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  1. RIL के प्रमोटर ग्रुप ने अप्रैल-जून क्वार्टर में हिस्सेदारी .5% तक बढ़ाई, कंपनी के लिए क्या हैं इसके मायने?

मार्केट न्यूज़

RIL के प्रमोटर ग्रुप ने अप्रैल-जून क्वार्टर में हिस्सेदारी .5% तक बढ़ाई, कंपनी के लिए क्या हैं इसके मायने?

Namita Shukla

3 min read | अपडेटेड July 17, 2026, 14:29 IST

सारांश

आमतौर पर प्रमोटर्स की हिस्सेदारी बढ़ने को कंपनी की संभावनाओं के प्रति प्रबंधन के भरोसे का संकेत माना जाता है। इससे प्रमोटर्स का कंट्रोल मजबूत होता है और पब्लिक हिस्सेदारी में मामूली कमी आती है।

रिलायंस इंडस्ट्रीज लिमिटेड

रिलायंस के प्रमोटर्स ने अप्रैल-जून तिमाही में हिस्सेदारी .5% बढ़ाई (Photo: Shutterstock)

रिलायंस इंडस्ट्रीज लिमिटेड (आरआईएल) के प्रमोटर ग्रुप ने अप्रैल-जून क्वार्टर के दौरान मार्केट से शेयर खरीदकर अपनी हिस्सेदारी में करीब .5% की बढ़ोतरी की है। रिलायंस इंडस्ट्रीज लिमिटेड आज फाइनेंशियल ईयर 2026-27 के पहले क्वार्टर यानी कि अप्रैल से जून के बीच के वित्तीय नतीजे घोषित करने वाली है। नियामकीय शेयरहोल्डिंग डेटा के अनुसार, प्रमोटर्स और प्रमोटर ग्रुप की हिस्सेदारी अप्रैल-जून तिमाही के अंत में बढ़कर 50.48% हो गई, जो तीन महीने पहले (जनवरी-मार्च) करीब 50% थी। यह खरीद भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (सेबी) के ‘क्रीपिंग एक्विजिशन’ नियमों के तहत अनुमत सीमा के अंदर की गई। इन नियमों के तहत प्रमोटर्स निर्धारित सीमा के अधीन अनिवार्य खुली पेशकश लाए बिना धीरे-धीरे अपनी हिस्सेदारी बढ़ा सकते हैं।

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RIL में किसके पास कितनी हिस्सेदारी?

मार्केट एनालिस्ट्स का अनुमान है कि प्रमोटर ग्रुप ने इन शेयर की खरीद पर 8,500 करोड़ से 9,000 करोड़ रुपये खर्च किए होंगे। कंपनी की ताजा शेयरहोल्डिंग जानकारी के अनुसार, रिलायंस के चेयरमैन मुकेश अंबानी, उनकी पत्नी और उनके तीन बच्चों ईशा, आकाश और अनंत के पास कंपनी के 1.61-1.61 करोड़ शेयर हैं। यह प्रत्येक के लिए 0.12% हिस्सेदारी के बराबर है। उनकी मां के. डी. अंबानी के पास 3.14 करोड़ शेयर यानी 0.24% हिस्सेदारी है। बाकी शेयर प्रमोटर ग्रुप की अलग-अलग इकाइयों के पास हैं। इनमें श्रीचक्र कमर्शियल्स एलएलपी की हिस्सेदारी सबसे अधिक 10.93% है। देवर्षि कमर्शियल्स एलएलपी, करुणा कमर्शियल एलएलपी और तत्त्वम एंटरप्राइजेज एलएलपी की हिस्सेदारी 8.06-8.06% है। यह कदम ऐसे समय उठाया गया है जब रिलायंस रिटेल, डिजिटल, न्यू एनर्जी और उपभोक्ता कारोबार में भारी निवेश कर रही है और दीर्घकालिक वृद्धि के अवसरों पर ध्यान केंद्रित किए हुए है।

प्रमोटर्स की हिस्सेदारी बढ़ने से क्या होता है कंपनी पर असर?

आमतौर पर प्रमोटर्स की हिस्सेदारी बढ़ने को कंपनी की संभावनाओं के प्रति प्रबंधन के भरोसे का संकेत माना जाता है। इससे प्रमोटर्स का कंट्रोल मजबूत होता है और पब्लिक हिस्सेदारी में मामूली कमी आती है। एनालिस्ट्स का कहना है कि इस तरह के सौदे अक्सर इस धारणा को दर्शाते हैं कि शेयर में लंबी समय के लिए आकर्षक मूल्य है, न कि किसी निकट भविष्य की कॉरपोरेट कार्रवाई का संकेत। उनका मानना है कि इस बढ़ोतरी का कंपनी के ऑपरेशन्स पर तत्काल कोई असर पड़ने की संभावना नहीं है, लेकिन निवेशक इसे रिलायंस की रेवेन्यू ग्रोथ और फ्यूचर कैपिटल अलोकेशन प्लान्स के प्रति प्रमोटर्स के भरोसे के रूप में पॉजिटिव संकेत मान सकते हैं। एनालिस्ट्स के अनुसार, यह कदम रिलायंस की दीर्घकालिक वृद्धि संभावनाओं को लेकर प्रमोटर्स के विश्वास को दर्शाता है। अल्पसंख्यक निवेशकों के लिए भी इसे सकारात्मक माना जा रहा है, क्योंकि आमतौर पर प्रमोटर्स की ओर से शेयर खरीद को कंपनी के प्रति उनके भरोसे के संकेत के रूप में देखा जाता है।

(डिस्क्लेमर: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें।)
पीटीआई इनपुट के साथ

लेखकों के बारे में

Namita Shukla
Namita Shukla is a seasoned journalist with over 15 years of experience in Hindi media. She has worked with some of the most reputed news organizations, including Navbharat Times, Dainik Jagran, Aaj Tak, and Hindustan Times Hindi. Throughout her career, Namita has reported on a wide range of beats such as national affairs, sports, business, and entertainment, bringing clarity and depth to her reporting. In addition to her journalistic work, she is a certified fact-checker by both Google and Meta, underscoring her commitment to accuracy and ethical journalism in the digital age.

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