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4 min read | अपडेटेड October 01, 2026, 09:53 IST
सारांश
PM-DHARA स्कीम के तहत राज्यों के Intra-State Transmission System (InSTS) को मजबूत किया जाएगा। सरकार का लक्ष्य इसके जरिए राज्यों में 135 GW तक की रिन्यूएबल एनर्जी को ग्रिड में पहुंचाने की क्षमता तैयार करना है। यह योजना भारत के 2030 तक 500 GW रिन्यूएबल एनर्जी क्षमता के लक्ष्य के लिहाज से भी अहम है।
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आने वाले वर्षों में ट्रांसमिशन लाइन, सब-स्टेशन, ट्रांसफॉर्मर, स्विचगियर और दूसरे ग्रिड उपकरणों की मांग बढ़ सकती है।
केंद्र सरकार ने बुधवार को ₹1.86 लाख करोड़ की PM-DHARA Scheme को मंजूरी दी है। इस योजना का पूरा नाम PM-Developing Harmonized and Accelerated Renewable-energy Access है। इसका मकसद देश के राज्यों के भीतर बिजली ट्रांसमिशन नेटवर्क को मजबूत करना और रिन्यूएबल एनर्जी की बिजली को ग्रिड तक पहुंचाने की क्षमता बढ़ाना है। इसी वजह से आज 1 अक्टूबर को Adani Energy Solutions, GE Vernova T&D India, Hitachi Energy India और CG Power जैसे शेयरों में एक्शन दिख रहा है। हालांकि Power Grid Corporation of India के शेयरों पर दबाव है।
आज के कारोबार में Adani Energy Solutions का शेयर 3.55 फीसदी उछलकर 1359.20 रुपये के भाव पर पहुंच गया है। GE Vernova के शेयरों में भी 3.31 फीसदी की तेजी है। इसके अलावा CG Power में करीब 3 फीसदी और Hitachi Energy India में 1.80 फीसदी की बढ़त देखी गई। इसके अलावा Transformers & Rectifiers India के शेयर 9 फीसदी से ज्यादा उछल गए हैं। दूसरी तरफ Power Grid Corporation of India में करीब 1 फीसदी की गिरावट थी।
PM-DHARA स्कीम के तहत राज्यों के Intra-State Transmission System (InSTS) को मजबूत किया जाएगा। सरकार का लक्ष्य इसके जरिए राज्यों में 135 GW तक की रिन्यूएबल एनर्जी को ग्रिड में पहुंचाने की क्षमता तैयार करना है। यह योजना भारत के 2030 तक 500 GW रिन्यूएबल एनर्जी क्षमता के लक्ष्य के लिहाज से भी अहम है।
इसका सीधा मतलब यह है कि आने वाले वर्षों में ट्रांसमिशन लाइन, सब-स्टेशन, ट्रांसफॉर्मर, स्विचगियर और दूसरे ग्रिड उपकरणों की मांग बढ़ सकती है। इससे इस पूरे सेक्टर से जुड़ी कंपनियों के लिए नए प्रोजेक्ट और ऑर्डर के अवसर बन सकते हैं।
योजना का एक बड़ा हिस्सा बैटरी एनर्जी स्टोरेज सिस्टम (BESS) से जुड़ा है। सरकार ने 50 GWh बैटरी स्टोरेज सिस्टम के लिए ₹50,000 करोड़ का प्रावधान किया है। बैटरी स्टोरेज इसलिए अहम है क्योंकि सोलर और विंड पावर लगातार एक जैसी मात्रा में बिजली नहीं बनाते। धूप और हवा की उपलब्धता के हिसाब से उत्पादन में उतार-चढ़ाव होता रहता है।
ऐसे में बैटरी में अतिरिक्त बिजली स्टोर करके जरूरत के समय उसका इस्तेमाल किया जा सकता है। इससे ग्रिड को ज्यादा फ्लेक्सिबल बनाने, पीक आवर्स में बिजली उपलब्ध कराने और रिन्यूएबल एनर्जी की अनियमितता को संभालने में मदद मिल सकती है।
पूरी योजना का प्रोजेक्ट आउटले ₹1,86,405 करोड़ है। इसमें ₹1,36,378 करोड़ Intra-State Transmission Systems के विकास के लिए और ₹50,000 करोड़ BESS के लिए रखे गए हैं। योजना में केंद्र सरकार की कुल वित्तीय सहायता ₹54,082 करोड़ होगी।
निवेशकों के लिए यह समझना जरूरी है कि सरकार की बड़ी योजना का मतलब यह नहीं है कि हर कंपनी को सीधे ऑर्डर या तुरंत वित्तीय फायदा मिलेगा। वास्तविक लाभ इस बात पर निर्भर करेगा कि किस कंपनी को कितने प्रोजेक्ट मिलते हैं, उसकी भागीदारी कितनी रहती है और आने वाले वर्षों में ऑर्डर किस तरह सामने आते हैं। इसलिए निवेशक केवल योजना की खबर के आधार पर फैसला लेने के बजाय कंपनियों के ऑर्डर बुक, वैल्यूएशन और वित्तीय प्रदर्शन को भी देख सकते हैं।
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