मार्केट न्यूज़
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4 min read | अपडेटेड March 27, 2025, 10:01 IST
सारांश
Tata Motors के शेयरों में 5 फीसदी से अधिक की गिरावट है और यह 672 रुपये के भाव पर ट्रेड कर रहा है। संवर्धन मदरसन इंटरनेशनल (Samvardhana Motherson International) के शेयर भी करीब 5 फीसदी लुढ़ककर 128.50 रुपये के भाव पर आ गए हैं।
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Stock Market: निफ्टी ऑटो इंडेक्स में करीब 1.50 फीसदी की गिरावट देखने को मिल रही है।
टाटा मोटर्स (Tata Motors) के शेयरों में 5 फीसदी से अधिक की गिरावट है और यह 672 रुपये के भाव पर ट्रेड कर रहा है। संवर्धन मदरसन इंटरनेशनल (Samvardhana Motherson International) के शेयर भी करीब 5 फीसदी लुढ़ककर 128.50 रुपये के भाव पर आ गए हैं।
इसके अलावा, Bharat Forge में करीब 3 फीसदी की गिरावट है और यह 1,145.70 रुपये के भाव पर आ गया है। Balkrishna Industries में 2.47 फीसदी की कमजोरी है। Ashok Leyland के शेयर भी दो फीसदी से अधिक टूट गए हैं।
राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने बुधवार को ऑटो आयात पर 25 प्रतिशत टैरिफ की घोषणा की। उन्होंने कहा कि इससे घरेलू विनिर्माण को बढ़ावा मिलेगा और सालाना 100 अरब डॉलर का उत्पादन होगा। ये टैरिफ 2 अप्रैल से प्रभावी होंगे, और 3 अप्रैल से कलेक्शन शुरू होगी।
भारत से अमेरिका को पूरी तरह से असेंबल किए गए कारों का सीधा निर्यात कम होता है। लेकिन ऑटो कंपोनेंट बनाने वाली कंपनियां, जो बड़े पैमाने पर एक्सपोर्ट करती हैं इस फैसले से ज्यादा प्रभावी होंगी।
जिन कम्पनियों पर इसका असर पड़ने की संभावना है, उनमें टाटा मोटर्स और आयशर मोटर्स के साथ-साथ ऑटो कंपोनेंट निर्माता Sona BLW, Samvardhana Motherson और कई अन्य कंपनियां शामिल हैं। ये कंपनियां मुख्य रूप से यूरोप और जापान, दक्षिण कोरिया और चीन जैसे प्रमुख एशियाई बाजारों को निर्यात करती हैं, जो अमेरिका को ऑटोमोबाइल की सप्लाई करते हैं।
ग्लोबल ऑटोमेकर्स कंपोनेंट मेकर्स पर मूल्य वृद्धि का कुछ बोझ डाल सकते हैं, जिससे उनके मार्जिन पर दबाव पड़ेगा। वित्त वर्ष 24 में भारत का ऑटो कंपोनेंट निर्यात 21.2 अरब डॉलर रहा, जबकि ग्लोबल ऑटो कंपोनेंट ट्रेड का मूल्य 1.2 ट्रिलियन डॉलर है। अमेरिका और यूरोप, जो सबसे बड़े ऑटो कंपोनेंट आयातक हैं, ने कुल वैश्विक व्यापार का लगभग 4.5 फीसदी भारत से मंगाया।
टाटा मोटर्स सीधे अमेरिका को निर्यात नहीं करती है, लेकिन इसकी सहायक कंपनी जगुआर लैंड रोवर (JLR) की अमेरिकी बाजार में मौजूदगी है। JLR की FY24 वार्षिक रिपोर्ट के अनुसार, अमेरिका में इसकी कुल बिक्री का 22 फीसदी हिस्सा था।
FY24 में JLR ने वैश्विक स्तर पर लगभग 400,000 गाड़ियां बेचीं, जिससे अमेरिका इसके सबसे बड़े बाजारों में से एक बन गया। JLR की गाड़ियां ज्यादातर यूके और अन्य देशों में बनती हैं और अब उनपर 25 फीसदी टैरिफ लगेगा।
आयशर मोटर्स की रॉयल एनफील्ड 650cc बाइक अमेरिका में काफी बिकती है। इसलिए, नए टैरिफ का असर इसकी बिक्री पर पड़ सकता है।
बड़े वैश्विक वाहन निर्माता कंपनियां (OEMs) बढ़े हुए अमेरिकी टैरिफ का असर ऑटो पार्ट्स बनाने वाली कंपनियों पर डाल सकती हैं। इससे उनके मुनाफे पर दबाव आ सकता है।
Sona Comstar ऑटो पार्ट्स बनाती है, जैसे डिफरेंशियल गियर्स और स्टार्टर मोटर्स। इसका 66% रेवेन्यू अमेरिका और यूरोप से आता है। जोखिम कम करने के लिए कंपनी चीन, जापान और दक्षिण कोरिया में विस्तार कर रही है, जिससे अगले 5 साल में इन बाजारों से 50% रेवेन्यू आने की उम्मीद है।
भारत की सबसे बड़ी ऑटो कंपोनेंट निर्माता कंपनियों में से एक, Motherson की यूरोप और अमेरिका दोनों में मजबूत उपस्थिति है। कंपनी टेस्ला और फोर्ड सहित प्रमुख अमेरिकी कार निर्माताओं को कंपोनेंट की आपूर्ति करती है। इस पर भी टैरिफ हाइक का असर पड़ सकता है।
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