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  1. क्या इथेनॉल की वजह से बढ़ी चीनी की कीमत? आखिर क्या है दाम बढ़ने की असली वजह? सरकार ने बताया सच

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क्या इथेनॉल की वजह से बढ़ी चीनी की कीमत? आखिर क्या है दाम बढ़ने की असली वजह? सरकार ने बताया सच

Upstox

4 min read | अपडेटेड August 26, 2026, 17:38 IST

सारांश

सरकार ने बयान में कहा कि देश में घरेलू जरूरत पूरी करने के लिए पर्याप्त चीनी स्टॉक मौजूद है। नए पेराई सीजन की शुरुआत तक घरेलू मांग पूरी करने के लिए पर्याप्त स्टॉक उपलब्ध है। इसलिए मौजूदा स्थिति को तत्काल चीनी की गंभीर कमी के तौर पर नहीं देखा जा सकता।

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सरकार का कहना है कि चीनी की कीमतों में मौजूदा तेजी के पीछे सिर्फ एक कारण नहीं है।

हाल के दिनों में चीनी की कीमतों में बढ़ोतरी को लेकर कई तरह की बातें सामने आई हैं। इस बीच सरकार इस पूरे मामले पर स्थिति स्पष्ट की है। यह चर्चा भी हो रही है कि इथेनॉल की वजह से चीनी की कीमत बढ़ी है। सरकार का कहना है कि कीमतों में मौजूदा तेजी के पीछे सिर्फ एक कारण नहीं है। कम उत्पादन, त्योहारी मांग, अंतरराष्ट्रीय बाजार की स्थिति और कुछ मिलों व कारोबारियों द्वारा चीनी का स्टॉक रोककर रखना भी इसके कारण हैं। आइए समझते हैं इस पूरे मामले पर सरकार ने क्या कहा।

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क्या इथेनॉल की वजह से बढ़ी चीनी की कीमत

सरकार का कहना है कि यह धारणा पूरी तरह सही नहीं है कि इथेनॉल उत्पादन के लिए चीनी का इस्तेमाल बढ़ने से बाजार में चीनी की कमी हुई है। आंकड़ों के मुताबिक, इथेनॉल के लिए डायवर्ट की गई चीनी की हिस्सेदारी 2022-23 में करीब 12% थी, जो 2025-26 में घटकर लगभग 9% रह गई है। साथ ही, भारत में अब इथेनॉल का करीब तीन-चौथाई उत्पादन अनाज, खासकर मक्का, से होता है। इसलिए इथेनॉल को मौजूदा कीमत बढ़ोतरी का मुख्य कारण नहीं माना जा सकता।

क्या देश में चीनी की कमी है?

सरकार ने बयान में कहा कि देश में घरेलू जरूरत पूरी करने के लिए पर्याप्त चीनी स्टॉक मौजूद है। नए पेराई सीजन की शुरुआत तक घरेलू मांग पूरी करने के लिए पर्याप्त स्टॉक उपलब्ध है। इसलिए मौजूदा स्थिति को तत्काल चीनी की गंभीर कमी के तौर पर नहीं देखा जा सकता।

फिर क्यों बढ़े चीनी के दाम?

दुनिया के बाजार में चीनी की कीमतों में भी बढ़ोतरी हुई है। अंतरराष्ट्रीय कीमत करीब 474 डॉलर प्रति टन से बढ़कर 552 डॉलर प्रति टन हो गई है। यानी दो महीने से भी कम समय में इसमें 16% से ज्यादा की वृद्धि हुई। इसका असर भारतीय बाजार पर भी पड़ता है।

भारत में मौजूदा चीनी उत्पादन का अनुमान करीब 306 लाख टन (LMT) है, जबकि शुरुआती अनुमान 343 LMT का था। यानी उत्पादन उम्मीद से कम रहा है। हालांकि, इसे चीनी उत्पादन के पूरी तरह ध्वस्त होने के तौर पर नहीं देखा जा सकता।

हाल में चीनी की कीमतों में तेजी जरूर आई है, लेकिन लंबी अवधि में बढ़ोतरी सीमित रही है। अगस्त 2024 से जुलाई 2026 के बीच कीमतों में औसतन सालाना करीब 3% की वृद्धि हुई। इसलिए मौजूदा तेजी को मुख्य रूप से अल्पकालिक दबाव माना जा रहा है।

सरकार ने उठाए कई कदम

सरकार ने जमाखोरी और कृत्रिम कमी रोकने के लिए 1 अगस्त से 30 नवंबर 2026 तक चीनी डीलरों पर 400 टन की स्टॉक सीमा लागू की है। 1 सितंबर से थोक उपभोक्ता 15 दिनों की खपत से ज्यादा चीनी का स्टॉक नहीं रख सकेंगे। चीनी मिलों में स्टॉक की जांच के लिए केंद्र और राज्य सरकार की संयुक्त टीमें भी भेजी जा रही हैं।

इसके अलावा, घरेलू उपलब्धता बढ़ाने के लिए 10 लाख टन कच्ची चीनी के शुल्क-मुक्त आयात की अनुमति दी गई है। राज्यों और मिलों को 15 अक्टूबर से पेराई शुरू करने की सलाह दी गई है। इससे अक्टूबर में उत्पादन सामान्य 3-4 लाख टन से बढ़कर 10 लाख टन से अधिक हो सकता है।

अब आगे क्या?

भारत का चीनी उद्योग अब सिर्फ चीनी उत्पादन तक सीमित नहीं है। यह किसानों, चीनी मिलों, इथेनॉल और ऊर्जा उत्पादन के साथ-साथ वैश्विक व्यापार से भी जुड़ा है। मौजूदा कीमतों पर दबाव अस्थायी माना जा रहा है। सरकार का लक्ष्य उपभोक्ताओं के हितों, किसानों को समय पर भुगतान और उद्योग की स्थिरता के बीच संतुलन बनाए रखना है।

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Upstox Hindi News Desk पत्रकारों की एक टीम है जो शेयर बाजारों, अर्थव्यवस्था, वस्तुओं, नवीनतम व्यावसायिक रुझानों और व्यक्तिगत वित्त को उत्साहपूर्वक कवर करती है।

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