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  1. Lumino Industries के शेयर क्या आए आपके खाते में, लिस्टिंग कब, क्या हैं रिस्क फैक्टर्स?

मार्केट न्यूज़

Lumino Industries के शेयर क्या आए आपके खाते में, लिस्टिंग कब, क्या हैं रिस्क फैक्टर्स?

Namita Shukla

4 min read | अपडेटेड September 02, 2026, 08:53 IST

सारांश

लुमिनो इंडस्ट्रीज आईपीओ का अलॉटमेंट फाइनलाइज हो गया है, क्या आपको इसके शेयर मिले हैं? कंपनी का बिजनेस कितना बड़ा है इस आईपीओ में रिस्क फैक्टर्स क्या हैं, चलिए एक नजर डालते हैं।

लुमिनो इंडस्ट्रीज

लुमिनो इंडस्ट्रीज आईपीओ की लिस्टिंग से क्या उम्मीदें? (Photo: Lumino Industries)

लुमिनो इंडस्ट्रीज आईपीओ का अलॉटमेंट 1 सितंबर देर रात तक फाइनलाइज हो गया है। अगर आपको भी इसके शेयर अलॉट हुए हैं, तो आपको भी अब इसकी लिस्टिंग का इंतजार होगा। दमदार सब्सक्रिप्शन के बाद इसके शेयरों का अलॉटमेंट पूरा हो चुका है और अब नजर इसकी लिस्टिंग पर है। लुमिनो इंडस्ट्रीज लिमिटेड के शेयर 3 सितंबर यानी कि गुरुवार को मार्केट में एंट्री करेंगे, लेकिन उससे पहले चलिए एक नजर इस आईपीओ से जुड़ी तमाम डीटेल्स पर डाल लेते हैं।

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लुमिनो इंडस्ट्रीज आईपीओ की डीटेल्स

लुमिनो इंडस्ट्रीज आईपीओ 700 करोड़ रुपये का बुक-बिल्ड इश्यू है। इस इश्यू में 500 करोड़ रुपये के 6.10 करोड़ नए शेयरों का इश्यू और 200 करोड़ रुपये के 2.44 करोड़ शेयरों की बिक्री का ऑफर (OFS) शामिल है। Lumino Industries IPO के लिए बोली 27 अगस्त, 2026 को शुरू हुई थी और 31 अगस्त, 2026 को बोली लगाने का आखिरी मौका था। Lumino Industries IPO के लिए शेयरों का अलॉटमेंट 1 सितंबर, 2026 को तय किया गया। Lumino Industries IPO NSE और BSE पर लिस्ट होगा और इसकी संभावित लिस्टिंग डेट 3 सितंबर, 2026 तय की गई है।

Lumino Industries IPO के लिए फाइनल इश्यू प्राइस 82 रुपये प्रति शेयर तय किया गया है। एप्लीकेशन के लिए लॉट साइज 182 शेयर है। एक इंडिविजुअल रिटेल इन्वेस्टर के लिए जरूरी कम से कम निवेश की रकम 14,924 रुपये (182 शेयर) रखी गई।

कैसा रहा था लुमिनो इंडस्ट्रीज आईपीओ का सब्सक्रिप्शन?

लुमिनो इंडस्ट्रीज आईपीओ 124.02 गुना सब्सक्राइब हुआ था। 31 अगस्त, 2026 को शाम 6:53:37 बजे (तीसरे दिन) तक, इस पब्लिक इश्यू को रिटेल कैटेगरी में 40.27 गुना, QIB (एंकर को छोड़कर) कैटेगरी में 232.79 गुना और NII कैटेगरी में 185.21 गुना सब्सक्रिप्शन मिल था।

क्या करती है कंपनी?

