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3 min read | अपडेटेड January 22, 2026, 11:35 IST
सारांश
Defence Stocks: यूरोपीय संघ भारत का सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदार है। वित्त वर्ष 2023-24 में भारत और EU के बीच व्यापार 135 अरब डॉलर का रहा। मुक्त व्यापार समझौते से दोनों के बीच व्यापार और बढ़ने की उम्मीद है। भारत और EU 2026 से 2030 के लिए एक साझा रणनीतिक योजना भी पेश कर सकते हैं।

भारत और यूरोपीय संघ शिखर सम्मेलन में मुक्त व्यापार समझौते (FTA) के पूरा होने की घोषणा कर सकते हैं।
ईयू की विदेश नीति प्रमुख काजा कल्लास ने हाल ही में कहा कि यूरोप और भारत ने एक नया “सुरक्षा और रक्षा साझेदारी” (Security and Defence Partnership) समझौते पर आगे बढ़ने का निर्णय लिया है। इस साझेदारी के तहत दोनों देश समुद्री सुरक्षा, आतंकवाद विरोधी और साइबर सुरक्षा जैसे क्षेत्रों में सहयोग करेंगे। कल्लास ने कहा कि वह इसे अगले हफ्ते नई दिल्ली में होने वाले सम्मेलन में हस्ताक्षर करने के लिए उत्सुक हैं।
PTI की रिपोर्ट के मुताबिक, भारत और यूरोपीय संघ शिखर सम्मेलन में मुक्त व्यापार समझौते (FTA) के पूरा होने की घोषणा कर सकते हैं। इसके साथ ही रक्षा साझेदारी को मजबूत करने और भारतीय पेशेवरों की आवाजाही से जुड़े एक फ्रेमवर्क पर भी सहमति बनने की उम्मीद है। यूरोपीय काउंसिल के अध्यक्ष एंटोनियो कोस्टा और यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयेन 26 जनवरी को भारत के गणतंत्र दिवस समारोह में मुख्य अतिथि होंगे। इसके अगले दिन भारत-EU शिखर सम्मेलन आयोजित किया जाएगा।
गणतंत्र दिवस परेड में EU की एक सैन्य टुकड़ी भी शामिल होगी, जिसमें ऑपरेशन अटलांटा और ऑपरेशन एस्पिड्स से जुड़े झंडे दिखाए जाएंगे। यह पहली बार होगा जब यूरोपीय संघ यूरोप के बाहर किसी ऐसे सैन्य कार्यक्रम में भाग लेगा। शिखर सम्मेलन के दौरान रूस-यूक्रेन युद्ध, मध्य पूर्व की स्थिति और वेनेजुएला में राजनीतिक घटनाक्रम जैसे वैश्विक मुद्दों पर भी चर्चा होने की संभावना है। EU के नेता करीब 90 सदस्यों के प्रतिनिधिमंडल के साथ भारत आएंगे। इस दल में विदेश, व्यापार और सुरक्षा से जुड़े बड़े अधिकारी शामिल होंगे।
यूरोपीय संघ भारत का सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदार है। वित्त वर्ष 2023-24 में भारत और EU के बीच व्यापार 135 अरब डॉलर का रहा। मुक्त व्यापार समझौते से दोनों के बीच व्यापार और बढ़ने की उम्मीद है। भारत और EU 2026 से 2030 के लिए एक साझा रणनीतिक योजना भी पेश कर सकते हैं, जिससे आने वाले वर्षों में दोनों के रिश्तों की दिशा तय होगी।
दोनों पक्ष CBAM (कार्बन बॉर्डर एडजस्टमेंट मैकेनिज्म) जैसे मुद्दों पर अभी बातचीत कर रहे हैं। यह स्टील और सीमेंट जैसे कार्बन-आधारित उत्पादों पर टैक्स से जुड़ा मामला है, जिस पर किसी समझौते पर पहुंचने की कोशिश जारी है। प्रस्तावित सिक्योरिटी एंड डिफेंस पार्टनरशिप से भारत और EU के बीच रक्षा और सुरक्षा सहयोग को मजबूती मिलेगी। इससे रक्षा क्षेत्र में तालमेल बढ़ेगा और भारतीय कंपनियों के लिए EU के SAFE कार्यक्रम में भाग लेने के रास्ते खुल सकते हैं।
SAFE, यूरोपीय संघ का 150 अरब यूरो का फंड है, जिसका उद्देश्य सदस्य देशों की रक्षा तैयारियों को तेज करना है। इसके अलावा, भारत और EU सिक्योरिटी ऑफ इंफॉर्मेशन एग्रीमेंट (SOIA) पर भी बातचीत शुरू करने वाले हैं, जिससे रक्षा उद्योग में आपसी सहयोग को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है।
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