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  1. भारतीय रेलवे की रफ्तार बढ़ाएगी जुपिटर वैगन्स, कंपनी को मिला ₹1,140 करोड़ का बंपर ऑर्डर, शेयरों में तेजी

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भारतीय रेलवे की रफ्तार बढ़ाएगी जुपिटर वैगन्स, कंपनी को मिला ₹1,140 करोड़ का बंपर ऑर्डर, शेयरों में तेजी

Namita Shukla

3 min read | अपडेटेड October 29, 2026, 10:14 IST

सारांश

जुपिटर वैगन्स के मैनेजिंग डायरेक्टर विवेक लोहिया के अनुसार, भारतीय रेलवे माल ढुलाई क्षमता का तेजी से विस्तार कर रहा है। उन्होंने बताया कि कंपनी ने वैगन निर्माण से जुड़ी सप्लाई चेन में अपनी पकड़ मजबूत की है।

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जुपिटर वैगन्स

जुपिटर वैगन्स को मिला धांसू ऑर्डर, शेयरों में तेजी (Photo: Shutterstock)

आज शेयर मार्केट खुलते ही जुपिटर वैगन्स लिमिटेड के स्टॉक्स में काफी तेजी देखने को मिली। सुबह शेयरों में 7.5% से ज्यादा यानी कि करीब 14 रुपये की तेजी देखने को मिली, जिसके बाद शेयर 195 रुपये प्रति शेयर तक पहुंच गए। भारतीय रेलवे के माल ढुलाई नेटवर्क को मजबूत करने की दिशा में जुपिटर वैगन्स लिमिटेड को एक अहम कामयाबी मिली है। कंपनी ने 29 अक्टूबर 2026 को घोषणा की कि उसे रेल मंत्रालय के रेलवे बोर्ड से 2,583 मालवाहक वैगनों की मैनुफैक्चरिंग और सप्लाई का ऑर्डर मिला है। इस ऑर्डर की कुल कीमत टैक्स सहित 1,140 करोड़ रुपये है। यह उपलब्धि कंपनी की मैनुफैक्चरिंग कैपेसिटी और भारतीय रेलवे के वैगन खरीद कार्यक्रम में उसके योगदान को दर्शाती है।

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दो प्रकार के वैगनों की होगी सप्लाई

कंपनी को मिले इस ऑर्डर में BOXNHL और BOXNS कैटेगरी के कुल 2,583 वैगन शामिल हैं। इन वैगनों का उपयोग माल ढुलाई व्यवस्था को बेहतर बनाने में किया जाएगा। रेलवे की बढ़ती माल परिवहन जरूरतों को देखते हुए वैगनों की उपलब्धता और क्षमता में विस्तार महत्वपूर्ण माना जा रहा है। इस तरह की खरीद से देश के विभिन्न क्षेत्रों में माल की आवाजाही को अधिक प्रभावी बनाने के प्रयासों को समर्थन मिलता है।

प्राइवेट सेक्टर से भी मजबूत मांग

जुपिटर वैगन्स का कारोबार केवल भारतीय रेलवे तक सीमित नहीं है। कंपनी के अनुसार, निजी माल परिवहन ऑपरेटरों, वैगन लीजिंग कंपनियों और बुनियादी सेक्टर से जुड़े ग्राहकों के बीच भी उसके उत्पादों की मांग मजबूत बनी हुई है। सरकारी और निजी क्षेत्र, दोनों से मिलने वाले ऑर्डर कंपनी के कारोबार को विविधता प्रदान करते हैं। इससे कंपनी को अपने ऑर्डर बुक और भविष्य की कारोबारी संभावनाओं को बेहतर ढंग से संभालने में मदद मिल सकती है।

कंपनी को फाइनेंशियल ईयर 2026-27 की चौथी तिमाही में लगभग 2,000 करोड़ रुपये के अतिरिक्त ऑर्डर मिलने की भी उम्मीद है। हालांकि, यह कंपनी का अनुमान है, न कि पहले से सुनिश्चित ऑर्डर। इसके अलावा, रेल मंत्रालय ने हाल ही में 5,800 BOBRN वैगनों की खरीद के लिए निविदा जारी की है। इससे वैगन निर्माण क्षेत्र में आने वाले समय की मांग को लेकर सकारात्मक संभावनाएं दिखाई देती हैं।

घरेलू विनिर्माण और एकीकृत उत्पादन पर जोर

जुपिटर वैगन्स के मैनेजिंग डायरेक्टर विवेक लोहिया के अनुसार, भारतीय रेलवे माल ढुलाई क्षमता का तेजी से विस्तार कर रहा है। उन्होंने बताया कि कंपनी ने वैगन निर्माण से जुड़ी सप्लाई चेन में अपनी पकड़ मजबूत की है। इसमें कास्टिंग, बोगी, कपलर और ब्रेक सिस्टम जैसे महत्वपूर्ण घटक शामिल हैं। कंपनी ओडिशा स्थित अपनी सुविधा के माध्यम से व्हीलसेट के क्षेत्र में भी अपनी क्षमताओं का विस्तार कर रही है। इससे लागत, गुणवत्ता और सप्लाई समय पर बेहतर कंट्रोल हासिल करने में मदद मिलने की उम्मीद है।

रेलवे के विकास लक्ष्यों को मिलेगा समर्थन

भारत सरकार राष्ट्रीय रेल योजना के तहत माल ढुलाई में रेलवे की हिस्सेदारी बढ़ाने पर जोर दे रही है। डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर और पीएम गति शक्ति जैसी पहलें इस दिशा में महत्वपूर्ण हैं। जुपिटर वैगन्स का नया ऑर्डर इसी व्यापक विकास लक्ष्य से जुड़ा है। आने वाले समय में वैगनों की बढ़ती मांग, निजी क्षेत्र की भागीदारी और घरेलू विनिर्माण क्षमता कंपनी के लिए महत्वपूर्ण अवसर बन सकते हैं।

(डिस्क्लेमर: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें।)

लेखकों के बारे में

Namita Shukla
Namita Shukla is a seasoned journalist with over 15 years of experience in Hindi media. She has worked with some of the most reputed news organizations, including Navbharat Times, Dainik Jagran, Aaj Tak, and Hindustan Times Hindi. Throughout her career, Namita has reported on a wide range of beats such as national affairs, sports, business, and entertainment, bringing clarity and depth to her reporting. In addition to her journalistic work, she is a certified fact-checker by both Google and Meta, underscoring her commitment to accuracy and ethical journalism in the digital age.

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