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  1. भारत की GDP मापने के नए तरीके का IMF ने किया समर्थन, अब अर्थव्यवस्था की तस्वीर कैसे बदलेगी?

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भारत की GDP मापने के नए तरीके का IMF ने किया समर्थन, अब अर्थव्यवस्था की तस्वीर कैसे बदलेगी?

Upstox

3 min read | अपडेटेड October 15, 2026, 15:17 IST

सारांश

आईएमएफ के एशिया और प्रशांत विभाग के निदेशक कृष्णा श्रीनिवासन ने कहा कि भारत की जीडीपी (सकल घरेलू उत्पाद) के बेस ईयर में संशोधन 'स्वागत योग्य कदम' है।

भारत की जीडीपी

GDP Growth पर भारत को IMF का साथ, नई गणना पद्धति को मिली मंजूरी (Photo: Shutterstock)

अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (International Monetary Fund, IMF) ने आज कहा कि भारत की संशोधित जीडीपी कैलकुलेशन मेथडोलॉजी बेस्ट प्रैक्टिसेस के हिसाब से है और आईएमएफ की सलाह से पूरी तरह मेल खाती है। आईएमएफ के एशिया और प्रशांत विभाग के निदेशक कृष्णा श्रीनिवासन ने कहा कि भारत की जीडीपी (सकल घरेलू उत्पाद) के बेस ईयर में संशोधन 'स्वागत योग्य कदम' है। उन्होंने कहा कि संशोधित मेथडोलॉजी आईएमएफ के स्टैटिस्टिक्स डिपार्टमेंट की ओर से दी गई सलाह से पूरी तरह मेल खाती है। श्रीनिवासन ने कहा, 'मेथडोलॉजी में ये संशोधन पूरी तरह हमारी भारत को दी सलाह के अनुरूप हैं। इसमें हमारे स्टैटिस्टिक्स डिपार्टमेंट की सलाह भी शामिल है।' उन्होंने कहा कि भारत ने जीडीपी कैलकुलेशन मेथडोलॉजी में संशोधनों को समझाने के लिए एक टिप्पणी भी जारी की है।

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श्रीनिवासन ने कहा, 'जीडीपी के आंकड़ों के लिहाज से भारत ने जो किया है, वह बेस्ट प्रैक्टिसेस के हिसाब से है। इसमें सुधार की गुंजाइश हमेशा रहती है लेकिन जीडीपी आंकड़ों को बेहतर बनाने के लिए सांख्यिकी एवं कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय (Ministry of Statistics and Programme Implementation, MoSPI) की ओर से किए गए अच्छे काम को भी स्वीकार करना चाहिए।' आईएमएफ के अधिकारी ने बताया कि भारत ने मजबूत बुनियादी आर्थिक स्थितियों के साथ ऊर्जा संकट का सामना किया है और उससे निपटने के लिए अच्छी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने साथ ही कहा कि रुपये की विनिमय दर पर दबाव को आर्थिक विफलता के संकेत के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए।

श्रीनिवासन ने कहा कि विनिमय दर 'ग्लोबल ब्याज दरों, निवेशकों की जोखिम लेने की धारणा और तेल की कीमतों पर निर्भर करती है।' उन्होंने कहा कि विनिमय दर पर दबाव का मतलब यह नहीं है कि आर्थिक वृद्धि के साथ उसका कोई वास्तविक संबंध नहीं है। आईएमएफ की गुरुवार को जारी ‘एशिया एवं प्रशांत क्षेत्र की क्षेत्रीय आर्थिक परिदृश्य’ रिपोर्ट में भारत को उन उभरती अर्थव्यवस्थाओं में शामिल किया गया है जिनकी मुद्राओं पर ऊर्जा संकट के बाद दबाव पड़ा।

रिपोर्ट में कहा गया कि पिछले कुछ महीनों में यह दबाव कुछ कम हुआ है। इसमें भारत को उन अर्थव्यवस्थाओं में भी शामिल किया गया है, जिन्होंने विदेशी मुद्रा मार्केट में हस्तक्षेप किया। गौरतलब है कि सरकार की ओर से पिछले महीने जारी अप्रैल-जून तिमाही में जीडीपी वृद्धि के उम्मीद से बेहतर 7.8% रहने के आंकड़ों को लेकर राजनीतिक विवाद खड़ा हो गया था। पूर्व वित्त सचिव एस. सी. गर्ग ने इन आंकड़ों पर सवाल उठाए थे।

गर्ग ने दावा किया था कि पिछले साल के आंकड़ों को कम करके जीडीपी वृद्धि को आर्टिफिशियल तरीके से बढ़ा-चढ़ाकर दिखाया गया। मुख्य आर्थिक सलाहकार वी अनंत नागेश्वरन ने गर्ग के तरीके को आंकड़ों में से अपनी सुविधा के अनुसार चुनिंदा आंकड़े लेने वाला रवैया बताया था। उन्होंने कहा था कि जीडीपी के लेटेस्ट आंकड़े तैयार करने के लिए मार्च 2023 में खत्म होने वाले फाइनेंशियल ईयर को नया बेस ईयर बनाया गया है। मेथडोलॉजी में बदलाव के कारण पिछले साल के तिमाही आंकड़ों में भी संशोधन हुआ।

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Upstox Hindi News Desk पत्रकारों की एक टीम है जो शेयर बाजारों, अर्थव्यवस्था, वस्तुओं, नवीनतम व्यावसायिक रुझानों और व्यक्तिगत वित्त को उत्साहपूर्वक कवर करती है।

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