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  1. 31 दिसंबर तक मिलेगी कपास आयात में राहत, सोमवार को टेक्सटाइल शेयरों में दिख सकती है हलचल

मार्केट न्यूज़

31 दिसंबर तक मिलेगी कपास आयात में राहत, सोमवार को टेक्सटाइल शेयरों में दिख सकती है हलचल

Namita Shukla

4 min read | अपडेटेड October 31, 2026, 18:32 IST

सारांश

सरकार का यह फैसला टेक्सटाइल इंडस्ट्री के लिए राहत भरा है। सोमवार को इस सेक्टर के शेयरों में सकारात्मक प्रतिक्रिया देखने को मिल सकती है, लेकिन निवेशकों को कंपनी के नतीजों और कारोबार की स्थिति को ध्यान में रखकर ही फैसला लेना चाहिए।

टेक्सटाइल इंडस्ट्री

31 दिसंबर तक मिलेगी कपास आयात में राहत (Photo: Shutterstock)

केंद्र सरकार ने घरेलू कपड़ा और टेक्सटाइल इंडस्ट्री को राहत देते हुए कॉटन इंपोर्ट पर सीमा शुल्क छूट का पीरियड दो महीने बढ़ाकर 31 दिसंबर 2026 तक कर दिया है। वित्त मंत्रालय के राजस्व विभाग ने 30 अक्टूबर को इस संबंध में अधिसूचना जारी की। इससे पहले मई में कॉटन इंपोर्ट को 31 अक्टूबर 2026 तक सीमा शुल्क से छूट दी गई थी। अब इस राहत को साल के अंत तक जारी रखने का फैसला किया गया है।

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सरकार के इस कदम का उद्देश्य घरेलू बाजार में कपास की उपलब्धता बढ़ाना और कपड़ा कंपनियों की उत्पादन लागत को कम करने में मदद करना है। कपास टेक्सटाइल और गारमेंट इंडस्ट्री के लिए प्रमुख कच्चा माल है। इसकी कीमतों और सप्लाई में बदलाव का सीधा असर कंपनियों के उत्पादन खर्च और मुनाफे पर पड़ता है।

छोटे और मध्यम उद्योगों को मिलेगी राहत

वित्त मंत्रालय के अनुसार, आयात शुल्क छूट बढ़ाने से कपड़ा और परिधान क्षेत्र की उत्पादन लागत कम होने की उम्मीद है। इससे निर्माताओं के साथ उपभोक्ताओं को भी राहत मिल सकती है। मंत्रालय का मानना है कि बाजार में कपास की बेहतर उपलब्धता से विशेष रूप से छोटे और मध्यम उद्यमों (SMEs) को फायदा होगा।

कपड़ा मंत्रालय ने भी कहा है कि सरकार घरेलू कपास किसानों के हितों और उद्योग की जरूरतों के बीच संतुलन बनाए रखने के लिए प्रतिबद्ध है। इस फैसले से कपड़ा उद्योग को प्रतिस्पर्धी कीमतों पर कच्चा माल उपलब्ध कराने, घरेलू विनिर्माण को समर्थन देने और मूल्य संवर्धन को बढ़ावा देने में मदद मिल सकती है।

CITI ने फैसले का किया स्वागत

कन्फेडरेशन ऑफ इंडियन टेक्सटाइल इंडस्ट्री (CITI) ने कपास आयात शुल्क छूट बढ़ाने के फैसले का स्वागत किया है। संगठन का मानना है कि इससे भारतीय कपड़ा और परिधान उद्योग की अंतरराष्ट्रीय प्रतिस्पर्धात्मकता मजबूत होगी।

CITI के अध्यक्ष अश्विन चंद्रन के मुताबिक, उद्योग को इस कदम की तत्काल जरूरत थी, क्योंकि भारतीय कंपनियां वैश्विक बाधाओं और बढ़ती प्रतिस्पर्धा का सामना कर रही हैं। घरेलू कपास की आपूर्ति उद्योग की जरूरतों के मुकाबले पर्याप्त नहीं थी। उन्होंने कहा कि शुल्क छूट बढ़ने से कंपनियों को निर्यात के ऑर्डर समय पर और बेहतर तरीके से पूरे करने में मदद मिलेगी।

भारतीय कपड़ा और परिधान क्षेत्र ने 2030 तक 100 अरब डॉलर के निर्यात का लक्ष्य रखा है। ऐसे में कच्चे माल की उपलब्धता और लागत को नियंत्रित रखना इस लक्ष्य के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

सोमवार को टेक्सटाइल शेयरों पर रहेगी नजर

शेयर बाजार के लिहाज से इस फैसले को टेक्सटाइल सेक्टर के लिए सकारात्मक संकेत माना जा सकता है। शनिवार को जारी इस घोषणा के बाद अगले कारोबारी दिन यानी सोमवार, 2 नवंबर को कपास की अधिक खपत करने वाली स्पिनिंग मिलों, यार्न निर्माताओं और टेक्सटाइल कंपनियों के शेयरों में निवेशकों की दिलचस्पी बढ़ सकती है।

विशेष रूप से वे कंपनियां लाभ की स्थिति में रह सकती हैं जिन्हें घरेलू बाजार से पर्याप्त कपास नहीं मिल पा रही थी या जिन्हें महंगे कच्चे माल के कारण मार्जिन पर दबाव झेलना पड़ रहा था। आयात शुल्क छूट से उन्हें प्रतिस्पर्धी कीमतों पर कपास खरीदने का विकल्प मिलेगा। इससे लागत घटने और मुनाफे में सुधार की उम्मीद बन सकती है।

हालांकि, शेयरों में तेजी कितनी होगी, यह कंपनियों की वास्तविक आयात जरूरत, मौजूदा स्टॉक, खरीद लागत और बाजार की धारणा पर निर्भर करेगा। यह भी ध्यान रखना होगा कि आयातित कपास की बढ़ती उपलब्धता से घरेलू कपास की कीमतों पर दबाव पड़ सकता है, जिसका असर किसानों और कपास उत्पादकों पर अलग हो सकता है।

(डिस्क्लेमर: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें।)

लेखकों के बारे में

Namita Shukla
Namita Shukla is a seasoned journalist with over 15 years of experience in Hindi media. She has worked with some of the most reputed news organizations, including Navbharat Times, Dainik Jagran, Aaj Tak, and Hindustan Times Hindi. Throughout her career, Namita has reported on a wide range of beats such as national affairs, sports, business, and entertainment, bringing clarity and depth to her reporting. In addition to her journalistic work, she is a certified fact-checker by both Google and Meta, underscoring her commitment to accuracy and ethical journalism in the digital age.

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