बिजनेस न्यूज़

4 min read | अपडेटेड October 31, 2026, 11:20 IST
सारांश
अक्टूबर महीने में अब तक चांदी करीब ₹47,000 प्रति किलो सस्ती हो चुकी है। यह साल 2026 की सबसे बड़ी मासिक गिरावट हो सकती है। बता दें कि 2025 में चांदी की कीमतों में लगातार तेजी आई थी, लेकिन अब उस तेजी का आधे से ज्यादा फायदा खत्म हो चुका है।

Gold-Silver: सोने की कीमतों में भी लगातार तीसरे कारोबारी सत्र में गिरावट आई।
अंतरराष्ट्रीय बाजार में भी सोने और चांदी की कीमतों में बड़ी गिरावट आई। COMEX बाजार में सोने की कीमत 3.63 फीसदी घटकर 3884.90 डॉलर प्रति औंस रह गई। वहीं, चांदी की कीमत तो 6.20 फीसदी टूटकर 49.14 डॉलर प्रति औंस पर आ गई। चांदी का यह करीब 11 महीनों का सबसे निचला स्तर है। दुनिया में बढ़ते तनाव के कारण भी निवेशक सतर्क नजर आ रहे हैं।
अक्टूबर महीने में अब तक चांदी करीब ₹47,000 प्रति किलो सस्ती हो चुकी है। यह साल 2026 की सबसे बड़ी मासिक गिरावट हो सकती है। बता दें कि 2025 में चांदी की कीमतों में लगातार तेजी आई थी, लेकिन अब उस तेजी का आधे से ज्यादा फायदा खत्म हो चुका है। कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों और महंगाई की चिंता के कारण चांदी पर दबाव बना हुआ है।
सोने की कीमतों में भी लगातार तीसरे कारोबारी सत्र में गिरावट आई। शुक्रवार को MCX पर सोना ₹4,347 प्रति 10 ग्राम गिरकर ₹1,38,249 तक पहुंच गया। यह मार्च के आखिर के बाद सोने का सबसे निचला स्तर है। अक्टूबर में सोना अब तक करीब ₹11,700 प्रति 10 ग्राम सस्ता हो चुका है। इससे पहले सितंबर में भी सोने की कीमत करीब ₹5,400 गिरी थी।
चांदी ने अपने रिकॉर्ड भाव ₹4,20,048 प्रति किलो से करीब 57% की गिरावट दर्ज की है। यानी चांदी अपने सबसे ऊंचे भाव के मुकाबले आधे से भी कम कीमत पर आ गई है। हालांकि, 2025 में चांदी की कीमतों में करीब 170% की तेजी आई थी। वहीं, सोना अपने रिकॉर्ड भाव ₹1,80,779 प्रति 10 ग्राम से ₹42,321 तक सस्ता हो चुका है।
अमेरिका में टेक्नोलॉजी कंपनियों के शेयरों में भारी गिरावट देखी जा रही है। एक्सपर्ट्स का मानना है कि AI सेक्टर में निवेश को लेकर बढ़ती चिंता ने सोने-चांदी की बिकवाली बढ़ाई है। जब शेयर बाजार में नुकसान होता है, तो कुछ निवेशक दूसरे निवेशों में लगी अपनी रकम निकालकर नुकसान की भरपाई करते हैं। इसी वजह से सोने और चांदी पर भी बिकवाली का दबाव बढ़ा।
इस गिरावट की अहम वजह अमेरिका में महंगाई बढ़ना और ब्याज दरों में बढ़ोतरी की आशंका है। अमेरिका में सितंबर के दौरान महंगाई से जुड़ा PCE इंडेक्स एक महीने में 0.5% बढ़ा। यह मार्च के बाद सबसे बड़ी बढ़ोतरी थी। वहीं, सालाना महंगाई दर बढ़कर 3.6% हो गई। इससे यह चिंता बढ़ गई है कि अमेरिका में ब्याज दरें लंबे समय तक ऊंची रह सकती हैं।
बाजार के जानकारों के अनुसार अमेरिकी फेडरल रिजर्व द्वारा ब्याज दरें बढ़ाने की करीब 75% संभावना है। जब ब्याज दरें बढ़ती हैं, तो निवेशक सोने-चांदी के बजाय ऐसे विकल्पों में पैसा लगाना पसंद करते हैं, जहां उन्हें ब्याज या निश्चित रिटर्न मिलता है। सोना और चांदी अपने आप कोई ब्याज नहीं देते, इसलिए ऊंची ब्याज दरों के माहौल में इनकी मांग घट सकती है। यही वजह है कि फिलहाल दोनों कीमती धातुओं की कीमतों में भारी गिरावट देखने को मिल रही है।
मिडिल ईस्ट में जारी युद्ध के कारण कच्चे तेल और गैस की कीमतें भी ऊंची बनी हुई हैं। अमेरिका-इजरायल और ईरान के बीच तनाव के चलते तेल की सप्लाई प्रभावित होने का डर है। होर्मुज जलडमरूमध्य में एक तेल टैंकर पर हमले के बाद सप्लाई को लेकर चिंता और बढ़ गई है। ब्रेंट क्रूड ऑयल की कीमत 113 डॉलर के ऊपर बनी हुई है। महंगा कच्चा तेल महंगाई को बढ़ा सकता है, जिसके कारण केंद्रीय बैंक ब्याज दरें ऊंची रख सकते हैं।
संबंधित समाचार
लेखकों के बारे में

अगला लेख