने ऊपर बकाया कर्ज को कम करने के लिए करेगी, जबकि बाकी बची हुई रकम का उपयोग दूसरे कॉर्पोरेट कामकाज के लिए किया जाएगा। वर्तमान में रिलायंस इंडस्ट्रीज के पास जियो में 67 पर्सेंट हिस्सेदारी है और वह नए स्ट्रक्चर के तहत अपनी हिस्सेदारी को थोड़ा कम करने के लिए तैयार है। इससे पहले साल 2020 में जियो प्लेटफॉर्म्स ने मेटा और गूगल जैसे बड़े दिग्गजों से 1.52 लाख करोड़ रुपये जुटाए थे। मौजूदा समय में जियो प्लेटफॉर्म्स में मेटा की 9.99 पर्सेंट और गूगल की 7.73 पर्सेंट हिस्सेदारी है।

रिलायंस के शेयरों पर कैसा होगा असर?

मार्केट एक्सपर्ट्स का मानना है कि इस आईपीओ से रिलायंस इंडस्ट्रीज के शेयरों में सकारात्मक बदलाव देखने को मिलेगा, लेकिन यह कोई बहुत बड़ा धमाका नहीं होगा। जियो में रिलायंस की 67 पर्सेंट हिस्सेदारी थोड़ी कम जरूर होगी, लेकिन कंपनी के प्रमोटर का पूरा कंट्रोल बना रहेगा। सबसे बड़ी बात यह है कि जब जियो बाजार में अलग से ट्रेड करना शुरू करेगा, तो रिलायंस के बड़े ग्रुप स्ट्रक्चर के भीतर दबी हुई वैल्यू पूरी पारदर्शिता के साथ बाहर आ जाएगी। बाजार को जियो की असली कीमत का पता चलेगा, जिसे वैल्यू अनलॉकिंग कहा जाता है। चूंकि बाजार में सिर्फ 2.5 पर्सेंट के आसपास का फ्री फ्लोट रहेगा, इसलिए शेयरों की कमी की वजह से जियो का शेयर प्रीमियम पर भी ट्रेड कर सकता है।

रिलायंस के लिए उभर रहे पॉजिटिव ट्रिगर्स

एक्सपर्ट्स के अनुसार, जियो के लिस्ट होने से रिलायंस इंडस्ट्रीज के बिजनेस की रेटिंग फिर से सुधरेगी। आईपीओ के जरिए आने वाले फ्रेश कैपिटल से जियो की बैलेंस शीट और मजबूत होगी। रिलायंस सबसे बड़ा शेयरहोल्डर होने के नाते इस पूरी वैल्यू क्रिएशन का सबसे बड़ा भागीदार होगा। कम फ्री फ्लोट होने से होल्डिंग कंपनी के डिस्काउंट को लेकर होने वाली चिंताएं भी काफी हद तक दूर हो जाएंगी। हाल के समय में रिलायंस के शेयर का प्रदर्शन थोड़ा कमजोर रहा है। पिछले एक हफ्ते में यह शेयर 4.30 पर्सेंट और एक महीने में 2.93 पर्सेंट तक गिरा है। इस साल अब तक यानी वाईटीडी बेसिस पर स्टॉक में 16.01 पर्सेंट और पिछले एक साल में 8.15 पर्सेंट की गिरावट देखी गई है।

(डिस्क्लेमर: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें।)

लेखकों के बारे में

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Upstox Hindi News Desk पत्रकारों की एक टीम है जो शेयर बाजारों, अर्थव्यवस्था, वस्तुओं, नवीनतम व्यावसायिक रुझानों और व्यक्तिगत वित्त को उत्साहपूर्वक कवर करती है।

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