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BRICS Summit 2026 की मेजबानी करेगा भारत, क्यों है यह अहम और भारत के सामने कौन सी चुनौतियां हैं?

Shubham Singh Thakur

4 min read | अपडेटेड September 02, 2026, 13:38 IST

सारांश

2026 में भारत की BRICS अध्यक्षता ऐसे समय हो रही है जब अमेरिका-ईरान संघर्ष ने वैश्विक राजनीति और ऊर्जा बाजार को प्रभावित किया है। ईरान BRICS के जरिए अमेरिकी सैन्य कार्रवाई के खिलाफ समर्थन चाहता है, जबकि भारत के अमेरिका, ईरान और खाड़ी देशों सभी के साथ अहम रिश्ते हैं।

BRICS Summit 2026

2026 में भारत की BRICS अध्यक्षता ऐसे समय हो रही है जब अमेरिका-ईरान संघर्ष ने वैश्विक राजनीति और ऊर्जा बाजार को प्रभावित किया है।

भारत 12-13 सितंबर 2026 को नई दिल्ली के भारत मंडपम में 18वें BRICS शिखर सम्मेलन की मेजबानी करेगा। इस बार भारत BRICS का अध्यक्ष है और इसकी थीम “Building for Resilience, Innovation, Cooperation and Sustainability” रखी गई है। इसका मतलब है कि BRICS देश आर्थिक मजबूती, तकनीक, आपसी सहयोग और टिकाऊ विकास पर मिलकर काम करने की कोशिश करेंगे।

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क्यों अहम है BRICS Summit 2026?

2026 में भारत की BRICS अध्यक्षता ऐसे समय हो रही है जब अमेरिका-ईरान संघर्ष ने वैश्विक राजनीति और ऊर्जा बाजार को प्रभावित किया है। ईरान BRICS के जरिए अमेरिकी सैन्य कार्रवाई के खिलाफ समर्थन चाहता है, जबकि भारत के अमेरिका, ईरान और खाड़ी देशों सभी के साथ अहम रिश्ते हैं। भारत के लिए सबसे बड़ी चुनौती संतुलन बनाए रखना है। Strait of Hormuz में तनाव बढ़ने से तेल की सप्लाई और कीमतों पर असर पड़ सकता है, जिसका सीधा असर भारत के आयात बिल, महंगाई और आर्थिक विकास पर पड़ सकता है।

सितंबर में होने वाला BRICS Summit भारत के लिए सिर्फ एक कूटनीतिक आयोजन नहीं है। यह दिखाने का मौका है कि भारत अलग-अलग हितों वाले देशों को एक मंच पर लाकर व्यावहारिक सहयोग, व्यापार और शांति की दिशा में कितना आगे बढ़ा सकता है। खासकर चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग की संभावित मौजूदगी भारत-चीन संबंधों के लिहाज से भी इस सम्मेलन को अहम बना सकती है।

BRICS में कौन-कौन से देश हैं?

BRICS में इस समय 11 सदस्य देश हैं- ब्राजील, रूस, भारत, चीन, दक्षिण अफ्रीका, मिस्र, इथियोपिया, ईरान, इंडोनेशिया, सऊदी अरब और UAE। इसके अलावा कई देश पार्टनर कंट्री के तौर पर जुड़े हैं। यह समूह दुनिया की करीब 49% आबादी, 39% वैश्विक GDP और 23% अंतरराष्ट्रीय व्यापार का प्रतिनिधित्व करता है। इसलिए BRICS का आर्थिक और राजनीतिक प्रभाव लगातार बढ़ रहा है।

BRICS शब्द 2001 में Goldman Sachs के अर्थशास्त्री जिम ओ'नील ने दिया था। तब इसमें सिर्फ Brazil, Russia, India और China यानी BRIC शामिल थे। 2009 में पहला BRIC Summit हुआ। 2010 में South Africa को शामिल करने पर BRIC, BRICS बन गया। इसके बाद 2024 में Egypt, Ethiopia, Iran और UAE सदस्य बने, जबकि Indonesia 2025 में शामिल हुआ।

BRICS का उद्देश्य क्या है?

BRICS कोई औपचारिक अंतरराष्ट्रीय संगठन नहीं है। यह उभरती अर्थव्यवस्थाओं का ऐसा मंच है, जहां सदस्य देश आर्थिक और कूटनीतिक मुद्दों पर साथ मिलकर चर्चा करते हैं। समूह चाहता है कि IMF, World Bank और UN जैसे वैश्विक संस्थानों में विकासशील देशों की आवाज ज्यादा मजबूत हो।

BRICS को पश्चिमी देशों के वर्चस्व के विकल्प के तौर पर भी देखा जाता है। हालांकि इसके सदस्य देशों के हित हमेशा एक जैसे नहीं होते। चीन और भारत के बीच मतभेद हैं, वहीं रूस, ईरान और अमेरिका के रिश्ते भी तनावपूर्ण हैं। यही वजह है कि BRICS के सामने एकजुट आवाज बनाए रखना बड़ी चुनौती है।

भारत के लिए BRICS क्यों अहम है?

भारत के लिए BRICS की सबसे बड़ी खासियत यह है कि उसे एक ही मंच पर चीन, रूस, ईरान, सऊदी अरब और UAE जैसे देशों से बातचीत का मौका मिलता है। साथ ही भारत अमेरिका, यूरोप, जापान और ऑस्ट्रेलिया के साथ अपने रिश्ते भी बनाए रख सकता है। भारत BRICS के जरिए खुद को Global South यानी विकासशील देशों की आवाज के तौर पर मजबूत करना चाहता है। 2026 की अध्यक्षता में भारत ने MSME के लिए वैश्विक बाजार तक पहुंच आसान बनाने, ट्रेड फाइनेंस बढ़ाने और सप्लाई चेन को मजबूत करने पर जोर दिया है।

क्या BRICS की अपनी करेंसी आएगी?

BRICS की एक साझा करेंसी बनाने की चर्चा होती रही है, लेकिन फिलहाल इसका कोई तत्काल संकेत नहीं है। ज्यादा व्यावहारिक कोशिश लोकल करेंसी, डिजिटल पेमेंट सिस्टम और CBDC को जोड़कर सीमा पार भुगतान आसान बनाने की है। भारत के लिए इसका फायदा यह हो सकता है कि दूसरे BRICS देशों के साथ व्यापार में डॉलर पर निर्भरता कुछ कम हो और भुगतान की लागत घटे। हालांकि यह प्रक्रिया धीरे-धीरे आगे बढ़ने की संभावना है।

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