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3 min read | अपडेटेड August 26, 2026, 12:56 IST
सारांश
जॉर्जीवा ने कहा कि एआई के भविष्य के प्रभाव को लेकर अभी काफी अनिश्चितता है, जिसमें वित्तीय स्थिरता के लिए संभावित जोखिम भी शामिल हैं। उन्होंने कहा, ‘अगर परिदृश्य बिगड़ता है तो इससे दुनिया भर में वृद्धि की संभावनाओं में अंतर और बढ़ेगा।’

तेल संकट और एआई बूम के बीच खींचतान से गुजर रही ग्लोबल इकोनॉमी (Photo: Created by ChatGPT)
आईएमएफ की मैनेजिंग डायरेक्टर क्रिस्टालिना जॉर्जीवा ने कहा कि होर्मुज स्ट्रेट में रुकावट से हुए तेल संकट का ग्लोबल इकोनॉमी ने कई कारणों से ‘आशंका से बेहतर’ सामना किया है। इनमें आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) में इन्वेस्टमेंट में तेजी भी शामिल है। जॉर्जीवा ने कहा, ‘एआई की शुरुआत अमेरिका तक सीमित एक घटना थी, लेकिन अब यह ग्लोबल इकोनॉमी के लिए वृद्धि का एक प्रमुख कारक बन रही है। अन्य देश भी डेटा सेंटर और अन्य बुनियादी ढांचे के निर्माण में तेजी ला रहे हैं।’ उन्होंने कहा कि तेल और गैस भंडार से निकासी बढ़ने और खाड़ी देशों के बाहर से सप्लाई बढ़ने समेत कई कारकों के कारण ग्लोबल इकोनॉमी ने होर्मुज स्ट्रेट के बंद होने से पैदा हुए ऊर्जा संकट का ‘आशंका से बेहतर’ सामना किया है। जॉर्जीवा ने अगले सप्ताह उत्तरी कैरोलिना के एशविले में होने वाली जी-20 वित्त मंत्रियों की बैठक से पहले कहा, ‘वहीं, एआई में इन्वेस्टमेंट में तेजी से इसे बढ़ावा मिल रहा है। खासकर अमेरिका में, जहां कंपनियों की कमाई और उपभोक्ता डिमांड दोनों मजबूत बनी हुई हैं।’
उन्होंने कहा कि ग्लोबल इकोनॉमी पश्चिम एशिया से पैदा हुए नेगेटिव सप्लाई झटके और एआई से पैदा हुई पॉजिटिव डिमांड झटके के बीच खींचतान देख रही है। जॉर्जीवा ने कहा, ‘इन दोनों ताकतों का कुल प्रभाव अलग-अलग देशों पर अलग-अलग है। यह इस बात पर निर्भर करता है कि वे एनर्जी सप्लाई में रुकावट, व्यापक आर्थिक कमजोरियों और एआई सेक्टर में अपनी स्थिति के प्रति कितने संवेदनशील हैं।’ उन्होंने कहा कि ग्लोबल आर्थिक परिदृश्य को लेकर जोखिम वसंत में हुई बैठकों के समय की तुलना में अधिक संतुलित हैं, लेकिन अब भी नेगेटिव दिशा में झुके हुए हैं और अनिश्चितता का स्तर ऊंचा बना हुआ है।
उन्होंने कहा, ‘बढ़ते राजकोषीय दबाव और मुद्रास्फीति में कमी थमना बाजारों और नीति निर्माताओं के लिए चिंता का विषय है।’ आईएमएफ प्रमुख ने कहा कि तेल और गैस के भंडार घट रहे हैं और उत्तरी गोलार्ध में सर्दियां जल्द आने वाली हैं। उन्होंने कहा, ‘इसका मतलब है कि ऊर्जा संकट अभी खत्म नहीं हुआ है। तेल की कीमतों में फिर से वृद्धि मुद्रास्फीति को बढ़ा सकती है, जिससे केंद्रीय बैंकों को सख्त मौद्रिक नीति बनाए रखने के लिए मजबूर होना पड़ सकता है। इसका असर कर्ज चुकाने की लागत और आर्थिक गतिविधियों पर भी पड़ेगा।’
जॉर्जीवा ने कहा कि एआई के भविष्य के प्रभाव को लेकर अभी काफी अनिश्चितता है, जिसमें वित्तीय स्थिरता के लिए संभावित जोखिम भी शामिल हैं। उन्होंने कहा, ‘अगर परिदृश्य बिगड़ता है तो इससे दुनिया भर में वृद्धि की संभावनाओं में अंतर और बढ़ेगा।’ जॉर्जीवा ने कहा कि कम कमाई वाले देशों में तेल, गैस और उर्वरक जैसी अन्य प्रमुख वस्तुओं की आपूर्ति में व्यवधान खाद्य असुरक्षा का कारण बन सकता है। उन्होंने कहा, ‘एआई के क्षेत्र में पीछे रह जाने का जोखिम भी विकासशील देशों में अधिक है।’ आईएमएफ ने जुलाई में 2026 के लिए ग्लोबल वृद्धि का अनुमान घटाकर 3% कर दिया था। उसने पश्चिम एशिया संघर्ष, व्यापार के विखंडन और एआई को लेकर अनिश्चितताओं से पैदा होने वाले नकारात्मक जोखिमों की चेतावनी दी थी। संस्था अपने आर्थिक परिदृश्य का अगला संशोधन अक्टूबर के मध्य में बैंकॉक में होने वाली आईएमएफ और विश्व बैंक की वार्षिक बैठकों के दौरान करेगी।
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