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इंडियन नेवी से मिला अपोलो माइक्रो सिस्टम्स को बड़ा डिफेंस प्रोजेक्ट, शेयर उछले, हर डीटेल यहां

Namita Shukla

4 min read | अपडेटेड July 22, 2026, 18:16 IST

सारांश

डिफेंस सेक्टर की इलेक्ट्रॉनिक्स एंड इंजीनियरिंग सॉल्यूशन्स देने वाली अपोलो माइक्रो सिस्टम्स लिमिटेड (AMS) को इंडियन नेवी से एक बड़ा प्रोजेक्ट मिला है। कंपनी ने एक्सचेंज फाइलिंग में आज इसकी जानकारी दी।

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अपोलो माइक्रो सिस्टम्स

अपोलो माइक्रो सिस्टम्स के शेयरों में तेजी क्यों? (Photo: AMS)

डिफेंस सेक्टर की इलेक्ट्रॉनिक्स एंड इंजीनियरिंग सॉल्यूशन्स देने वाली अपोलो माइक्रो सिस्टम्स लिमिटेड (AMS) को इंडियन नेवी से एक बड़ा प्रोजेक्ट मिला है। कंपनी ने एक्सचेंज फाइलिंग में आज इसकी जानकारी दी और इसके बाद से अपोलो माइक्रो सिस्टम्स के शेयरों में भी तेजी देखने को मिल रही है। इस खबर के बाद कंपनी के शेयर 4% के आस-पास छलांग मार गए। दोपहर 12:45 बजे के करीब अपोलो माइक्रो सिस्टम्स के शेयरों में 3.47% यानी कि 13.55 रुपये की तेजी देखी गई, जिसके बाद कंपनी के शेयर 404.10 रुपये प्रति शेयर पर ट्रेड होते दिखे। कंपनी ने बताया कि उसे सेवियर-एएसडब्ल्यू (Semi-Submersible Autonomous Vessel for Intelligence, Operations and Reconnaissance) के विकास के लिए Make-II Prototype Sanction Order (PSO) दिया गया है। इस ऑर्डर के साथ कंपनी ने पहली बार स्वायत्त समुद्री और अंडरवाटर युद्ध प्रणाली (Maritime Warfare Systems) के सेक्टर में औपचारिक एंट्री की है।

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कंपनी के मुताबिक यह प्रोजेक्ट भारत में स्वदेशी डिफेंस टेक्नोलॉजी को बढ़ावा देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है। रक्षा अधिग्रहण प्रक्रिया (डिफेंस एक्विजिशन प्रोसिजर, DAP) के तहत Make-II कैटेगरी का उद्देश्य भारतीय कंपनियों द्वारा उन्नत सैन्य प्रणालियों के स्वदेशी विकास को प्रोत्साहित करना है। प्रोटोटाइप सैन्क्शन ऑर्डर मिलने का मतलब है कि कंपनी अब इस अत्याधुनिक प्रणाली का प्रोटोटाइप विकसित करेगी और सफल परीक्षण के बाद भारतीय नौसेना द्वारा बड़े पैमाने पर खरीद की संभावना रहेगी।

क्या है SAVIOR-ASW?

SAVIOR-ASW भारत का पहला स्वदेशी सेमी-सबमर्सिबल ऑटोनॉमस वेसल है, जिसे खासतौर से एंटी-सबमरीन वारफेयर (ASW) निगरानी के लिए विकसित किया जा रहा है। यह मानव रहित, ऑटोमेटेड समुद्री प्लेटफॉर्म समुद्र की सतह के नीचे लंबे समय तक शांत तरीके से संचालन कर सकता है। इसमें लगे उन्नत हाइड्रोफोन सेंसर पनडुब्बियों और अन्य अंडरवाटर खतरों का पता लगाते हैं और रियल टाइम में नौसेना के कमांड सेंटर तक सूचनाएं पहुंचाते हैं। इस पूरे प्रोसेस में किसी व्यक्ति की मौजूदगी जहाज पर आवश्यक नहीं होती।

क्यों है यह प्रोजेक्ट इतना अहम?

कंपनी ने कहा है कि भारत के लगभग 95% बिजनेस का ट्रांसपोर्ट समुद्री मार्ग से होता है, जबकि हिंद महासागर क्षेत्र से दुनिया के लगभग 42% कच्चे तेल और 30% कंटेनर कार्गो का आवागमन होता है। हर साल करीब 1 लाख व्यापारिक जहाज इस समुद्री मार्ग से गुजरते हैं। ऐसे में समुद्री सीमाओं और रणनीतिक जलमार्गों की सुरक्षा भारत के लिए बहुत अहम है।

अपोलो माइक्रो सिस्टम्स का कहना है कि SAVIOR-ASW जैसी स्वायत्त प्रणाली पारंपरिक युद्धपोतों की तुलना में कम लागत पर लंबे समय तक निगरानी करने में सक्षम होगी। इससे महंगे युद्धपोतों को नियमित निगरानी के बजाय सामरिक और युद्ध संबंधी अभियानों में लगाया जा सकेगा। साथ ही कई स्वायत्त प्लेटफॉर्म एक साथ तैनात कर व्यापक समुद्री क्षेत्र की निगरानी भी संभव होगी।

मैनेजमेंट ने क्या कहा?

कंपनी के प्रबंध निदेशक बद्दम करुणाकर रेड्डी ने कहा कि भारतीय नौसेना से मिला यह ऑर्डर अपोलो माइक्रो सिस्टम्स के लिए एक ऐतिहासिक उपलब्धि है। उन्होंने कहा कि कंपनी सालों से स्वदेशी रक्षा इलेक्ट्रॉनिक्स और मिशन-क्रिटिकल सिस्टम विकसित कर रही है और यह प्रोजेक्ट उसी यात्रा का परिणाम है। उनके अनुसार भविष्य का युद्ध स्वायत्त, एआई आधारित और नेटवर्क-संचालित प्रणालियों का होगा और कंपनी भारत को इस क्षेत्र में अग्रणी बनाने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने यह भी बताया कि कंपनी पहले से DRDO की अंडरवाटर वारफेयर परियोजनाओं में योगदान देती रही है और इस नई प्रणाली के कई महत्वपूर्ण तकनीकी घटक भी कंपनी द्वारा विकसित किए गए हैं।

कंपनी का अनुमान है कि साल 2032 तक ग्लोबल Autonomous Maritime Systems मार्केट का साइज लगभग 10 अरब डॉलर तक पहुंच सकता है। कंपनी का मानना है कि भारत समेत कई देशों में नौसेनाएं तेजी से स्वायत्त समुद्री प्रणालियों को अपनाने की दिशा में काम कर रही हैं। कंपनी के मुताबिक AI आधारित निगरानी, स्वायत्त जहाजों के समूह (Autonomous Swarms) और कम लागत पर निरंतर समुद्री उपस्थिति भविष्य की नौसैनिक रणनीति के प्रमुख आधार बनेंगे।

(डिस्क्लेमर: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें।)

लेखकों के बारे में

Namita Shukla
Namita Shukla is a seasoned journalist with over 15 years of experience in Hindi media. She has worked with some of the most reputed news organizations, including Navbharat Times, Dainik Jagran, Aaj Tak, and Hindustan Times Hindi. Throughout her career, Namita has reported on a wide range of beats such as national affairs, sports, business, and entertainment, bringing clarity and depth to her reporting. In addition to her journalistic work, she is a certified fact-checker by both Google and Meta, underscoring her commitment to accuracy and ethical journalism in the digital age.

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