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6 min read | अपडेटेड October 31, 2026, 12:22 IST
सारांश
केंद्र सरकार ने 28 अक्टूबर, बुधवार को कंटेनर मैन्युफैक्चरिंग प्रमोशन स्कीम (CMPS) को मंजूरी दे दी है। इस योजना के तहत सरकार वित्त वर्ष 2039-40 तक कुल ₹10,000 करोड़ खर्च करेगी। इसका मुख्य उद्देश्य भारत में शिपिंग कंटेनर बनाने वाली कंपनियों को बढ़ावा देना है।
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Jupiter Wagons ISO मरीन कंटेनर और एनर्जी स्टोरेज के लिए विशेष कंटेनर बनाती है।
Jupiter Wagons के शेयर पिछले कुछ समय से चर्चा में हैं। इस कंपनी को हाल ही में रेल मंत्रालय से मिला ₹1140 करोड़ का बड़ा ऑर्डर मिला। इस ऑर्डर के तहत जुपिटर वैगन्स को भारतीय रेलवे के लिए 2583 वैगनों का निर्माण और सप्लाई करनी है। इस खबर का असर कंपनी के शेयरों पर भी दिखा और यह पिछले 5 कारोबारी दिनों में करीब 5 फीसदी उछल चुका है। हालांकि इसके अलावा 1 और बड़ी खबर है, जिसने इस शेयर को लेकर सेंटीमेंट पॉजिटिव किया है। दरअसल, केंद्र सरकार ने कंटेनर मैन्युफैक्चरिंग प्रमोशन स्कीम (CMPS) को मंजूरी दी है। इस योजना के तहत सरकार वित्त वर्ष 2039-40 तक कुल ₹10,000 करोड़ खर्च करेगी। बता दें कि BSE पर इसके शेयर शुक्रवार को 5.57 फीसदी गिरकर 182.15 रुपये प्रति शेयर के भाव पर बंद हुए। इसका मार्केट कैप 7,784.55 करोड़ रुपये है।
केंद्र सरकार ने 28 अक्टूबर, बुधवार को कंटेनर मैन्युफैक्चरिंग प्रमोशन स्कीम (CMPS) को मंजूरी दे दी है। इस योजना के तहत सरकार वित्त वर्ष 2039-40 तक कुल ₹10,000 करोड़ खर्च करेगी। इसका मुख्य उद्देश्य भारत में शिपिंग कंटेनर बनाने वाली कंपनियों को बढ़ावा देना, विदेशों से कंटेनर आयात पर निर्भरता कम करना और देश में मजबूत मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर तैयार करना है। इस खबर के बाद कंटेनर बनाने वाली कंपनियों के शेयर निवेशकों की नजर में आ सकते हैं।
बता दें कि Jupiter Wagons ISO मरीन कंटेनर और एनर्जी स्टोरेज के लिए विशेष कंटेनर बनाती है। सरकार की योजना से कंपनी को फायदा मिल सकता है, अगर इसके बनाए जाने वाले कंटेनर योजना की शर्तों के तहत पात्र पाए जाते हैं। Jupiter Wagons के अलावा इस सरकारी स्कीम से Kalyani Cast-Tech और DCM Shriram Industries जैसी कंपनियों को भी फायदा हो सकता है।
सरकार का लक्ष्य भारत में कंटेनर बनाने की सालाना क्षमता को करीब 10 गुना बढ़ाकर 7.5 लाख TEUs तक पहुंचाना है। सरकार का मानना है कि इस योजना से भारत में अंतरराष्ट्रीय स्तर के कंटेनर तैयार करने का मजबूत आधार बनेगा। इससे भविष्य में भारत अच्छी गुणवत्ता वाले शिपिंग कंटेनर का बड़ा एक्सपोर्ट हब भी बन सकता है।
जुपिटर वैगन्स (Jupiter Wagons) ने बताया है कि उसे रेलवे बोर्ड यानी रेल मंत्रालय से ₹1,140 करोड़ का बड़ा ऑर्डर मिला है। कंपनी ने गुरुवार को स्टॉक एक्सचेंज में फाइलिंग के जरिए इस ऑर्डर की जानकारी दी। इस ऑर्डर से कंपनी को आने वाले समय में कारोबार बढ़ाने और अपनी कमाई को मजबूत करने में मदद मिलने की उम्मीद है।
