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3 min read | अपडेटेड May 18, 2026, 10:41 IST
सारांश
सोमवार को शुरुआती कारोबार में भारतीय रुपया अमेरिकी डॉलर के मुकाबले टूटकर अपने अब तक के सबसे निचले स्तर 96.25 पर पहुंच गया। कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों, वैश्विक अनिश्चितताओं और डॉलर की मजबूती के कारण रुपये पर भारी दबाव देखा जा रहा है, जिससे शेयर बाजार में भी बड़ी गिरावट आई है।

रुपया सोमवार को कमजोर रुख के साथ खुला | Image: Shutterstock
भारतीय रुपये में सोमवार को भारी कमजोरी देखने को मिली है। वैश्विक बाजारों में बढ़ती अनिश्चितताओं और मजबूत होते अमेरिकी डॉलर के कारण शुरुआती कारोबार में ही रुपया अपने अब तक के सबसे निचले ऐतिहासिक स्तर पर पहुंच गया। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कच्चे तेल की ऊंची कीमतों और तनाव ने घरेलू मुद्रा पर दबाव को बहुत ज्यादा बढ़ा दिया है। विदेशी मुद्रा कारोबारियों का कहना है कि इन वैश्विक कारणों की वजह से दुनिया भर के उभरते बाजारों की मुद्राओं में भारी उथल-पुथल मची हुई है और भारतीय रुपया भी इस दबाव से खुद को बचा नहीं पाया है। सुबह बाजार खुलते ही रुपये में बड़ी गिरावट दर्ज की गई, जिसने निवेशकों की चिंता को बढ़ा दिया है।
अंतरबैंक विदेशी मुद्रा विनिमय बाजार में सोमवार को रुपये की शुरुआत बेहद कमजोर रही। भारतीय रुपया अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 96.19 पर खुला। बाजार में कारोबार आगे बढ़ने के साथ ही इसमें गिरावट और गहरा गई तथा यह डॉलर के मुकाबले टूटकर 96.25 के रिकॉर्ड निचले स्तर पर पहुंच गया। यह गिरावट पिछले बंद भाव के मुकाबले पूरे 44 पैसे की कमजोरी को दर्शाती है। इससे पहले बीते शुक्रवार को भी रुपये में भारी गिरावट देखी गई थी, जब रुपया अमेरिकी डॉलर के सामने 96 के स्तर को छूने के बाद 95.81 के सर्वकालिक निचले स्तर पर बंद हुआ था। लगातार हो रही इस गिरावट से फोरेक्स मार्केट में चिंता बढ़ गई है।
रुपये की इस कमजोरी के पीछे सबसे बड़ा कारण अमेरिकी डॉलर का मजबूत होना और कच्चे तेल की कीमतों में लगातार आ रही तेजी है। दुनिया की छह प्रमुख मुद्राओं के मुकाबले अमेरिकी डॉलर की मजबूती को दिखाने वाला डॉलर सूचकांक यानी डॉलर इंडेक्स 0.04 पर्सेंट की बढ़त के साथ 99.32 के स्तर पर पहुंच गया है। डॉलर के मजबूत होने से दुनिया भर की दूसरी करेंसी पर दबाव बढ़ जाता है। दूसरी तरफ, अंतरराष्ट्रीय मानक ब्रेंट क्रूड का भाव भी 1.83 पर्सेंट की बड़ी तेजी के साथ 111.26 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गया है। कच्चे तेल का महंगा होना भारत जैसे बड़े तेल आयातक देश के लिए बहुत बड़ी चुनौती पैदा करता है, जिससे देश का आयात बिल बढ़ता है और रुपये की वैल्यू कम होती है।
रुपये की इस रिकॉर्ड गिरावट और ग्लोबल मार्केट के खराब सेंटिमेंट्स का सीधा असर भारतीय घरेलू शेयर बाजार पर भी देखने को मिला है। सोमवार को शुरुआती कारोबार के दौरान शेयर बाजार के दोनों प्रमुख सूचकांक भारी गिरावट के साथ ट्रेड करते हुए नजर आए। बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज का सूचकांक सेंसेक्स शुरुआती कारोबार में ही 833.20 अंक टूटकर 74404.79 अंक के स्तर पर आ गया। ठीक इसी तरह नेशनल स्टॉक एक्सचेंज का सूचकांक निफ्टी भी 234 अंक फिसलकर 23401.70 अंक पर कारोबार कर रहा था। बाजार में इस बिकवाली से निवेशकों को बड़ा नुकसान उठाना पड़ा है।
दिलचस्प बात यह है कि शेयर बाजार के आंकड़ों के अनुसार, विदेशी संस्थागत निवेशकों यानी एफआईआई ने बीते शुक्रवार को लगातार दूसरे दिन भारतीय बाजार में शुद्ध लिवाली की थी। विदेशी निवेशकों ने शुक्रवार को बाजार से 1329.17 करोड़ रुपये के शेयर खरीदे थे। इसके बावजूद, सोमवार को वैश्विक स्तर पर पैदा हुए नए तनाव और क्रूड ऑयल की महंगाई के सामने घरेलू बाजार टिक नहीं सका।
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