2005 में बनी लुमिनो इंडस्ट्रीज लिमिटेड भारत की एक इंटीग्रेटेड इंजीनियरिंग, प्रोक्योरमेंट और कंस्ट्रक्शन (EPC) कंपनी है। यह कंपनी पावर ट्रांसमिशन और डिस्ट्रीब्यूशन इंडस्ट्री के लिए कंडक्टर, पावर केबल, इलेक्ट्रिकल वायर और खास प्रोडक्ट बनाने और सप्लाई करने का काम करती है। कंपनी ट्रांसमिशन और डिस्ट्रीब्यूशन लाइनों में इस्तेमाल होने वाले हाई-टेम्परेचर लो-सैग (HTLS) कंडक्टर भी बनाती है।

कंपनी दो मुख्य सेगमेंट में काम करती है- मैनुफैक्चरिंग और EPC। इसके मैनुफैक्चरिंग बिजनेस में एल्युमीनियम कंडक्टर, पावर केबल और इलेक्ट्रिकल वायर शामिल हैं, जबकि इसके EPC बिजनेस में पावर ट्रांसमिशन और डिस्ट्रीब्यूशन, EHV सबस्टेशन, HTLS री-कंडक्टरिंग, रेलवे इलेक्ट्रिफिकेशन, सोलर पावर प्रोजेक्ट और वॉटर मैनेजमेंट प्रोजेक्ट शामिल हैं।

लुमिनो इंडस्ट्रीज अपने प्रोडक्ट भारत की बड़ी EPC कंपनियों को सप्लाई करती है और इंटरनेशनल ग्राहकों को भी सर्विस देती है। इनमें USA, माली, बुर्किना फासो, कोटे डी आइवर, नेपाल, बांग्लादेश, केन्या, घाना, रवांडा और इथियोपिया जैसे देशों की सरकारी बिजली कंपनियां, पब्लिक एंटरप्राइज और बिजली बोर्ड शामिल हैं।

क्या हैं इस आईपीओ के रिस्क फैक्टर्स?

1- कंपनी पर कर्ज का दबावः कैपेसिटी एक्सपेंशन और वर्किंग कैपिटल की जरूरतों के कारण कंपनी पर कर्ज दबाव बढ़ा है। आईपीओ से मिलने वाले 500 करोड़ रुपये के फ्रेश इश्यू का एक बड़ा उद्देश्य कर्ज चुकाना है। अगर ऑपरेटिंग कैश फ्लो कमजोर रहता है तो वित्तीय दबाव बना रह सकता है।

2- कच्चे माल की कीमतों में उतार-चढ़ावः पावर केबल्स और कंडक्टर्स के बिजनेस में कच्चे माल की कीमतें महत्वपूर्ण हैं। कॉपर, एलुमीनियम आदि की कीमतों में तेज बदलाव से कंपनी के मार्जिन प्रभावित हो सकते हैं।

3- वर्किंग कैपिटल की जरूरत ज्यादाः ईपीसी और मैनुफैक्चरिंग बिजनेस में पेमेंट साइकल लंबा होने पर पैसा प्राप्तियों में फंस सकता है। इससे कैश फ्लो और बॉरोइंग रिक्वायरमेंट्स पर दबाव पड़ सकता है।

4- कुछ बड़े ग्राहकों पर निर्भरताः उपलब्ध ऑफर-डॉक्यूमेंट्स के डेटा के मुताबिक FY26 में टॉप 10 कस्टमर्स का रेवेन्यू में हिस्सा करीब 46.52% था। किसी बड़े ग्राहक के ऑर्डर घटाने या भुगतान में समस्या आने से कारोबार प्रभावित हो सकता है।

इसके अलावा सरकारी संस्थाओं पर निर्भरता, बढ़ती प्रतिद्वंद्विता और मैनुफैक्चरिंग बिजनेस पर ज्यादा निर्भरता जैसे कुछ अन्य रिस्क फैक्टर्स भी हैं।

(डिस्क्लेमर: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें।)

लेखकों के बारे में

Namita Shukla
Namita Shukla is a seasoned journalist with over 15 years of experience in Hindi media. She has worked with some of the most reputed news organizations, including Navbharat Times, Dainik Jagran, Aaj Tak, and Hindustan Times Hindi. Throughout her career, Namita has reported on a wide range of beats such as national affairs, sports, business, and entertainment, bringing clarity and depth to her reporting. In addition to her journalistic work, she is a certified fact-checker by both Google and Meta, underscoring her commitment to accuracy and ethical journalism in the digital age.

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