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4 min read | अपडेटेड May 18, 2026, 08:35 IST
सारांश
ग्लोबल मार्केट में डॉलर और अमेरिकी ट्रेजरी यील्ड में बढ़त के कारण सोने की कीमतों में बड़ी गिरावट आई है। शुक्रवार को सोना एक हफ्ते से ज्यादा के निचले स्तर पर आ गया। मिडिल ईस्ट में तनाव के चलते बढ़े क्रूड ऑयल के दामों से इंफ्लेशन की चिंता बढ़ गई है, जिससे ब्याज दरें बढ़ने की उम्मीद है।

इंटरनेशनल और घरेलू बाजार में सोने और चांदी की कीमतों में आई भारी गिरावट। | Image: Shutterstock
ग्लोबल मार्केट से मिले कमजोर संकेतों के कारण सोने और चांदी की कीमतों में शुक्रवार को भारी गिरावट देखने को मिली है। अमेरिकी ट्रेजरी यील्ड और डॉलर इंडेक्स में आई तेजी के चलते सोना टूटकर एक हफ्ते से ज्यादा के निचले स्तर पर पहुंच गया है। मिडिल ईस्ट में चल रहे तनाव और युद्ध की वजह से इंफ्लेशन यानी महंगाई बढ़ने की आशंका गहरा गई है। इस वजह से सेंट्रल बैंकों द्वारा ब्याज दरें बढ़ने की उम्मीद और मजबूत हो गई है, जिसका सीधा असर कीमती धातुओं की कीमतों पर पड़ा है। इंटरनेशनल मार्केट के साथ-साथ भारतीय वायदा बाजार और रिटेल मार्केट में भी सोने-चांदी के दाम नीचे आ गए हैं।
ग्लोबल मार्केट में स्पॉट गोल्ड की कीमत 2 परसेंट गिरकर 4556.46 डॉलर प्रति औंस पर आ गई, जो 5 मई के बाद का सबसे निचला स्तर है। इस पूरे हफ्ते में सोने की कीमतों में 3 परसेंट से ज्यादा की कमजोरी दर्ज की जा चुकी है। वहीं अमेरिकी गोल्ड फ्यूचर्स का जून डिलीवरी वाला कॉन्ट्रैक्ट भी 2.7 परसेंट टूटकर 4561.50 डॉलर पर बंद हुआ। कमोडिटी एक्सपर्ट्स का मानना है कि कीमती धातुओं में यह बिकवाली डॉलर के मजबूत होने और दुनिया भर में बॉन्ड यील्ड की दरों में बढ़ोतरी होने की वजह से देखी जा रही है। बेंचमार्क 10 साल की अमेरिकी ट्रेजरी यील्ड एक साल के उच्च स्तर के करीब पहुंच गई है, जिससे बिना ब्याज वाले सोने को रखने की लागत बढ़ जाती है। इसके अलावा, डॉलर दो महीने की सबसे बड़ी साप्ताहिक बढ़त की ओर बढ़ रहा है, जिससे विदेशी खरीदारों के लिए सोना खरीदना काफी महंगा हो गया है।
मिडिल ईस्ट के हालातों पर बात करते हुए अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि ईरान के साथ उनका धैर्य अब खत्म हो रहा है। इसके साथ ही चीन की तरफ से भी ट्रेड या युद्ध को रोकने के लिए कोई खास मदद नहीं मिली है। चीन द्वारा विवाद सुलझाने में कोई बड़ी भूमिका न निभाने के कारण क्रूड ऑयल की कीमतों में लगातार तेजी आ रही है। यूएस-इजराइल और ईरान के बीच युद्ध शुरू होने के बाद से क्रूड ऑयल के दाम 40 परसेंट से ज्यादा बढ़ चुके हैं। कच्चे तेल के महंगे होने से दुनिया भर में इंफ्लेशन का खतरा बढ़ गया है। आमतौर पर महंगाई के समय सेंट्रल बैंक ब्याज दरों में बढ़ोतरी करते हैं, जिसके कारण सोने जैसी बिना ब्याज वाली एसेट का आकर्षण कम हो जाता है। यही वजह है कि ट्रेडर्स अब इस साल ब्याज दरों में कटौती की उम्मीद छोड़ चुके हैं और दरें बढ़ने का अनुमान लगा रहे हैं।
ग्लोबल दबाव का असर भारतीय वायदा बाजार यानी एमसीएक्स पर भी साफ दिखाई दिया। शुक्रवार की सुबह एमसीएक्स पर जून का गोल्ड फ्यूचर्स 0.87 परसेंट की गिरावट के साथ 160562 रुपये प्रति 10 ग्राम पर आ गया। वहीं चांदी का जुलाई फ्यूचर्स 3.28 परसेंट की भारी गिरावट के साथ 281551 रुपये प्रति किलोग्राम पर ट्रेड कर रहा था। मजबूत होते डॉलर और कच्चे तेल के बढ़ते दामों ने घरेलू बाजार के सेंटिमेंट को पूरी तरह से बिगाड़ दिया है, जिससे निवेशकों ने सोने और चांदी से दूरी बनाना शुरू कर दिया है।
इंडियन बुलियन एसोसिएशन के डेटा के मुताबिक, रिटेल मार्केट में भी कीमतों में बदलाव देखा गया है। बाजार में 24 कैरेट सोने की कीमत 159110 रुपये प्रति 10 ग्राम दर्ज की गई, जबकि 22 कैरेट सोने का भाव 145851 रुपये प्रति 10 ग्राम पर रहा। इसके अलावा, 999 प्योरिटी वाली चांदी की कीमत रिटेल मार्केट में 271740 रुपये प्रति किलोग्राम दर्ज की गई है। डेटा के मुताबिक सोने का क्लोजिंग भाव 159120 रुपये प्रति 10 ग्राम और चांदी का भाव 271760 रुपये प्रति किलोग्राम के आसपास बना हुआ है।
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