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  1. गन्ना किसानों के प्रदर्शन से महाराष्ट्र में चीनी उत्पादन पर असर? 55 में से 15 मिलों में ही पेराई शुरू

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गन्ना किसानों के प्रदर्शन से महाराष्ट्र में चीनी उत्पादन पर असर? 55 में से 15 मिलों में ही पेराई शुरू

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2 min read | अपडेटेड October 15, 2026, 17:06 IST

सारांश

आने वाले समय में चीनी के उत्पादन पर उल्टा असर देखने को मिल सकता है। महाराष्ट्र में गन्ना किसानों के प्रदर्शन से चीनी उत्पादन पर उल्टा असर देखने को मिल सकता है। सूत्रों की मानें तो 55 में से 15 मिलों में ही पेराई शुरू हो पाई है।

चीनी

महाराष्ट्र में गन्ना किसानों का आंदोलन, ज्यादातर चीनी मिलों में पेराई ठप (Photo: Shutterstock)

गन्ना किसानों के जारी विरोध प्रदर्शन के बीच महाराष्ट्र की 55 चीनी मिलों में से केवल 15 में ही 2026-27 के पेराई सत्र में काम शुरू हुआ है, जबकि कर्नाटक में अबतक पेराई शुरू नहीं हुई है। किसानों की शिकायतों पर गौर करने के लिए सरकार ने एक समिति गठित की है। सूत्रों ने आज यह जानकारी दी। सूत्रों के मुताबिक, महाराष्ट्र में 40 मिलों ने अक्टूबर में शुरू होने वाले पेराई सत्र से पहले की परंपरागत पूजा कर ली है, लेकिन किसानों के आंदोलन के कारण वहां पूरी तरह से कामकाज शुरू नहीं हो पाया है। राज्य में 8 अक्टूबर से 15 मिलों ने पेराई शुरू की है। सूत्र ने कहा, 'इन 15 मिलों में उत्पादित चीनी से कीमतों में कमी आने की उम्मीद है।'

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सूत्रों ने कहा, 'कर्नाटक में विरोध प्रदर्शन के कारण फिलहाल किसी भी मिल में पेराई नहीं हो रही है।' हालांकि, राज्य की 28 मिलों में से आठ विशेष सत्र में उगाए गए गन्ने की पेराई कर रही हैं। महाराष्ट्र और कर्नाटक देश के क्रम से दूसरे और तीसरे सबसे बड़े चीनी उत्पादक राज्य हैं। दोनों राज्यों के किसान गन्ने के लिए अधिक समर्थन मूल्य और चीनी के न्यूनतम बिक्री मूल्य को बढ़ाकर 60 रुपये प्रति किलोग्राम करने की मांग कर रहे हैं।

किसानों द्वारा राष्ट्रीय राजमार्गों को अवरुद्ध करने की चेतावनी दिए जाने के बाद केंद्रीय खाद्य मंत्री प्रह्लाद जोशी और कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने राष्ट्रीय राजधानी में किसान संगठनों के प्रमुख प्रतिनिधियों के साथ बातचीत की थी। इस दौरान उनकी चिंताओं पर विचार करने के लिए नीति आयोग के पूर्व सदस्य रमेश चंद की अध्यक्षता में एक समिति गठित करने का निर्णय लिया गया। सूत्रों के मुताबिक, हालांकि, किसान संगठनों ने इस कदम को खारिज कर दिया है और उनका विरोध प्रदर्शन जारी है।

सरकार ने समिति के गठन की अधिसूचना जारी कर दी है, लेकिन उसे रिपोर्ट सौंपने या उसकी सिफारिशों को लागू करने के लिए कोई स्पष्ट समयसीमा तय नहीं की है। इससे किसान नाराज हैं। उन्हें लगता है कि उनकी मांगें तत्काल पूरी नहीं होंगी।

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