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3 min read | अपडेटेड May 15, 2026, 15:45 IST
सारांश
ओला इलेक्ट्रिक मोबिलिटी लिमिटेड ने अपने बिजनेस को विस्तार देने के लिए 2,000 करोड़ रुपये के निवेश को मंजूरी दी है। यह पैसा ओला इलेक्ट्रिक टेक्नोलॉजीज और ओला सेल टेक्नोलॉजीज में लगाया जाएगा। कंपनी का लक्ष्य बैटरी सेल उत्पादन और इलेक्ट्रिक गाड़ियों की मैन्युफैक्चरिंग क्षमता को कई गुना बढ़ाना है।
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ओला इलेक्ट्रिक के भविष्य के प्रोजेक्ट्स और मैन्युफैक्चरिंग यूनिट्स के लिए हुआ फंड का ऐलान। Image: Shutterstock
ओला इलेक्ट्रिक मोबिलिटी लिमिटेड ने इलेक्ट्रिक व्हीकल मार्केट में अपनी बादशाहत कायम करने के लिए एक बहुत बड़ा निवेश प्लान तैयार किया है। कंपनी के बोर्ड ने अपनी दो पूरी तरह से स्वामित्व वाली सहायक कंपनियों में कुल 2,000 करोड़ रुपये के निवेश को मंजूरी दे दी है। यह कंपनियां ओला इलेक्ट्रिक टेक्नोलॉजीज और ओला सेल टेक्नोलॉजीज हैं। यह फैसला ऐसे समय में आया है जब भारत में इलेक्ट्रिक गाड़ियों की मांग तेजी से बढ़ रही है और ओला इस मार्केट में खुद को एक लीडर के तौर पर स्थापित करना चाहती है। इस निवेश से कंपनी की प्रोडक्शन कैपेसिटी और ऑपरेशनल परफॉर्मेंस में काफी सुधार होने की उम्मीद है।
कंपनी ने इस 2,000 करोड़ रुपये के भारी भरकम निवेश को अपनी बिजनेस जरूरत के हिसाब से दो हिस्सों में बांटा है। इसमें से सबसे बड़ा हिस्सा यानी 1,500 करोड़ रुपये ओला इलेक्ट्रिक टेक्नोलॉजीज (OET) में लगाए जाएंगे। यह निवेश 150 करोड़ कंपलसरी कनवर्टिबल प्रेफरेंस शेयर्स के जरिए किया जाएगा। ओला इलेक्ट्रिक टेक्नोलॉजीज का मुख्य काम इलेक्ट्रिक व्हीकल की मैन्युफैक्चरिंग और पूरी ईवी वैल्यू चेन को संभालना है। वहीं बाकी बचे 500 करोड़ रुपये ओला सेल टेक्नोलॉजीज (OCT) में डाले जाएंगे। यह पैसा 50 करोड़ कंपलसरी कनवर्टिबल प्रेफरेंस शेयर्स के माध्यम से कंपनी को मिलेगा।
ओला सेल टेक्नोलॉजीज में होने वाला 500 करोड़ रुपये का निवेश कंपनी के लिए काफी अहम माना जा रहा है। इस कंपनी का पूरा फोकस एडवांस बैटरी और सेल की मैन्युफैक्चरिंग, असेंबली और उनके एक्सपोर्ट पर है। इलेक्ट्रिक गाड़ियों की कुल लागत में बैटरी का हिस्सा सबसे ज्यादा होता है। अगर ओला खुद के बैटरी सेल बनाने में पूरी तरह कामयाब रहती है, तो इससे गाड़ियों की मैन्युफैक्चरिंग लागत कम होगी और ऑपरेशन से रेवेन्यू भी बेहतर होगा। कंपनी का लक्ष्य वर्टिकल इंटीग्रेशन के जरिए बैटरी से लेकर गाड़ी की असेंबली तक का सारा काम खुद के कंट्रोल में रखना है। इससे कंपनी की दूसरे वेंडर्स पर निर्भरता कम होगी और फ्यूचर में नेट प्रॉफिट पर भी इसका बहुत अच्छा असर दिखेगा।
ओला इलेक्ट्रिक टेक्नोलॉजीज में 1,500 करोड़ रुपये डालने से कंपनी की गाड़ियों के उत्पादन की क्षमता को बहुत बड़ा सहारा मिलेगा। ओला पहले से ही इलेक्ट्रिक स्कूटर मार्केट में अपनी बड़ी पहचान बना चुकी है और अब इस फंड का इस्तेमाल करके वह अपने मैन्युफैक्चरिंग प्लांट और टेक्नोलॉजी को और ज्यादा आधुनिक बनाएगी। कंपनी का मानना है कि इस फंड के इंप्लिमेंटेशन के बाद प्रोडक्शन कैपेसिटी में बड़ी बढ़ोतरी होगी। इससे ग्राहकों को समय पर गाड़ियों की डिलीवरी मिल सकेगी और कंपनी के ऑपरेशन और भी ज्यादा सुचारू रूप से चल सकेंगे।
कंपनी ने इस पूरे निवेश प्लान को पूरा करने के लिए एक निश्चित समय सीमा भी तय की है। ओला इलेक्ट्रिक मोबिलिटी लिमिटेड का लक्ष्य है कि यह पूरा कैपिटल इंफ्यूजन 14 मई 2027 तक पूरा कर लिया जाए। इस निवेश के बाद भी दोनों कंपनियों पर ओला इलेक्ट्रिक का 100 पर्सेंट कंट्रोल बना रहेगा। फिलहाल शेयर बाजार में ओला इलेक्ट्रिक के शेयर की कीमत 35.70 रुपये के आसपास चल रही है, जिसमें आज मामूली गिरावट देखी गई है।
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