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5 min read | अपडेटेड September 01, 2026, 11:45 IST
सारांश
जियो पॉलिटिकल टेंशन का सीधा असर आज भी क्रूड ऑयल के भाव पर दिख रहा है। ब्रेंट क्रूड ऑयल की कीमत में आज 3.52 फीसदी की तेजी है और यह 91.50 डॉलर प्रति बैरल के आसपास पहुंच गया है। भारत अपने ज्यादातर तेल जरूरतों के लिए आयात पर निर्भर है।

पिछले कुछ कारोबारी दिनों से विदेशी निवेशक भारतीय बाजार में भारी बिकवाली कर रहे हैं।
भारतीय शेयर बाजार में आज 1 सितंबर को लगातार दूसरे कारोबारी दिन कमजोरी नजर आई। हालांकि बाजार ने जल्द ही मजबूत वापसी की। आज शुरुआती कारोबार में BSE Sensex में करीब 195 अंकों की गिरावट देखी गई और यह 76,764.26 के स्तर तक लुढ़क गया। दूसरी तरफ Nifty 50 भी 71 अंक लुढ़ककर 24,009.50 के लेवल पर ट्रेड करता दिखा। रिपोर्ट लिखे जाने के समय सेंसेक्स में करीब 200 अंकों की तेजी थी। वहीं निफ्टी भी 44 अंक उछल गया था। अमेरिका और ईरान के बीच तनाव बरकरार है, जिसके चलते आज क्रूड ऑयल का भाव फिर से उछल गया है। यहां हम समझेंगे कि बाजार में आज के उतार-चढ़ाव के लिए कौन से फैक्टर्स जिम्मेदार हैं।
अप्रैल-जून तिमाही में भारत की अर्थव्यवस्था 7.8 फीसदी की दर से बढ़ी है। जून तिमाही की GDP ग्रोथ रेट जनवरी-मार्च में दर्ज 8.6 फीसदी से कम है, लेकिन पिछले साल इसी अवधि यानी 2025-26 की पहली तिमाही में हुई 6.9 प्रतिशत की बढ़ोतरी से ज्यादा है। यह भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के 7 फीसदी के अनुमान से भी ज्यादा है। पश्चिम एशिया में तनाव के बावजूद GDP के आंकड़े मजबूत हैं।
बाजार में रिकवरी के पीछे वैल्यू बाइंग भी एक बड़ी वजह है। सोमवार को BSE Sensex में 307.24 अंकों की गिरावट थी और यह 76957.27 के स्तर पर आ गया। दूसरी तरफ Nifty 50 भी 95.25 अंक लुढ़ककर 24080.40 के लेवल पर बंद हुआ था। इसके बाद आज शुरुआती कारोबार में भी बाजार पर दबाव दिखा। लगातार बिकवाली के बाद निवेशकों ने बेहतर शेयरों को कम कीमत पर खरीदना शुरू किया, जिससे बाजार को मजबूती मिली।
अमेरिका और ईरान के बीच तनाव बढ़ता जा रहा है। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने जॉर्डन में अमेरिकी बेस पर ईरान के हमलों का जवाब देने का वादा किया और कहा, "हम उन पर ज़ोरदार हमला करेंगे"। बता दें कि हाल ही में अमेरिकी सेना ने स्ट्रेट ऑफ हॉर्मूज के पास Larak Island पर ईरान के दो रॉकेट लॉन्च सिस्टम पर हमला किया। इसके जवाब में ईरान ने भी जॉर्डन में अमेरिकी बेस पर बैलिस्टिक मिसाइल दागे।
ईरान के सरकारी मीडिया का कहना है कि Larak Island पर अमेरिकी हमले में तीन लोग मारे गए और कई ईरानी लड़ाके व आम नागरिक घायल हो गए। दूसरी तरफ यूनाइटेड किंगडम मैरीटाइम ट्रेड ऑपरेशंस (UKMTO) ने रिपोर्ट किया है कि स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से बाहर निकलते समय ओमान के खसाब के पास एक तेल टैंकर पर तीन अज्ञात मिसाइलों या गोलों से हमला किया गया है। इन खबरों ने बाजार की चिंता बढ़ा दी।
जियो पॉलिटिकल टेंशन का सीधा असर आज भी क्रूड ऑयल के भाव पर दिख रहा है। ब्रेंट क्रूड ऑयल की कीमत में आज 3.52 फीसदी की तेजी है और यह 91.50 डॉलर प्रति बैरल के आसपास पहुंच गया है। भारत अपने ज्यादातर तेल जरूरतों के लिए आयात पर निर्भर है। ऐसे में क्रूड ऑयल की कीमत बढ़ना भारत के लिए अच्छी खबर नहीं है। इससे महंगाई का खतरा भी बढ़ता है।
पिछले कुछ कारोबारी दिनों से विदेशी निवेशक भारतीय बाजार में भारी बिकवाली कर रहे हैं। 31 अगस्त को FIIs ने 7985.88 करोड़ रुपये के शेयर बेच दिए। इसके अलावा 28 अगस्त को 5,039.80 करोड़ रुपये और 27 अगस्त को 298.26 करोड़ रुपये की बिकवाली देखी गई थी। विदेशी निवेशकों की बिकवाली ने बाजार का सेंटीमेंट खराब किया है। इसके साथ ही इसका असर रुपये की वैल्यू पर भी पड़ता है।
फेडरल रिजर्व के चेयरमैन केविन वॉर्श के जैक्सन होल भाषण के बाद बाजार में यह उम्मीद काफी बढ़ गई है कि अमेरिकी फेडरल रिजर्व जल्द ही ब्याज दर बढ़ा सकता है। भाषण से पहले बाजार को सितंबर की बैठक में दर बढ़ने की संभावना कम लग रही थी, लेकिन अब यह संभावना काफी बढ़ गई है।
वॉर्श ने माना कि हाल में महंगाई के आंकड़े कुछ नरम रहे हैं, लेकिन उनके मुताबिक इससे यह साबित नहीं होता कि महंगाई की मूल प्रवृत्ति में पर्याप्त सुधार हो गया है। उनका कहना है कि फेड को यह भरोसा होना चाहिए कि महंगाई लगातार 2% के लक्ष्य की ओर बढ़ रही है। अगर ऐसा नहीं होता है, तो फेड को महंगाई पर काबू पाने के लिए और काम करना पड़ सकता है।
वॉर्श के बयान के बाद सितंबर की बैठक में ब्याज दर बढ़ने की संभावना सोमवार तक बढ़कर 66.1% हो गई। यह भाषण से पहले की संभावना के मुकाबले लगभग दोगुनी है। यानी बाजार अब मानने लगा है कि सितंबर में दर बढ़ सकती है। ब्याज दर बढ़ने से आमतौर पर बाजार में गिरावट आती है।
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