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3 min read | अपडेटेड October 14, 2026, 19:21 IST
सारांश
केंद्रीय कैबिनेट ने आईडीबीआई बैंक की रणनीतिक बिक्री और पुनर्गठन को मंजूरी दे दी है। यह हिस्सेदारी फेयरफैक्स फाइनेंशियल होल्डिंग्स को सौंपी जाएगी। केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने बताया कि इस कदम से वित्तीय क्षेत्र में भारी विदेशी निवेश आएगा और सरकार और LIC मिलकर 34% हिस्सेदारी अपने पास बनाए रखेंगी।

केंद्रीय कैबिनेट ने आईडीबीआई बैंक के पुनर्गठन और फेयरफैक्स को रणनीतिक बिक्री को दी मंजूरी।
नई दिल्ली में हुई केंद्रीय कैबिनेट की बैठक में बैंकिंग और वित्तीय क्षेत्र को लेकर एक बेहद बड़ा फैसला लिया गया है। सरकार ने आईडीबीआई बैंक की रणनीतिक बिक्री और उसके व्यापक पुनर्गठन को अपनी अंतिम मंजूरी दे दी है। इस महत्वपूर्ण सौदे के तहत बैंक में हिस्सेदारी फेयरफैक्स फाइनेंशियल होल्डिंग्स को दी जाएगी। कैबिनेट बैठक के बाद आयोजित प्रेस ब्रीफिंग में केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने सरकार के इस फैसले की विस्तृत जानकारी साझा की। उन्होंने बताया कि यह रणनीतिक कदम देश के वित्तीय सेवा क्षेत्र में भारी निवेश लाने और नए उद्योगों को तेजी से आगे बढ़ाने में मील का पत्थर साबित होगा।
केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने बताया कि देश के वित्तीय क्षेत्र, खासकर आईडीबीआई बैंक को लेकर यह अहम कदम उठाया गया है। आईडीबीआई एक ऐसा संस्थान है जिसने भारत के औद्योगिक विकास में हमेशा से एक केंद्रीय और ऐतिहासिक भूमिका निभाई है। उन्होंने कहा कि भारत जिस तेज रफ्तार के साथ आगे बढ़ रहा है और तेजी से विकास कर रहा है, उसे देखते हुए बाजार में ग्रोथ कैपिटल की भारी जरूरत महसूस की जा रही है। इसी आवश्यकता को पूरा करने के लिए इंडस्ट्रियल डेवलपमेंट बैंक यानी आईडीबीआई के लिए एक मजबूत रणनीतिक पार्टनर का चयन किया गया है, ताकि बैंक के कामकाज को नई दिशा और गति दी जा सके।
केंद्रीय मंत्री ने आगे कहा कि फेयरफैक्स फाइनेंशियल होल्डिंग्स के साथ यह रणनीतिक साझेदारी बैंक में नई पूंजी लगाने का रास्ता पूरी तरह साफ करेगी। यह कदम भारत के वित्तीय सेवा क्षेत्र के इतिहास में अब तक का सबसे बड़ा प्रत्यक्ष विदेशी निवेश यानी एफडीआई लाने की जमीन तैयार करेगा। इस बड़े फैसले से आईडीबीआई और पूरे फाइनेंशियल सर्विसेज सेक्टर में नई नकदी और पूंजी का संचार होगा। नई पूंजी आने से वित्तीय तंत्र और अधिक मजबूत होगा, जिससे देश की आर्थिक गतिविधियों को बड़ा प्रोत्साहन मिलने की उम्मीद है।
इस रणनीतिक पुनर्गठन के तहत मालिकाना हक और हिस्सेदारी को लेकर भी स्थिति पूरी तरह स्पष्ट की गई है। केंद्रीय मंत्री ने बताया कि पुनर्गठित इकाई में भारत सरकार और जीवन बीमा निगम यानी LIC मिलकर 34% हिस्सेदारी अपने पास बनाए रखेंगे। उन्होंने जोर देकर कहा कि 34% हिस्सेदारी अपने पास रखने का फैसला बहुत सोच-समझकर लिया गया है, क्योंकि इससे भविष्य में भारत सरकार और LIC दोनों की मौजूदा हिस्सेदारी का मूल्य काफी अधिक बढ़ जाएगा। जब नए पार्टनर के निवेश से बैंक की वैल्यूएशन बढ़ेगी, तो उसका सीधा लाभ सरकार और LIC को अपनी इस हिस्सेदारी के जरिए मिलेगा।
केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने स्पष्ट किया कि आईडीबीआई हमारे MSME और नए उद्योगों के विकास के लिए हमेशा से एक अत्यंत महत्वपूर्ण संस्थान रहा है। ऐसे में बैंक का यह पुनर्गठन छोटे उद्योगों, नए कारोबारियों और MSME सेक्टर के लिए विकास के अनगिनत नए अवसर पैदा करेगा। इसके साथ ही जो लोग सर्विस सेक्टर में नया कदम रख रहे हैं या अपने मौजूदा काम का विस्तार करना चाहते हैं, उन्हें भी इस व्यवस्था से आसान वित्तीय मदद और नए मौके मिलेंगे। यह पूरा कदम विदेशी पूंजी को आकर्षित करने के साथ-साथ देश के जमीनी स्तर के व्यापार को मजबूत बनाने की दिशा में उठाया गया है।
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