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Power से Insurance तक, NSE ने लॉन्च किए 11 नए सेक्टोरल इंडेक्स, आपको इससे क्या होगा फायदा?

Shubham Singh Thakur

2 min read | अपडेटेड June 17, 2026, 13:14 IST

सारांश

NSE का कहना है कि नए इंडेक्स पारंपरिक सेक्टर्स के साथ-साथ तेजी से बढ़ रहे नए सेक्टर्स को भी कवर करेंगे। इससे निवेशकों और मार्केट एक्सपर्ट्स को किसी खास सेक्टर के प्रदर्शन को समझने और ट्रैक करने में आसानी होगी।

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NSE के ये नए इंडेक्स भारत की बदलती आर्थिक संरचना को भी दर्शाते हैं।

नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) की इंडेक्स सेवाएं देने वाली इकाई NSE Indices Limited ने 11 नए सेक्टोरल इंडेक्स लॉन्च किए हैं। इन नए इंडेक्स के जरिए शेयर बाजार के अलग-अलग सेक्टर्स की प्रदर्शन को बेहतर तरीके से ट्रैक किया जा सकेगा। इन 11 नए इंडेक्स के जुड़ने के बाद NSE के कुल सेक्टोरल इंडेक्स की संख्या बढ़कर 34 हो गई है। इससे भारतीय अर्थव्यवस्था के अधिक सेक्टर्स को इंडेक्स के दायरे में शामिल किया जा सकेगा।

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ये हैं 11 नए इंडेक्स

नए लॉन्च किए गए इंडेक्स में Nifty Power, Nifty Capital Goods, Nifty Telecommunications, Nifty Construction, Nifty Consumer Services, Nifty Commercial & Transport Services, Nifty Retail, Nifty Hospitals, Nifty NBFC, Nifty Housing Finance और Nifty Insurance शामिल हैं।

निवेशकों और फंड मैनेजर्स के लिए उपयोगी

NSE का कहना है कि नए इंडेक्स पारंपरिक सेक्टर्स के साथ-साथ तेजी से बढ़ रहे नए सेक्टर्स को भी कवर करेंगे। इससे निवेशकों और मार्केट एक्सपर्ट्स को किसी खास सेक्टर के प्रदर्शन को समझने और ट्रैक करने में आसानी होगी।

इन नए इंडेक्स की मदद से निवेशक, विश्लेषक और फंड मैनेजर किसी खास सेक्टर के प्रदर्शन को पहले से ज्यादा सटीक तरीके से ट्रैक कर सकेंगे। इससे यह समझना आसान होगा कि कौन-सा उद्योग बेहतर प्रदर्शन कर रहा है और किस सेक्टर में निवेश के अवसर मौजूद हैं। नए इंडेक्स फंड मैनेजरों को अपने पोर्टफोलियो की तुलना अधिक सटीक बेंचमार्क से करने में मदद करेंगे।

ETF और इंडेक्स फंड को मिलेगा बढ़ावा

NSE का मानना है कि ये नए इंडेक्स भविष्य में ETF (एक्सचेंज ट्रेडेड फंड), इंडेक्स फंड और अन्य पैसिव निवेश उत्पादों के लिए बेंचमार्क का काम करेंगे। यानी भविष्य में इन सेक्टर्स पर आधारित नए निवेश उत्पाद भी बाजार में आ सकते हैं।

भारत की बदलती अर्थव्यवस्था की झलक

ये नए इंडेक्स भारत की बदलती आर्थिक संरचना को भी दर्शाते हैं। इनमें पावर, कैपिटल गुड्स और कंस्ट्रक्शन जैसे पारंपरिक सेक्टर्स के साथ रिटेल, कंज्यूमर सर्विसेज, हॉस्पिटल्स और वित्तीय सेवाओं जैसे तेजी से बढ़ते क्षेत्रों को भी शामिल किया गया है। इससे भारतीय पूंजी बाजार को और अधिक व्यापक तथा परिपक्व बनाने में मदद मिलेगी।

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