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Ola Electric: सिर्फ कमजोर बिक्री नहीं, ऑडिटर के इस बड़े सवाल ने भी बढ़ाई निवेशकों की चिंता

Shubham Singh Thakur

3 min read | अपडेटेड August 10, 2026, 13:08 IST

सारांश

जून तिमाही में Ola Electric का प्रदर्शन मिला-जुला रहा। कंपनी का नेट लॉस पिछले साल की समान तिमाही के मुकाबले कम होकर ₹336 करोड़ पर आ गया। इसके EBITDA लॉस में भी सुधार देखने को मिला। हालांकि, कंपनी के लिए सबसे बड़ी चिंता रेवेन्यू है।

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Ola Electric

जून तिमाही में Ola Electric का रेवेन्यू सालाना आधार पर 45% घटकर ₹455 करोड़ रुपये पर आ गया।

Ola Electric Mobility के शेयरों में आज 10 अगस्त को बिकवाली का जबरदस्त दबाव है। यह शेयर आज BSE पर करीब 5 फीसदी तक टूटकर 38.58 रुपये प्रति शेयर के भाव पर आ गया। दरअसल, कंपनी के जून तिमाही (Q1 FY27) के नतीजे कमजोर रहे। इसके साथ ही ऑडिटर की एक टिप्पणी ने भी निवेशकों की चिंता बढ़ाई है। आज की गिरावट के साथ कंपनी का मार्केट कैप घटकर 18,509 करोड़ रुपये पर आ गया।

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कैसे रहे तिमाही नतीजे

जून तिमाही में ओला इलेक्ट्रिक का प्रदर्शन मिला-जुला रहा। कंपनी का नेट लॉस पिछले साल की समान तिमाही के मुकाबले कम होकर ₹336 करोड़ पर आ गया। इसके EBITDA लॉस में भी सुधार देखने को मिला। हालांकि, कंपनी के लिए सबसे बड़ी चिंता रेवेन्यू है।

जून तिमाही में कंपनी का रेवेन्यू सालाना आधार पर 45% घटकर ₹455 करोड़ रुपये पर आ गया। पिछले साल की समान तिमाही में यह आंकड़ा 828 करोड़ रुपये था। यानी घाटा कम होने के बावजूद कारोबार की टॉपलाइन पर दबाव बना हुआ है।

ऑडिटर के इस सवाल ने बढ़ाई चिंता

ऑडिटर ने ओला इलेक्ट्रिक की एक सब्सिडियरी द्वारा ₹57 करोड़ की पेनल्टी प्रोविजन को वापस लेने पर सवाल उठाया है। कंपनी के ऑडिटर के मुताबिक, जून तिमाही के दौरान Ola Electric की सब्सिडियरी OCTPL ने ₹57 करोड़ की पूरी पेनल्टी प्रोविजन को रिवर्स कर दिया। यानी पहले जिस संभावित जुर्माने के लिए कंपनी ने पैसा अलग रखा था, उसे अब वापस कंपनी के खातों में जोड़ दिया गया।

सीएनबीसी टीवी-18 की रिपोर्ट के मुताबिक कंपनी ने यह कदम इसलिए उठाया क्योंकि उसने भारी उद्योग मंत्रालय (MHI) से निवेश की तय शर्त पूरी करने के लिए अतिरिक्त समय और संबंधित पेनल्टी से छूट मांगी है। हालांकि, 30 जून 2026 तक मंत्रालय से इस अनुरोध को मंजूरी नहीं मिली थी।

ऑडिटर ने कहा कि जब तक मंत्रालय की मंजूरी नहीं मिलती, तब तक यह तय करना संभव नहीं है कि ₹57 करोड़ की प्रोविजन को वापस लेना सही था या नहीं। इस वजह से यह मामला निवेशकों के लिए चिंता का विषय बन गया है।

PLI स्कीम से जुड़ा है पूरा मामला

Ola Electric को करीब 4 साल पहले सरकार की प्रोडक्शन लिंक्ड इंसेंटिव (PLI) स्कीम के तहत चुना गया था। इसके तहत कंपनी को अपनी बैटरी सेल मैन्युफैक्चरिंग क्षमता के हिसाब से तय समय में निवेश करना था।

कंपनी पर हर GWh क्षमता के लिए ₹225 करोड़ निवेश करने की शर्त थी और इसे दो साल के भीतर पूरा करना था। समय पर शर्त पूरी नहीं होने के कारण मार्च तिमाही में पेनल्टी के लिए प्रोविजन बनाया गया था। लेकिन जून तिमाही में कंपनी ने इस प्रोविजन को पूरी तरह रिवर्स कर दिया और नई प्रोविजन नहीं बनाई।

कैसा रहा है शेयरों का प्रदर्शन

ओला इलेक्ट्रिक के शेयर लंबे समय से दबाव में हैं। पिछले एक महीने में इसके शेयरों का प्रदर्शन लगभग फ्लैट रहा है। हालांकि पिछले 6 महीने में इसने 28 फीसदी का रिटर्न दिया है। इस साल अब तक इसके शेयर करीब 7 फीसदी चढ़े हैं। कंपनी का आईपीओ अगस्त 2024 में 72-76 रुपये प्रति शेयर के प्राइस बैंड पर आया था। यह शयर अपने इश्यू प्राइस से अभी भी करीब 50 फीसदी नीचे है।

(डिस्क्लेमर: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें।)

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