कंपनी ने कहा कि उसका ऑर्डर बुक सरकारी और निजी दोनों क्षेत्रों के ग्राहकों में फैला हुआ है। भारतीय रेलवे के अलावा निजी माल ढुलाई कंपनियों और वैगन लीज पर देने वाली कंपनियों से भी उसे लगातार अच्छे ऑर्डर मिल रहे हैं। इससे कंपनी के निजी क्षेत्र के कारोबार को भी मजबूती मिल रही है।
₹1,140 करोड़ का यह नया ऑर्डर भारतीय रेलवे के लिए मालगाड़ियों के वैगन और अन्य रेलवे उपकरणों की जरूरतों को पूरा करने में मदद करेगा। कंपनी का मानना है कि इस ऑर्डर से उसे भविष्य के कारोबार को लेकर ज्यादा भरोसा मिलेगा और रेलवे सेक्टर में उसकी स्थिति और मजबूत होगी।
जुपिटर वैगन्स को उम्मीद है कि वित्त वर्ष 2026-27 की चौथी तिमाही (Q4 FY27) में उसे करीब ₹2,000 करोड़ के नए ऑर्डर मिल सकते हैं। कंपनी को उम्मीद है कि सरकारी रेलवे परियोजनाओं और निजी माल ढुलाई कंपनियों, दोनों की तरफ से मांग बनी रहेगी। इससे आने वाले समय में कंपनी के कारोबार को बढ़ावा मिल सकता है।
रिपोर्ट्स के मुताबिक कंपनी के मैनेजिंग डायरेक्टर विवेक लोहिया ने कहा कि भारतीय रेलवे तेजी से माल ढुलाई की क्षमता बढ़ा रहा है। यह नया ऑर्डर रेलवे की ओर से कंपनी पर दिखाए गए भरोसे को दर्शाता है। उन्होंने बताया कि कंपनी अब वैगन बनाने के लिए जरूरी कई सामान खुद तैयार कर रही है। इसमें कास्टिंग, बोगी, कपलर और ब्रेक सिस्टम शामिल हैं। अब कंपनी ओडिशा में अपनी नई फैसिलिटी के जरिए व्हीलसेट बनाने की दिशा में भी काम कर रही है।
Jupiter Wagons में विदेशी निवेशकों की हिस्सेदारी में पिछले कुछ समय में लगातार गिरावट नजर आई है। दिसंबर 2025 में FIIs की हिस्सेदारी 4.48 फीसदी थी, जो मार्च 2026 में घटकर 4.19 फीसदी, जून 2026 में 3.47 फीसदी और फिर सितंबर 2026 में 3.02 फीसदी तक लुढ़क गई। यानी 9 महीने में FII की हिस्सेदारी 1.46 फीसदी तक कम हो गई। इसी अवधि में घरेलू संस्थागत निवेशकों (DII) की हिस्सेदारी 0.75 फीसदी से मामूली बढ़कर 0.80 फीसदी हो गई। दूसरी तरफ प्रमोटर्स की हिस्सेदारी 68.31 फीसदी पर स्थिर रही।
जुपिटर वैगन्स के वित्त वर्ष 2025-26 के सालाना नतीजों में बड़ी गिरावट देखने को मिली। कंपनी का रेवेन्यू, ऑपरेटिंग प्रॉफिट और नेट प्रॉफिट तीनों पिछले वित्त वर्ष 2024-25 (FY25) के मुकाबले कम हुए हैं। खासतौर पर कंपनी के मुनाफे में काफी ज्यादा गिरावट दर्ज की गई है। FY26 में कंपनी का रेवेन्यू ₹2,961.36 करोड़ रहा, जबकि FY25 में यह ₹4,007.64 करोड़ था। इस तरह कंपनी की कुल कमाई में सालाना आधार पर 26.11% की गिरावट आई है।
कंपनी का ऑपरेटिंग प्रॉफिट भी FY26 में घटकर ₹245 करोड़ रह गया, जो FY25 में ₹495.90 करोड़ था। यानी ऑपरेटिंग प्रॉफिट में 50.59% की गिरावट दर्ज की गई। इसके अलावा नेट प्रॉफिट FY26 में ₹165.96 करोड़ रहा, जबकि पिछले वित्त वर्ष FY25 में यह ₹380.27 करोड़ था। कंपनी के शुद्ध मुनाफे में सालाना 56.36% की बड़ी गिरावट आई है।
Jupiter Wagons के शेयर लंबे समय से दबाव में हैं। पिछले 1 महीने में इसके शेयरों में करीब 22 फीसदी की गिरावट आ चुकी है। पिछले 6 महीने में यह शेयर करीब 36 फीसदी टूट चुका है। इस साल अब तक इसमें 46 फीसदी की बड़ी गिरावट आई है। वहीं पिछले 1 साल में इसके निवेशकों को 44 फीसदी का नुकसान हुआ है। इस शेयर का 52-वीक हाई 358.20 रुपये है और यह अपने इस स्तर से करीब 50 फीसदी लुढ़क चुका है।
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