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  1. 23 महीने से लगातार गोल्ड खरीद रहा चीन, US डॉलर से दूरी और सोने से दोस्ती, समझिए क्या है रणनीति

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23 महीने से लगातार गोल्ड खरीद रहा चीन, US डॉलर से दूरी और सोने से दोस्ती, समझिए क्या है रणनीति

Upstox

4 min read | अपडेटेड October 14, 2026, 12:52 IST

सारांश

चीन के केंद्रीय बैंक पीपुल्स बैंक ऑफ चाइना (पीबीओसी) ने सितंबर 2026 में करीब 23 टन सोना खरीदा। यह लगभग तीन साल में उसकी सबसे बड़ी मासिक खरीदारी है। इस तरह केंद्रीय बैंक लगातार 23 महीनों से अपने सोने के भंडार में बढ़ोतरी कर रहा है।

China Gold

चीन के सोना खरीदने की एक बड़ी वजह अमेरिका के डॉलर पर अपनी निर्भरता घटाना है।

चीन में सोने की खरीदारी तेजी से बढ़ रही है। देश का केंद्रीय बैंक लगातार 23 महीनों से सोना खरीद रहा है। वहीं, चीन ने साल 2026 के पहले आठ महीनों में 1000 टन से ज्यादा सोने का आयात किया है। यह मात्रा साल 2025 में पूरे साल के दौरान किए गए आयात से भी अधिक है। चीन में सोने की बढ़ती मांग के पीछे दो बड़े कारण हैं। पहला, अमेरिका के डॉलर पर निर्भरता कम करना और दूसरा अपनी बचत को सुरक्षित रखने के लिए सोने में निवेश करना। चीन की इस खरीदारी का असर दुनिया भर में सोने की कीमतों पर भी पड़ सकता है।

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चीन का केंद्रीय बैंक लगातार खरीद रहा है सोना

चीन के केंद्रीय बैंक पीपुल्स बैंक ऑफ चाइना (पीबीओसी) ने सितंबर 2026 में करीब 23 टन सोना खरीदा। यह लगभग तीन साल में उसकी सबसे बड़ी मासिक खरीदारी है। इस तरह केंद्रीय बैंक लगातार 23 महीनों से अपने सोने के भंडार में बढ़ोतरी कर रहा है। चीन ने 2026 के पहले आठ महीनों में सोने के आयात पर रिकॉर्ड 158.8 अरब डॉलर खर्च किए और 1000 टन से अधिक सोना खरीदा। इसके मुकाबले, पूरे 2025 में चीन ने 96.5 अरब डॉलर खर्च करके 886 टन सोने का आयात किया था। इससे पता चलता है कि चीन में सोने की मांग कितनी तेजी से बढ़ रही है।

डॉलर पर निर्भरता कम करना चाहता है चीन

चीन के सोना खरीदने की एक बड़ी वजह अमेरिका के डॉलर पर अपनी निर्भरता घटाना है। चीन चाहता है कि उसके विदेशी मुद्रा भंडार में केवल अमेरिकी सरकारी बॉन्ड जैसी संपत्तियों पर निर्भरता न रहे।

साल 2022 में रूस के यूक्रेन पर हमले के बाद पश्चिमी देशों ने रूस के केंद्रीय बैंक की विदेशी संपत्तियों को फ्रीज कर दिया था। इससे चीन जैसे देशों को यह समझ आया कि भू-राजनीतिक तनाव के समय दूसरे देशों में रखी संपत्तियों पर पाबंदियां लग सकती हैं।

इसके मुकाबले, देश के अपने भंडार में रखा सोना ऐसी विदेशी वित्तीय पाबंदियों से अपेक्षाकृत सुरक्षित रहता है। यही वजह है कि चीन अपने सोने के भंडार को बढ़ा रहा है और अमेरिकी ट्रेजरी बॉन्ड में अपनी हिस्सेदारी घटा रहा है।

चीनी लोग भी खरीद रहे हैं सोना?

चीन की अर्थव्यवस्था में सुस्ती के कारण आम लोग भी सोने को सुरक्षित निवेश मान रहे हैं। वहां रियल एस्टेट बाजार कई वर्षों से गिरावट के दौर में है। पहले लोग अपनी संपत्ति का बड़ा हिस्सा घर और प्रॉपर्टी में लगाते थे, लेकिन अब इस बाजार में अनिश्चितता बनी हुई है।

इसके अलावा चीन के शेयर बाजार का प्रमुख सूचकांक सीएसआई 300 इस साल करीब 8% नीचे है। बैंक जमा और बॉन्ड से मिलने वाला रिटर्न भी कम हुआ है। ऐसे में लोग सोने के गहने, सिक्के और गोल्ड बार खरीद रहे हैं।

सोने की कीमतों पर क्या होगा असर?

चीन की लगातार खरीदारी सोने की कीमतों को सहारा दे रही है। सितंबर में सोने की कीमतों में 8% से ज्यादा की गिरावट आई थी और भाव करीब 4,176 डॉलर प्रति ट्रॉय औंस पर आ गया था। इससे पहले जनवरी में सोने की कीमत 5500 डॉलर प्रति औंस के रिकॉर्ड स्तर से ऊपर पहुंच गई थी।

सोने पर ब्याज नहीं मिलता, इसलिए आमतौर पर ब्याज दरें बढ़ने पर इसकी मांग पर दबाव आता है। लेकिन चीन जैसे देशों के केंद्रीय बैंक लंबे समय के लिए सोना खरीदते हैं। वे कीमतों में होने वाले छोटे उतार-चढ़ाव से कम प्रभावित होते हैं। इससे सोने की कीमतों को लंबे समय में समर्थन मिल सकता है।

हालांकि, अगर चीन के रियल एस्टेट और शेयर बाजार में सुधार आता है, या ब्याज दरें बढ़ने से बैंक जमा आकर्षक हो जाते हैं, तो सोने की मांग घट सकती है। इसके बावजूद जब तक केंद्रीय बैंक अपने भंडार में विविधता लाने के लिए सोना खरीदते रहेंगे और वैश्विक तनाव बना रहेगा, तब तक सोने की कीमतों को समर्थन मिलने की संभावना बनी रह सकती है।

(डिस्क्लेमर: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें।)

लेखकों के बारे में

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Upstox Hindi News Desk पत्रकारों की एक टीम है जो शेयर बाजारों, अर्थव्यवस्था, वस्तुओं, नवीनतम व्यावसायिक रुझानों और व्यक्तिगत वित्त को उत्साहपूर्वक कवर करती है।

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