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4 min read | अपडेटेड June 15, 2026, 10:09 IST
सारांश
इंटरनेशनल मार्केट में कच्चे तेल यानी क्रूड ऑयल की कीमतों में 4 पर्सेंट से ज्यादा की भारी गिरावट आई है। अमेरिकी प्रेसिडेंट डोनाल्ड ट्रंप द्वारा अमेरिका और ईरान के बीच शांति समझौते का एलान करने के बाद यह गिरावट देखी गई।

कच्चे तेल की कीमतों में आई भारी गिरावट से भारतीय शेयर बाजार की कई कंपनियों को बड़ा बूस्ट मिला है। Image: Shutterstock
इंटरनेशनल मार्केट में कच्चे तेल यानी क्रूड ऑयल की कीमतों में आई भारी गिरावट का सीधा असर सोमवार 15 जून को भारतीय शेयर बाजार पर देखने को मिला है। शुरुआती कारोबार में कच्चे तेल से जुड़ी कई कंपनियों जैसे ऑयल मार्केटिंग कंपनियों, पेंट, टायर और एविएशन सेक्टर के शेयरों में शानदार बढ़त दर्ज की गई है। सुबह 9:45 बजे तक के आंकड़ों के अनुसार इन सेक्टर्स की कई बड़ी कंपनियों के शेयर हरे निशान में ट्रेड कर रहे थे। दूसरी तरफ कच्चे तेल का उत्पादन करने वाली यानी अपस्ट्रीम तेल कंपनियों के शेयरों में गिरावट का रुख देखने को मिला है। बाजार में यह हलचल अमेरिकी प्रेसिडेंट डोनाल्ड ट्रंप के एक बड़े एलान के बाद शुरू हुई है।
इंटरनेशनल मार्केट में शुरुआती कारोबार के दौरान कच्चे तेल की कीमतों में 4 पर्सेंट से ज्यादा की बड़ी गिरावट दर्ज की गई। अमेरिकी प्रेसिडेंट डोनाल्ड ट्रंप ने अपने ट्रुथ सोशल प्लेटफॉर्म पर पोस्ट करके जानकारी दी कि अमेरिका और ईरान ने एक सक्रिय शांति समझौते की दिशा में एक बड़ा कदम पूरा कर लिया है, जिस पर इसी हफ्ते साइन होने की उम्मीद है। ट्रंप ने लिखा कि ईरान के साथ डील पूरी हो चुकी है और उन्होंने होर्मुज जलडमरूमध्य को खोलने और अमेरिकी नौसेना की नाकेबंदी को तुरंत हटाने की पूरी मंजूरी दे दी है। उन्होंने दुनिया भर के जहाजों से तेल का फ्लो शुरू करने की बात कही। इस खबर के आते ही ग्लोबल मार्केट में कच्चे तेल के दाम तेजी से नीचे आ गए।
कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट भारत के लिए हमेशा एक अच्छी खबर लेकर आती है क्योंकि भारत अपनी जरूरत का 85 पर्सेंट से ज्यादा क्रूड ऑयल बाहर से इम्पोर्ट करता है। तेल के दाम कम होने से देश का इम्पोर्ट बिल कम होता है, जिससे करंट अकाउंट डेफिसिट और रुपये पर दबाव कम होता है। साथ ही इससे महंगाई को काबू में रखने में भी बड़ी मदद मिलती है। सस्ता क्रूड मिलने से एविएशन, पेंट, टायर, ऑयल मार्केटिंग और लॉजिस्टिक्स कंपनियों के लिए फ्यूल और कच्चे माल की लागत कम हो जाती है, जिससे आने वाले समय में यानी उनके फ्यूचर में उनका मुनाफा और मार्जिन बढ़ सकता है।
सुबह 9:45 बजे तक के बाजार के आंकड़ों को देखें तो इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन (IOC) का शेयर 3.09 पर्सेंट की बढ़त के साथ कारोबार कर रहा था, जबकि बाद में यह एनएसई पर 3.52 पर्सेंट ऊपर 145.90 रुपये पर देखा गया। भारत पेट्रोलियम (BPCL) का शेयर भी करीब 4 पर्सेंट ऊपर 313.85 रुपये पर था, हालांकि हिंदुस्तान पेट्रोलियम (HPCL) का शेयर 3.83 पर्सेंट गिरकर 403.80 रुपये पर ट्रेड कर रहा था। पेंट सेक्टर में एशियन पेंट्स का शेयर 9:45 बजे तक 1.42 पर्सेंट ऊपर था, जो बाद में 2.66 पर्सेंट बढ़कर 2,820.50 रुपये पर पहुंच गया। कंसाई नेरोलैक का शेयर भी 1.42 पर्सेंट की बढ़त के साथ 219.58 रुपये पर ट्रेड कर रहा था। टायर कंपनियों में जेके टायर का शेयर सुबह 4.63 पर्सेंट की जोरदार तेजी पर था, जबकि एविएशन सेक्टर में इंटरग्लोब एविएशन यानी इंडिगो का शेयर 4.24 पर्सेंट की बढ़त के साथ कारोबार कर रहा था।
जहां एक तरफ तेल का इस्तेमाल करने वाली कंपनियों में खुशी का माहौल है, वहीं ओएनजीसी (ONGC) और ऑयल इंडिया (OIL) जैसी कच्चे तेल का उत्पादन करने वाली कंपनियों के लिए यह खबर नुकसानदेह साबित हुई है। इन कंपनियों का रेवेन्यू और नेट प्रॉफिट सीधे तौर पर उस कीमत से जुड़ा होता है जिस पर वे कच्चा तेल बेचती हैं। जब इंटरनेशनल मार्केट में तेल के दाम गिरते हैं, तो इन कंपनियों को प्रति बैरल मिलने वाली रकम कम हो जाती है। इसके कारण उनका कुल रेवेन्यू, ऑपरेटिंग प्रॉफिट और कैश फ्लो प्रभावित होता है। यही वजह है कि सोमवार को शुरुआती कारोबार में ओएनजीसी और ऑयल इंडिया के शेयर लाल निशान में कारोबार करते हुए दिखाई दिए।
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