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  1. आरबीआई के कड़े फैसले से हिल गए बैंकिंग शेयर्स, निफ्टी बैंक 1% टूटा, जानें क्यों गिर रहे हैं शेयर?

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आरबीआई के कड़े फैसले से हिल गए बैंकिंग शेयर्स, निफ्टी बैंक 1% टूटा, जानें क्यों गिर रहे हैं शेयर?

Upstox

3 min read | अपडेटेड October 12, 2026, 15:08 IST

सारांश

12 अक्टूबर को बैंकिंग शेयर्स में बड़ी गिरावट दर्ज की गई। रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया द्वारा लिक्विडिटी कम करने के लिए सीआरआर नियम सख्त करने और 25,000 करोड़ रुपए की बॉन्ड सेल के ऐलान से निफ्टी बैंक इंडेक्स 1% तक टूट गया।

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आरबीआई के लिक्विडिटी टाइटनिंग फैसलों के बाद बैंकिंग शेयर्स में आई बड़ी गिरावट।

12 अक्टूबर को भारतीय शेयर बाजार में बैंकिंग शेयर्स पर भारी दबाव देखने को मिला। रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया यानी आरबीआई द्वारा बैंकिंग सिस्टम में लिक्विडिटी कम करने के लिए उठाए गए कड़े कदमों के बाद निवेशकों की धारणा प्रभावित हुई। इसके चलते स्टेट बैंक ऑफ इंडिया, ICICI बैंक, एचडीएफसी बैंक, पंजाब नेशनल बैंक और इंडसइंड बैंक जैसी बड़ी कंपनियों के शेयर्स लाल निशान में कारोबार करते दिखे। नेशनल स्टॉक एक्सचेंज यानी एनएसई के सेक्टोरल इंडेक्स निफ्टी बैंक में लगभग 1% की गिरावट आई। गिरावट के बाद सूचकांक ने कुछ रिकवरी जरूर दिखाई, लेकिन दोपहर तक यह 0.83% की सुस्ती के साथ 54,797 के स्तर के आसपास ट्रेड कर रहा था।

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डेली CRR की सीमा 90% से बढ़ाकर हुई 99%

आरबीआई ने देश में बढ़ती महंगाई की चिंताओं के बीच लिक्विडिटी पर लगाम लगाने के लिए नियमों को काफी सख्त कर दिया है। सेंट्रल बैंक के नए फैसले के अनुसार, 16 अक्टूबर से सभी संस्थागत बैंकों को हर दिन अपनी जरूरी कैश रिजर्व रेशियो यानी सीआरआर का 99% हिस्सा मेंटेन करना अनिवार्य होगा। इससे पहले बैंकों के लिए यह सीमा 90% तय थी। सीआरआर वह फंड होता है जिसे बैंकों को सुरक्षा के तौर पर कैश के रूप में आरबीआई के पास रखना पड़ता है। अब 99% की सीमा तय होने से बैंकों के पास रोजाना के आधार पर निवेश करने या लोन देने के लिए कम फंड बचेगा और उनकी फ्लेक्सिबिलिटी घटेगी। इसी नियम के डर से निवेशकों ने बैंक स्टॉक्स बेचना शुरू कर दिया।

25,000 करोड़ रुपए की बॉन्ड सेल और महंगाई का डर

बैंकिंग शेयरों में बिकवाली के पीछे दूसरा बड़ा कारण सरकार द्वारा की जाने वाली बॉन्ड की बिक्री है। आरबीआई 13 अक्टूबर 2026 को ओपन मार्केट सेल के जरिए 25,000 करोड़ रुपए के सरकारी बॉन्ड्स बेचने जा रहा है। यह नीलामी मल्टी-सिक्योरिटी ऑक्शन और मल्टीपल प्राइस मेथड के तहत होगी। सेंट्रल बैंक ने वित्त वर्ष 2026-27 की तीसरी तिमाही में 6% महंगाई दर का रिस्क जताया है, जिसके पीछे सप्लाई साइड प्रेशर, अल-नीनो की स्थिति और इंटरनेशनल मार्केट में कच्चे तेल की ऊंची कीमतें मुख्य वजह हैं। मार्केट में बॉन्ड्स की भारी बिक्री होने से उधारी की दरें और बॉन्ड यील्ड बढ़ सकती हैं, जिससे बैंकों के परफॉर्मेंस पर असर पड़ सकता है।

ऑयल कंपनियों के लिए स्पेशल विंडो से रुपए में आई मजबूती

आरबीआई ने बैंकिंग लिक्विडिटी टाइट करने के साथ ही करेंसी मार्केट को सपोर्ट देने के लिए पब्लिक सेक्टर की ऑयल मार्केटिंग कंपनियों यानी ओएमसी के लिए एक स्पेशल विंडो की शुरुआत की है। इसके तहत ये कंपनियां अपने क्रूड ऑयल इंपोर्ट बिल के लिए जरूरी अमेरिकी डॉलर सीधे आरबीआई से खरीद सकेंगी। इससे कंपनियों को ओपन फॉरेक्स मार्केट में नहीं जाना पड़ेगा और भारतीय करेंसी पर बना दबाव कम होगा। इस कदम के बाद सोमवार को अमेरिकी डॉलर के मुकाबले भारतीय रुपया 1% मजबूत होकर 95.83 के स्तर पर पहुंच गया। ब्रोकरेज फर्म सीएलएसए के विश्लेषकों के अनुसार, इन फैसलों से नियर टर्म में रुपए को सपोर्ट मिलेगा और 10 साल की बॉन्ड यील्ड में तेजी आ सकती है।

(डिस्क्लेमर: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें।)

लेखकों के बारे में

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Upstox Hindi News Desk पत्रकारों की एक टीम है जो शेयर बाजारों, अर्थव्यवस्था, वस्तुओं, नवीनतम व्यावसायिक रुझानों और व्यक्तिगत वित्त को उत्साहपूर्वक कवर करती है।

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