मार्केट न्यूज़

4 min read | अपडेटेड July 23, 2026, 12:01 IST
सारांश
कंपनी का कहना है कि यह ऑर्डर उसकी पीटीसी वन (फ्रॉम मेल्ट टू मिशन) रणनीति को और मजबूत करेगा। अब तक यह मॉडल टाइटेनियम और सुपरएलॉय सामग्री, प्रिसिजन कास्टिंग, मशीनिंग और सिस्टम इंटीग्रेशन तक सीमित था।
शेयर सूची

पीटीसी इंडस्ट्रीज के शेयरों में जबर्दस्त तेजी क्यों? (Photo: Shutterstock)
डिफेंस और एयरोस्पेस सेक्टर के लिए एडवांस्ड इंजीनियरिंग प्रोडक्ट्स बनाने वाली पीटीसी इंडस्ट्रीज लिमिटेड को रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (DRDO) की प्रयोगशाला आर्मामेंट रिसर्च एंड डेवलपमेंट एस्टैब्लिशमेंट (ARDE) से एक महत्वपूर्ण डिजाइन एंड डेवलपमेंट ऑर्डर मिला है। जिसके बाद पीटीसी इंडस्ट्रीज के शेयरों में तेजी देखने को मिली है। पीटीसी इंडस्ट्रीज ने एक्सचेंज फाइलिंग में इस ऑर्डर की जानकारी दी। 11:30 बजे के करीब पीटीसी इंडस्ट्रीज के शेयर करीब 4% यानी कि 667 रुपये उछलकर 18,444 रुपये प्रति शेयर ट्रेड हो रहे थे।
कंपनी अब भारतीय सेना के 105 मिमी इंडियन लाइट वेट टैंक के लिए टाइटेनियम क्रैडल का डिजाइन, विकास और निर्माण करेगी। कंपनी के मुताबिक यह ऑर्डर उसके लिए एक बड़ी उपलब्धि है, क्योंकि पहली बार उसे केवल निर्माण ही नहीं, बल्कि किसी मिशन-क्रिटिकल रक्षा उपकरण के डिजाइन और विकास की भी जिम्मेदारी सौंपी गई है। पीटीसी इंडस्ट्रीज ने बताया कि यह पारंपरिक ‘बिल्ड-टू-प्रिंट’ मैन्युफैक्चरिंग ऑर्डर नहीं है, जिसमें ग्राहक डिजाइन उपलब्ध कराता है और कंपनी केवल निर्माण करती है। इस बार कंपनी को पूरी इंजीनियरिंग क्षमता का इस्तेमाल करते हुए ऐसा टाइटेनियम कंपोनेंट तैयार करना होगा, जो सैन्य जरूरतों और प्रदर्शन मानकों पर पूरी तरह खरा उतरे। इससे कंपनी की भूमिका एक मैन्युफैक्चरिंग कंपनी से आगे बढ़कर डिजाइन-आधारित रक्षा प्रौद्योगिकी भागीदार के रूप में मजबूत होगी।
टाइटेनियम क्रैडल लाइट वेट टैंक के हथियार सिस्टम का बेहद अहम संरचनात्मक हिस्सा होता है। यह मुख्य गन बैरल और ब्रीच को सहारा देता है, रिकॉइल मैकेनिज्म और रिक्यूपरेटर के लिए अटैचमेंट पॉइंट उपलब्ध कराता है और फायरिंग के दौरान उत्पन्न बल को सुरक्षित तरीके से टरेट तक पहुंचाने का काम करता है। हल्के टैंक के लिए इस कंपोनेंट का कम वजन और अधिक मजबूती बेहद जरूरी होती है, ताकि ऊंचाई वाले इलाकों और कठिन भौगोलिक परिस्थितियों में टैंक की गतिशीलता और प्रदर्शन बेहतर बना रहे।
कंपनी के अनुसार टाइटेनियम मिश्रधातु (Titanium Alloy) उच्च मजबूती, कम वजन, जंग-रोधी क्षमता और लंबे समय तक टिकाऊ प्रदर्शन जैसी खूबियों के कारण ऐसे रक्षा उपकरणों के लिए सबसे उपयुक्त सामग्री मानी जाती है। हालांकि इन गुणों को वास्तविक सैन्य उत्पाद में बदलने के लिए केवल मैन्युफैक्चरिंग नहीं, बल्कि डिजाइन, मटेरियल साइंस, स्ट्रक्चरल इंजीनियरिंग और कठोर परीक्षण की भी जरूरत होती है।
कंपनी का कहना है कि यह ऑर्डर उसकी पीटीसी वन (फ्रॉम मेल्ट टू मिशन) रणनीति को और मजबूत करेगा। अब तक यह मॉडल टाइटेनियम और सुपरएलॉय सामग्री, प्रिसिजन कास्टिंग, मशीनिंग और सिस्टम इंटीग्रेशन तक सीमित था। नए ऑर्डर के साथ कंपनी डिजाइन-आधारित विकास की क्षमता भी जोड़ रही है, जिससे वह भविष्य में अधिक जटिल रक्षा परियोजनाओं में भागीदारी कर सकेगी।
पीटीसी इंडस्ट्रीज के चेयरमैन और मैनेजिंग डायरेक्टर सचिन अग्रवाल ने कहा कि यह कंपनी के विकास की दिशा में एक महत्वपूर्ण पड़ाव है। उनके अनुसार यह केवल उत्पादन का ऑर्डर नहीं, बल्कि एक ऐसी जिम्मेदारी है जिसमें कंपनी को मिशन-क्रिटिकल टाइटेनियम कंपोनेंट का डिजाइन और विकास भी करना होगा। उन्होंने कहा कि भविष्य में टैंक, आर्टिलरी सिस्टम और अन्य रक्षा प्लेटफॉर्म में वजन कम करना एक प्रमुख आवश्यकता बनेगा और टाइटेनियम इस बदलाव में अहम भूमिका निभाएगा। कंपनी भारतीय रक्षा क्षेत्र में स्वदेशी क्षमताओं को मजबूत करने और वैश्विक स्तर की इंजीनियरिंग क्षमता विकसित करने के लिए प्रतिबद्ध है।
कंपनी का मानना है कि भारत में स्वदेशी रक्षा निर्माण को बढ़ावा मिलने के साथ हल्के, मजबूत और उच्च विश्वसनीयता वाले कंपोनेंट्स की मांग तेजी से बढ़ेगी। अगर यह प्रोजेक्ट सफल रहता है तो पीटीसी इंडस्ट्रीज के लिए भविष्य में भारतीय टैंक, आर्टिलरी सिस्टम और अन्य रक्षा प्लेटफॉर्म के लिए एडवांस्ड टाइटेनियम कंपोनेंट डेवलप करने के नए अवसर खुल सकते हैं। इससे आयात पर निर्भरता कम करने और देश में अत्याधुनिक रक्षा तकनीक विकसित करने के लक्ष्य को भी मजबूती मिलेगी। कंपनी ने नियामकीय फाइलिंग में बताया है कि यह ऑर्डर 2.5 साल में पूरा किया जाएगा। हालांकि डिफेंस प्रोजेक्ट की गोपनीय प्रकृति के कारण ऑर्डर की वैल्यू पब्लिक नहीं की गई है।
संबंधित समाचार
लेखकों के बारे में

अगला लेख