मार्केट न्यूज़
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4 min read | अपडेटेड August 23, 2026, 14:07 IST
सारांश
भारतीय शेयर बाजार में विदेशी निवेशकों का भरोसा फिर लौट रहा है। अगस्त में अब तक FPI ने 23,544 करोड़ रुपये का निवेश किया है। हालांकि पूरे साल में अब भी बड़ी निकासी दर्ज है। आने वाले हफ्ते में अमेरिका और ईरान का तनाव, कच्चे तेल के दाम और अमेरिकी महंगाई आंकड़े बाजार की दिशा तय करेंगे।

अगले हफ्ते बाजार में इनपर रहेगी नजर। | Image: Shutterstock
भारतीय शेयर बाजार में विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों यानी FPI का भरोसा धीरे धीरे वापस लौटता दिख रहा है। अगस्त के महीने में अब तक FPI ने भारतीय शेयरों में 23,544 करोड़ रुपये का बड़ा निवेश किया है। इससे पहले जुलाई में भी विदेशी निवेशकों ने करीब 20,200 करोड़ रुपये बाजार में लगाए थे। कंपनियों के बेहतर पहली तिमाही के नतीजों, रुपये की स्थिरता और कंपनियों की अच्छी ग्रोथ की उम्मीदों ने निवेशकों का रुख बदलने में अहम भूमिका निभाई है। हालांकि इस हालिया खरीदारी के बावजूद पूरे साल के आंकड़े देखें तो विदेशी निवेशकों ने बाजार से बहुत भारी पैसा बाहर निकाला है।
मार्च से जून तक लगातार चार महीनों में विदेशी निवेशकों ने बाजार से जमकर पैसा बाहर निकाला था। जून में 49,340 करोड़ रुपये, मई में 32,963 करोड़ रुपये, अप्रैल में 60,847 करोड़ रुपये और मार्च में करीब 1.17 लाख करोड़ रुपये की भारी निकासी हुई थी। इससे पहले फरवरी में 22,615 करोड़ रुपये का निवेश आया था। अगर पूरे साल 2026 की बात करें तो FPI अब तक करीब 2.3 लाख करोड़ रुपये भारतीय बाजार से निकाल चुके हैं। यह आंकड़ा साल 2025 में हुई 1.66 लाख करोड़ रुपये की कुल निकासी से भी ज्यादा है। जानकारों का कहना है कि विदेशी निवेशक फिलहाल हर शेयर में खरीदारी न करके चुनिंदा मिडकैप शेयरों में ही ज्यादा दिलचस्पी दिखा रहे हैं, जहां फ्यूचर में ग्रोथ की बेहतर संभावनाएं दिख रही हैं।
पिछले हफ्ते भारतीय शेयर बाजार में दबाव देखा गया था। हफ्ते के दौरान सेंसेक्स करीब 0.6% और निफ्टी लगभग 0.5% गिरकर बंद हुए। शुक्रवार को सेंसेक्स 3 अंक की मामूली बढ़त के साथ 77,541 और निफ्टी 20 अंक चढ़कर 24,252 पर बंद हुआ। अब 24 से 28 अगस्त वाले कारोबारी हफ्ते में बाजार की दिशा मुख्य रूप से चार बड़े कारणों से तय होगी। पहला सबसे बड़ा कारण अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ता तनाव है। मिडिल ईस्ट में तनाव बढ़ने से अमेरिका द्वारा ईरान पर नए आर्थिक प्रतिबंध लगाने की संभावना है। अगर दोनों देशों में तनाव बढ़ता है तो इससे ग्लोबल मार्केट में अनिश्चितता बढ़ेगी और इसका असर भारतीय बाजार पर भी देखने को मिलेगा।
बाजार के लिए दूसरा बड़ा फैक्टर कच्चे तेल की कीमतें हैं। पिछले हफ्ते ब्रेंट क्रूड 95 डॉलर प्रति बैरल के पास और डब्ल्यूटीआई क्रूड 87 डॉलर से ऊपर रहा। भारत अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा बाहर से आयात करता है, इसलिए महंगा कच्चा तेल देश में महंगाई और कंपनियों की लागत बढ़ा सकता है। तीसरा बड़ा कारण बॉन्ड यील्ड में बढ़ोतरी है। भारत की 10 साल की सरकारी बॉन्ड यील्ड पिछले हफ्ते बढ़कर 6.85% पर बंद हुई, जो दो महीने का ऊंचा स्तर है। अमेरिका में भी बॉन्ड यील्ड काफी ऊपर बनी हुई है। जब बॉन्ड यील्ड बढ़ती है तो निवेशक फिक्स्ड इनकम की तरफ जाते हैं, जिससे शेयर बाजार पर दबाव बनता है।
चौथा बड़ा फैक्टर अमेरिका से आने वाले आंकड़े हैं। वहां फेडरल रिजर्व के चेयरमैन केविन वार्श का भाषण और PCE महंगाई आंकड़े जारी होंगे, जिनसे ब्याज दरों को लेकर आगे की रणनीति का संकेत मिलेगा। जानकारों के मुताबिक भारतीय बाजार को घरेलू अर्थव्यवस्था की मजबूती से सपोर्ट मिल सकता है। पिछले हफ्ते रियल्टी, मेटल और कुछ प्राइवेट बैंक के शेयरों में खरीदारी देखी गई, जबकि आईटी और FMCG के शेयर दबाव में रहे।
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